आरा / पटना। बिहार के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल भरत तिवारी एनकाउंटर केस (Bharat Tiwari Encounter Case) की गूंज अब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद यानी राष्ट्रपति भवन तक पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह द्वारा राष्ट्रपति को संबोधित करते हुए भेजी गई विशेष याचिका पर राष्ट्रपति कार्यालय ने बड़ा संज्ञान लिया है।
इस मामले में त्वरित कदम उठाते हुए राष्ट्रपति भवन की ओर से बिहार के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को निर्देश जारी किया गया है कि इस पूरे प्रकरण पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, की गई कार्रवाई की पूरी विस्तृत जानकारी सीधे याचिकाकर्ता को भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
एक नज़र में समझें भरत तिवारी एनकाउंटर केस
इस पूरे मामले की प्रशासनिक गंभीरता, कानूनी कार्रवाई और इससे जुड़े कथित वित्तीय घोटाले के विवरण को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है-
| मामले का मुख्य आयाम | आधिकारिक एवं कानूनी विवरण |
|---|---|
| पीड़ित/मृतक का नाम | भरत तिवारी (कथित एनकाउंटर का शिकार) |
| राष्ट्रपति को याचिका की तिथि | 24 जून 2026 (ईमेल के माध्यम से) |
| आधिकारिक निर्देश जारी | मुख्य सचिव, बिहार सरकार को कार्रवाई के आदेश |
| FIR में नामजद मुख्य आरोपी | SDPO, थानाध्यक्ष और संबंधित STF के जवान |
| मामले से जुड़ा कथित घोटाला | जवइनिया गांव पुनर्वास फंड (अनुमानित 1,400 करोड़ रुपये) |
“FIR में नामजद SDPO, थानाध्यक्ष और STF जवानों की तुरंत हो गिरफ्तारी”
याचिका दायर करने वाले सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट संजीव कुमार सिंह ने बताया कि भरत तिवारी के कथित एनकाउंटर के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी (FIR) के आधार पर ही उन्होंने राष्ट्रपति के समक्ष न्याय की गुहार लगाई थी। उन्होंने अपनी याचिका में पुरजोर मांग की है कि इस जघन्य मामले में जिन भी पुलिस अधिकारियों के नाम शामिल हैं, उन्हें तुरंत सेवा से निलंबित कर सलाखों के पीछे भेजा जाए।
एडवोकेट संजीव कुमार सिंह का अगला कानूनी कदम:
- मुख्य सचिव से मुलाकात: राष्ट्रपति कार्यालय से मेल के जरिए जवाब आने के बाद अब वे खुद इस निर्देश को लेकर बिहार के चीफ सेक्रेटरी से मुलाकात करने पटना जाएंगे।
- कोर्ट से वारंट की तैयारी: उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस प्रशासन ने अपनी ही महकमे के नामजद आरोपियों को बचाने का प्रयास किया या उनकी गिरफ्तारी में देरी की, तो वे सीधे आरा कोर्ट (Ara Court) का रुख करेंगे और आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी कराने के लिए कानूनी आवेदन देंगे।
एनकाउंटर के पीछे छिपा है 1400 करोड़ रुपये का कथित महाघोटाला?
इस एनकाउंटर केस में उस समय एक बेहद सनसनीखेज मोड़ आ गया जब एडवोकेट संजीव कुमार सिंह ने इसके पीछे एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले और प्रशासनिक सांठगांठ का पर्दाफाश किया। उन्होंने बताया कि पिछले महीने (मई 2026) जब वे कानूनी सिलसिले में आरा आए थे, तो उनकी मुलाकात और लंबी बातचीत भरत तिवारी से हुई थी।
“भरत तिवारी ने मुझे अत्यंत गोपनीय दस्तावेजों के साथ बताया था कि नदी के कटाव के बाद दोबारा बसाए गए ‘जवइनिया गांव’ के विकास और पुनर्वास के लिए सरकार की ओर से 1,400 करोड़ रुपये का विशाल फंड स्वीकृत हुआ था। लेकिन उस पूरे फंड को धरातल पर लगाने के बजाय स्थानीय एसडीएम (SDM) ने उसमें भारी वित्तीय घोटाला किया है, जिसमें कथित तौर पर जिले के डीएम (DM) तक की मौन सहमति शामिल थी।”
संजीव कुमार ने आगे आरोप लगाया कि भरत तिवारी इस महाघोटाले के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे थे। वे जब भी इसकी लिखित शिकायत लेकर उच्च अधिकारियों के पास जाते थे, तो उनकी बात सुनने या कार्रवाई करने के बजाय उन्हें टाल-मटोल कर भगा दिया जाता था और लगातार गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही थीं।
एडवोकेट संजीव कुमार सिंह ने भरत को आश्वस्त किया था कि वे इस पूरे भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए पटना हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर करेंगे, लेकिन इस कानूनी प्रक्रिया के शुरू होने से पहले ही भरत तिवारी का यह कथित एनकाउंटर हो गया। राष्ट्रपति भवन के इस ताजा दखल के बाद अब बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचना तय माना जा रहा है।

















