जम्मू कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के मामले की जांच कर रही एनआईए ने अपनी चार्जशीट फाइल कर दी है। उस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय घोड़ा वाले की मौत हो गई थी। NIA की जांच में पाकिस्तान से जुड़े हैंडलर की भूमिका और हमले की तैयारी के बारे में कई अहम तथ्य सामने आए हैं।
हमले की तैयारी कब शुरू हुई
NIA की जांच के मुताबिक, पर्यटकों पर हमला करने की योजना पाकिस्तान के पाले आतंकियों की प्लानिंग पहले से ही चल रही है। एजेंसियों के फोन से मिले डिजिटल रिकॉर्ड्स में 15 और 16 अप्रैल के मैप स्क्रीनशॉट मिले हैं। ये स्क्रीनशॉट बैसरन के आसपास के इलाके दिखाते हैं। आतंकियों ने ट्रेकिंग और हाइकिंग के लिए बनी GPS ऐप का इस्तेमाल किया। इस ऐप में लोकेशन प्लॉट करके पाकिस्तान स्थित हैंडलर से शेयर की गईं। NIA का कहना है कि ये टाइमस्टैंप साफ दिखाते हैं कि साजिश कम से कम 15 अप्रैल से सक्रिय थी।
मारे गए आतंकियों के पास से क्या मिला
28 जुलाई 2025 को श्रीनगर के पास दाचीगाम जंगलों में ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान तीन आतंकी मारे गए:
- फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान
- हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान
- हमजा अफगानी
इनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद हुए। इन फोनों की जांच में कई फोटो, हैंडलर से चैट के स्क्रीनशॉट और नेविगेशन डेटा मिला। फोन पाकिस्तान में बेचे गए थे।
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पाकिस्तान से दिया गया निर्देश
NIA ने पाकिस्तानी नागरिक अली साजिद उर्फ अली भाई उर्फ साजिद जट्ट को मुख्य हैंडलर बताया है। वह लश्कर-ए-तैयबा और उसके प्रॉक्सी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट का कमांडर है। पाकिस्तानी हैंडलरों ने हमले की पूरी योजना बनाई। उसने एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए निर्देश दिए, लोकेशन और कोऑर्डिनेट्स भेजे, ड्रोन से सामान ड्रॉप करवाया और आतंकियों को रूट और लोकेशन बदलने के आदेश दिए।
सितंबर 2024 में एक संरक्षित गवाह ने फैसल को देखा था। गवाह के मुताबिक, चार आतंकी पंजाबी और उर्दू बोल रहे थे। वे साजिद जट के बारे में बात कर रहे थे और गोगल डारा जंगल में ड्रोन से सामान गिरने की चर्चा कर रहे थे। गवाह को मजबूर करके वहां ले जाया गया, जहां ड्रोन से पीले पैकेट में 20 पिस्तौल, 15 लाख रुपये और त्रिकोणीय बम गिराए गए।
क्या कहती है एनआईए
NIA के अनुसार, हमले से एक दिन पहले 21 अप्रैल को तीनों आतंकी परवेज अहमद के ढोक (मिट्टी की झोपड़ी) पर गए। परवेज और उनके चाचा बशीर अहमद जोठड़ पर आतंकियों को खाना और शेल्टर देने का आरोप है। उल्लेखनीय है कि बैसरन घाटी दूरदराज का इलाका है, जहां CCTV भी नहीं है, इसलिए आतंकियों ने इसे निशाना बनाया। चार्जशीट के मुताबिक, NIA ने जांच के दौरान 1,100 से ज्यादा गवाहों से पूछताछ की।
















