जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से जुड़े पुराने मामलों की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने वर्ष 1996 में श्रीनगर में हुई हिंसा के मामले में छह अलगाववादी और हुर्रियत नेताओं के खिलाफ 40 पन्नों का आरोपपत्र दाखिल किया है। यह मामला करीब 30 साल पुराना है और अब इसकी फिर से जांच होने से इसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
30 साल पुराने मामले में छह अलगाववादी नेताओं पर आरोपपत्र
एनआईए ने यह आरोपपत्र विशेष एनआईए अदालत में पेश किया है। जिन छह लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया गया है, उनमें सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वकील, शब्बीर अहमद शाह, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बक्शी शामिल हैं। इनमें से गिलानी, गनी लोन और याकूब वकील का निधन हो चुका है। शब्बीर अहमद शाह फिलहाल जेल में बंद हैं। वहीं, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बक्शी किसी कारणवश अदालत में पेश नहीं हो सके। अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। यह घटना 17 जुलाई 1996 की है। उस समय सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए आतंकी हिलाल अहमद बेग के जनाजे के दौरान श्रीनगर के ताज क्रॉसिंग इलाके में हिंसा भड़क गई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, यह हिंसा पहले से बनाई गई योजना का हिस्सा थी। आरोप है कि जनाजे में कई हथियारबंद आतंकी भी मौजूद थे, जिन्होंने सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी की। इस हमले में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके अलावा हिंसक भीड़ ने सरकारी वाहनों और अन्य सार्वजनिक संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया था।
इस घटना के बाद उसी समय श्रीनगर के शेरगढ़ी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई थी, लेकिन लंबे समय तक मामले में कोई खास प्रगति नहीं हुई। वर्ष 2023 में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर 1990 के दशक से लंबित आतंकी हिंसा के मामलों की दोबारा समीक्षा शुरू की गई। इसी अभियान के तहत इस मामले को अप्रैल 2026 में एनआईए ने फिर से दर्ज कर जांच शुरू की और अब अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। गौरतलब है कि इससे पहले भी पिछले महीने कश्मीरी हिंदू नर्स सरला भट्ट के अपहरण और हत्या के 35 साल पुराने मामले में आरोपपत्र दाखिल किया गया था। उस मामले में जेकेएलएफ के प्रमुख रहे मोहम्मद यासीन मलिक समेत पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है।

















