जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल हुए आतंकी हमले की जांच में कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत में जो चार्जशीट पेश की है उससे पता चला है कि इस कायराना हमले के तार पूरी तरह से पाकिस्तान से जुड़े हुए थे। आतंकियों के मोबाइल फोन, डिजिटल फॉरेंसिक एविडेंस, चाइनीज मोबाइल फोन और अमेरिकी कंपनी के हाई-टेक कैमरों की कड़ियों ने पाकिस्तान की साजिश को बेनकाब कर दिया है।
फॉरेंसिक जांच में खुला पाकिस्तान का राज
22 अप्रैल 2025 को हुए इस आतंकी हमले में निर्दोष हिंदू पर्यटकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इस हमले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की तकनीकी और फॉरेंसिक टीम ने मुठभेड़ में मारे गए आतंकवादियों के पास से बरामद उपकरणों की गहन जांच की। जांच रिपोर्ट के अनुसार, पहलगाम के मशहूर ‘बायसरन’ इलाके की सटीक भौगोलिक लोकेशन आतंकियों के मोबाइल फोन में पहले से ही फीड की गई थी। उनके फोन में मिले नेविगेशन ऐप के डेटा से पता चला है कि हमले की अंतिम तैयारी के लिए आतंकियों ने 15 और 16 अप्रैल 2025 को ही बायसरन घाटी के कई स्क्रीनशॉट लेकर अपने फोन में सेव कर लिए थे।
आतंकियों से मिले 2 स्मार्टफोन के IMEI नंबर और सप्लाई चेन रिकॉर्ड को खंगाला गया तो पता चला की चीन से ये दोनों मोबाइल फोन सीधे पाकिस्तान के कराची और लाहौर शहरों के पतों पर डिलीवर किए गए थे। वहां से इन्हें चोरी-छिपे जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के आतंकियों तक पहुंचाया गया था।
चीन से आतंकियों ने ऑर्डर किया था GoPro कैमरा
एनआईए की जांच में यह भी पता चला है कि मारे गए आतंकियों के पास से एक अमेरिकी कंपनी GoPro Inc. का आधुनिक कैमरा बरामद हुआ था। जांच एजेंसी ने जब इस हाई-टेक कैमरे के सीरियल नंबर के आधार पर अमेरिकी निर्माता कंपनी से संपर्क किया तो कंपनी ने लिखित तौर पर बताया कि यह विशेष कैमरा चीन में मौजूद उनके आधिकारिक डिस्ट्रीब्यूटर को बेचा गया था। अधिकारियों का कहना है कि चीन के रास्ते ही इसे आतंकियों तक पहुंचाया गया। उनका मानना है कि अगर इस रूट को ट्रैक किया जाएगा तो आतंकियों को मिलने वाली फंडिंग और इसके पीछे किस ग्रुप का हाथ है पता लगाया जा सकता है।
अधिकारियों के मुताबिक, आजकल आतंकी संगठनों में हमलों की लाइव रिकॉर्डिंग करने, प्रोपेगैंडा वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर दहशत फैलाने के लिए बॉडी कैमरों और एक्शन कैमरों का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है।
हमले का मास्टरमाइंड साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’
एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, इस जघन्य अपराध का मास्टरमांड और हैंडलर लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर सैफुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ है। साजिद जट्ट वर्तमान में पाकिस्तान के लाहौर में बैठकर अपने नेटवर्क को संभालता है। 2005 में घुसपैठ के दौरान दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में उसके पैर में गोली लगी थी। इसके बाद से वह नकली पैर का इस्तेमाल करता है और लंगड़ाकर चलता है इसीलिए लोग उसे ‘लंगड़ा’ कहकर बुलाते हैं।
साजिद जट्ट ने ही 2019 में लश्कर के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) की स्थापना की थी। 22 अप्रैल 2025 को जब तीन पाकिस्तानी आतंकी बायसरन घाटी में अंधाधुंध फायरिंग कर रहे थे तब साजिद जट्ट लाहौर में बैठकर उन्हें दिशा-निर्देश दे रहा था। उसने ही आतंकियों को सैटेलाइट के जरिए लोकेशन भेजी थी। साजिद जट्ट का नाम कश्मीर में हुए कई बड़े हमलों से जुड़ा है।
इसमें डांगरी हमला, पुंछ में वायुसेना के काफिले पर हुआ हमला, रियासी बस हमला और 20 अक्टूबर 2024 को श्रीनगर की जेड-मोड़ टनल पर हुई फायरिंग जैसी वारदातें शामिल हैं। भारत सरकार ने इस मोस्ट वांटेड आतंकी पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है।
स्थानीय टूरिस्ट गाइड ने हमले से पहले आतंकियों को देखा था
चार्जशीट में यह भी पता चला है कि स्थानीय टूरिस्ट गाइड परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार ने हमले से पहले इन हथियारबंद संदिग्ध आतंकियों को बायसरन के जंगलों में देखा था। यदि इन दोनों गाइडों ने समय रहते इस बात की सूचना सुरक्षा बलों या स्थानीय पुलिस को दे दी होती तो यह हमला टाला जा सकता था। सुरक्षा बलों ने इन दोनों को आतंकियों को शरण देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। क्योंकि हमले के एक दिन पहले आतंकियों ने गाइड परवेज की झोपड़ी में जाकर खुद को खुदा का बंदा बताकर खाना खाया था और जाते समय अपने साथ रोटी-सब्जी भी पैक करवा ली थी।
हमले वाले दिन यानी 22 अप्रैल को इन तीनों ने बायसरन घाटी में एक पेड़ के नीचे बैठकर वही खाना खाया और फिर अपनी एम4 कार्बाइन (M4 Carbine) राइफलों से निर्दोष पर्यटकों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। लोगों की हत्या करने के बाद आतंकियों ने हवा में फायरिंग करते हुए धार्मिक नारे भी लगाए थे।
ऑपरेशन सिंदूर से लिया भारत ने बदला
भारतीय सेना ने इस हमले का बदला पाकिस्तान में घुसे बैठे आतंकियों का खात्मा कर लिया था। 6 मई की रात ठीक 1:05 बजे भारतीय लड़ाकू विमानों ने सीमा पार पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर के भीतर घुसकर एक बड़ा हवाई हमला किया। इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) नाम दिया गया। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने अत्याधुनिक मिसाइलों से आतंकियों के 9 प्रमुख लॉन्च पैड्स और ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया। इस एयर स्ट्राइक में 100 से ज्यादा खूंखार आतंकवादी मारे गए थे। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और उसके 4 मुख्य सहयोगी भी शामिल थे।
हमले के ठीक तीन महीने बाद 28 जुलाई 2025 को दाचीगाम के घने जंगलों में चलाए गए ‘ऑपरेशन महादेव’ के दौरान सुरक्षा बलों ने पहलगाम हमले को अंजाम देने वाले तीनों मुख्य पाकिस्तानी आतंकियों फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई और हमजा अफगानी को मार गिराया था।

















