खाड़ी से संकट के बादल छंटने लगे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता चल रही है। युद्ध रुक चुका है और इसका सकारात्मक असर होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों की आवाजाही पर पड़ा है। शिपिंग मंत्रालय का कहना है कि अभी तक 30 भारत-बाउंड जहाज होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इनमें से आधे यानी 15 जहाजों में एलपीजी और एलएनजी था। आठ जहाजों में बल्क कार्गो था और सात क्रूड ऑयल टैंकर थे।
कब-कब पार किए जहाज
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 1 से जून 17 के बीच 19 जहाज इस स्ट्रेट से गुजरे थे। ईरान-अमेरिका के बीच MoU साइन होने के बाद 11 जहाज सुरक्षित तरीके से पार कर चुके हैं। कुल 30 जहाजों में 17 विदेशी झंडे वाले हैं, जिनमें मार्शल आइलैंड्स के पांच जहाज सबसे ज्यादा हैं।
अभी इंतजार कर रहे जहाज
26 जहाज अभी भी होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से, यानी फारस की खाड़ी में इंतजार कर रहे हैं। ये भारत के हित वाले जहाज हैं – कुछ भारतीय फ्लैग वाले और कुछ विदेशी, लेकिन भारत जाने वाले। इनमें से तीन जहाजों में एनर्जी (ऊर्जा सामग्री) है, दस में खाद है और बाकी 13 में दूसरा कार्गो है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों महत्वपूर्ण है
यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जो दुनिया की कुल ऊर्जा सप्लाई का करीब एक-पांचवां हिस्सा (20%) संभालता है। भारत के लिए यह रूट खास तौर पर जरूरी है क्योंकि हमारा एलएनजी और एलपीजी का बड़ा स्रोत गल्फ देश हैं।
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भारत की तैयारी
शिपिंग मंत्रालय की नजर इन सारे जहाजों पर बनी हुई है। जो जहाज पार कर चुके हैं, वे भारतीय बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं या पहुंच चुके हैं। जो इंतजार कर रहे हैं, उनकी भी निगरानी चल रही है ताकि कोई समस्या न आए।
क्या है जहाजों की स्थिति
पार हो चुके जहाज:
30 (17 विदेशी फ्लैग)एलपीजी/एलएनजी: 15
बल्क कार्गो: 8
क्रूड टैंकर: 7
इंतजार कर रहे: 26
एनर्जी: 3
खाद: 10
अन्य कार्गो: 13
















