सत्ता की कुर्सी बचाने के लिए 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगा दिया गया। संविधान की हत्या की गई और लोकतंत्र को बंधक बना लिया गया है। जो आवाज उठाते थे उन्हें पहले थाने में पीटा जाता था और इसके बाद जेल भेजते थे। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने सत्याग्रह कर तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई और लोकतंत्र को बेड़ियों से मुक्त कराया। उस समय बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया।
दिल्ली में रह रहीं सुमित्रा गुलाटी बताती हैं कि आपातकाल के समय लोगों को बहुत प्रताड़ित किया गया। छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ा गया। मेरा परिवार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से हमेशा से जुड़ा रहा। मैं हिसार से छोटे भाई की शादी में दिल्ली आई थी। बड़े भैया दिल्ली में सत्याग्रह पर बैठे थे। 12 दिसंबर 1975 के आस-पास की घटना है। शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन के पास रानी बाग में मैं उन्हें तिलक लगाने गई थी।

भारत माता की जय के नारे लगाते ही बरसने लगी लाठियां
सुमित्रा गुलाटी की उम्र भले ही 82 साल है लेकिन उन्हें आपातकाल के समय की सारी बातें बखूबी याद हैं। वह बताती हैं कि भारत माता की जय के नारे लगाते ही हम सब पर पुलिस की लाठियां बरसने लगीं। मेरी बिटिया सरोज उस समय करीब तीन साल की थी। लाठियों की बौछारों के बीच वह मेरी गोद से नीचे गिर गई। खून बहने लगा। उसके चोट का निशान आज भी है। उस समय सुबह के करीब सात बज रहे होंगे। हमारे परिवार के करीब 11 सदस्यों को पंजाबी बाग थाने ले जाया गया। सर्दियों का दिन था। हमारे पास गर्म कपड़े भी नहीं थे। पूरी रात थाने में रखा और अगले दिन पांच नंबर जेल (तिहाड़) ले गए। हमारा रिकार्ड आज भी वहां है। थाने में कोई सहायता नहीं मिली, खाना भी नहीं दिया। बच्चों को खाना पड़ोसियों ने दिया।

राजमाता सिंधिया के साथ इंदिरा गांधी ने क्या क्या दगे किए
सुमित्रा गुलाटी जी ने बताया कि तिहाड़ जेल में राजमाता सिंधिया भी थीं। हमारे वार्ड में ही थीं। इंदिरा गांधी ने उनके साथ क्या-क्या दगे किए। हमारे परिवार के तीन बच्चों को तिहाड़ जेल में रखा गया। मां-पिताजी, बड़े भाई साहब, भाभी, उनका बेटा, सभी जेल में थे। बच्चों और हम सब के कपड़े बाद आदि बाद में घर से आए। राजमाता सिंधिया मदद के लिए आगे आईं। उन्होंने कहा कि किसी चीज की जरूरत हो तो उनसे कहें। उन्होंने बच्चों की बड़ी सहायता की। हम करीब तीन महीने जेल में थे। लोहिड़ी के आस-पास रिहा हुए। हिसार में ससुर जी करीब डेढ़ साल जेल में रहे।

छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ा गया
सुमित्रा गुलाटी बताती हैं कि जेल से गाड़ियों में ले जाकर कोर्ट में पेशी होती थी। इंदिरा गांधी ने बहुत गलत काम किया। छोटे-छोटे बच्चों को भी नहीं छोड़ा गया। बहुत परेशान किया गया, लेकिन हम लग रहा था कि हम न्याय के लिए लड़ रहे हैं।
















