आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा के लिए कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। वनकर्मी को मारने के मामले में 7 साल की सजा सुनाए जाने के बाद अब भरूच कोर्ट ने वसावा को समन्स भेजा है। पुलिस तंत्र की बदनामी हो, ऐसी टिप्पणी सार्वजनिक मंच से करने के मामले में वसावा के खिलाफ यह केस दर्ज हुआ था, जिसमें 29 जुलाई को कोर्ट के सामने हाजिर होने का आदेश वसावा को दिया गया है।
आप के चैतर वसावा, उनकी पत्नी समेत 9 आरोपियों को 7 साल की कैद की सजा राजपीपला कोर्ट ने सुनाई है। अभी जेल में बंद वसावा को अब भरूच कोर्ट ने कोर्ट के सामने हाजिर होने का फरमान जारी किया है।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद जुलाई 2024 का है, जब वसावा ने सार्वजनिक मंच से पुलिस विभाग की छवि खराब करने वाले बयान दिए थे। शिकायत में बताया गया कि वसावा की तरफ से पुलिस तंत्र के लिए सार्वजनिक रूप से की गई टिप्पणी पूरी तरह निराधार और पुलिस तंत्र की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाली थी।
इस घटना के बाद कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए वसावा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत भरूच एसपी ने एक आधिकारिक रिपोर्ट तैयार कर भरूच कोर्ट में चैतर वसावा के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कोर्ट ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई आगे बढ़ाई है।
वसावा को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया
भरूच कोर्ट ने पहले 23 जून को वसावा को कोर्ट के सामने हाजिर होने का नोटिस भेजा था, लेकिन वसावा जेल में होने के कारण कोर्ट के समक्ष पेश नहीं हो पाए थे।
हालांकि, कोर्ट ने अब वसावा को इस पूरे केस में अपना पक्ष रखने का मौका देने का निर्णय किया है। इसके तहत अब “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता” के आधार पर न्याय के सिद्धांत के अनुसार वसावा को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है।
इसके अनुसरण में अब चैतर वसावा को 29 जुलाई को कोर्ट के सामने हाजिर होने का आदेश दिया गया है।















