भुवनेश्वर : अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने राज्य में कक्षा 1 से 8 तक की नई पाठ्यपुस्तकों में पाई गई त्रुटियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे ओड़िया अस्मिता और शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर आघात बताया है। संगठन ने मांग की है कि इस मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा त्रुटिरहित पुस्तकों को पुनः प्रकाशित कर छात्रों तक पहुंचाया जाए। एबीवीपी के राज्य सचिव सुश्री दीप्तिमयी प्रतिहारीने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के आधार पर तैयार किए गए नए पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा 1 से 8 तक की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव किया गया है, जिन्हें 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाना है। हालांकि, इन पुस्तकों में बड़ी संख्या में तथ्यात्मक, भाषाई और मुद्रण संबंधी त्रुटियां सामने आई हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक शिक्षा निदेशालय और राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की देखरेख में अनुभवी शिक्षकों और शिक्षाविदों द्वारा इन पुस्तकों का निर्माण किया गया था। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में गलतियों का पाया जाना संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एबीवीपी ने आरोप लगाया कि पुस्तकों के तैयार होने के बाद उनकी समुचित समीक्षा नहीं की गई और त्रुटियों को सुधारे बिना ही उनका बड़े पैमाने पर मुद्रण एवं वितरण कर दिया गया। संगठन का कहना है कि यह लापरवाही विद्यार्थियों की शिक्षा और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

संगठन ने राज्य सरकार और स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग से मांग की है कि पाठ्यपुस्तकों में मौजूद सभी त्रुटियों को तत्काल सुधारने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। साथ ही, त्रुटिरहित और संशोधित पाठ्यपुस्तकों को पुनः प्रकाशित कर वर्तमान शैक्षणिक सत्र से ही छात्रों के बीच वितरित किया जाए। एबीवीपी ने चेतावनी दी कि शिक्षा की गुणवत्ता और छात्रों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा दोषियों को दंडित कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस पत्रकार सम्मेलन में परिषद के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विश्वजीत पात्र, प्रदेश सह मंत्री राजकुमार व अन्य उपस्थित थे ।
स्कूली पाठ्यपुस्तकों की त्रुटियों की जांच के लिए गठित कमेटी के सदस्यों के नामों की घोषणा
इससे पहले ओडिशा सरकार ने कक्षा 1 से 8 तक की स्कूली पाठ्यपुस्तकों में पाई गई व्यापक मुद्रण और सामग्री संबंधी त्रुटियों की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के सदस्यों की घोषणा कर दी है। विकास आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव देवरंजन कुमार सिंह को तीन सदस्यीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। समिति के अन्य सदस्यों में ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति विभाग के सचिव विजय केतन उपाध्याय तथा सामान्य प्रशासन विभाग की उप सचिव स्मिता पाणि शामिल हैं। यह समिति मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के निर्देश पर गठित की गई है। हाल के दिनों में राज्यभर में वितरित पाठ्यपुस्तकों में अनेक त्रुटियों और मुद्रण संबंधी खामियों को लेकर व्यापक चिंता व्यक्त की जा रही थी।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, समिति को मामले की विस्तृत जांच कर यह पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है कि त्रुटियां किस स्तर पर हुईं और इसके लिए कौन-कौन से अधिकारी, एजेंसियां या संबंधित संस्थाएं जिम्मेदार हैं। समिति को अपनी जांच रिपोर्ट और अनुशंसाएं सात दिनों के भीतर सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने बुधवार को आयोजित एक समीक्षा बैठक में पाठ्यपुस्तकों में हुई गड़बड़ियों पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि इन त्रुटियों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और उन्हें अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने मामले में तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश देते हुए दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा है। राज्य सरकार ने विद्यार्थियों के हितों की रक्षा और भविष्य में त्रुटिरहित शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
















