खाड़ी में अमेरिका औऱ ईऱान के मध्य हुए शांति समझौते के 14 प्वाइंट एग्रीमेंट को ट्रंप ने जारी कर दिया है। वे इसे अमेरिका के लिए बड़ा फायदा बता रहा है, भले ही इसमें ईरान को काफी राजनीतिक और आर्थिक रियायतें दी गई हैं। मकसद था हॉर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोलना और दुनिया भर में मंदी टालना।
ट्रंप ने बुधवार को कहा कि अगर डील न होती तो स्ट्रेट कभी नहीं खुलता। उन्होंने बताया कि जब रॉकेट उड़ रहे हों और जगह-जगह माइन्स बिछे हों तो कोई महंगे जहाज़ों को वहाँ ले जाना नहीं चाहता।
समझौते की मुख्य बातें
यह MOU असल में 60 दिनों का सीजफायर एग्रीमेंट है। ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बुधवार को इस पर हस्ताक्षर किया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance शुक्रवार को जेनेवा में औपचारिक समारोह में साइन करेंगे।
ईरान को मिल रही रियायतें
- अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगे ब्लॉकेड को तुरंत हटाना
- ईरानी तेल को विदेश भेजने के लिए वेवर्स
- सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने की संभावना
- फ्रोजन ईरानी संपत्ति (अरबों डॉलर) वापस करना
- खाड़ी देशों द्वारा ईरान के लिए 300 बिलियन डॉलर का रीकंस्ट्रक्शन फंड बनाने की योजना (अमेरिका इसमें पैसे नहीं डालेगा)
ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका इस फंड में एक भी सेंट नहीं लगाएगा। गल्फ देश अगर ईरान का अच्छा व्यवहार देखेंगे तो ही पैसे देंगे।
लेबनान और क्षेत्रीय मुद्दे
समझौते में लेबनान को भी शामिल किया गया है। ईरान की ये पुरानी मांग थी। इसमें इजरायल को लेबनान में सैन्य कार्रवाई करने से रोका जाएगा। “लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता” की बात भी है, लेकिन इजरायल के कब्जे वाले बफर जोन से वापसी की पुष्टि नहीं हुई। ईरान के बदले में अपने सहयोगी गुटों (जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह) को काबू में रखने का वादा किया है। साथ ही उसने दोहराया कि वो न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा या हासिल नहीं करेगा।
न्यूक्लियर और मिसाइल कार्यक्रम
ईरान के पास मौजूद 440 किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को डाउन-ब्लेंड करने पर चर्चा होगी। ट्रंप ने कहा कि IAEA की निगरानी में ईरान के अंदर ही इसे पतला किया जा सकता है। ट्रंप ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर दबाव न डालने की बात कही। उन्होंने कहा, “उन्हें कुछ तो रखने दो, क्योंकि दूसरों के पास भी हैं।” G7 ने आगे की बातचीत का प्रस्ताव रखा है, लेकिन ईरान सिर्फ अमेरिका से ही बात कर रहा है और यूरोप को ज्यादा अहमियत नहीं दे रहा।
होर्मुज जलडमरूमध्य
60 दिनों तक जहाजों को टोल-फ्री पासेज मिलेगा। लेकिन ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ ने कहा कि इस अवधि के बाद वे शिपिंग पर फीस लेंगे। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा और ईरान को अपनी संप्रभुता के तहत सर्विस फीस लेने का अधिकार है। ट्रंप ने दावा किया कि तेल की कीमत $72 प्रति बैरल तक गिर गई है और जल्द ही युद्ध से पहले के स्तर से भी नीचे आ जाएगी।

















