अंदमान निकोबार : भारत को मिली नई ‘ऊर्जा’
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होम भारत अंडमान और निकोबार द्वीप

अंदमान निकोबार : भारत को मिली नई ‘ऊर्जा’

युद्ध के कारण इन दिनों पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट है। इसी बीच भारत के लिए एक बहुत ही शुभ सूचना है। हाल ही में ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंदमान सागर में प्राकृतिक गैस मिलने की घोषणा की है। इससे ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सकता है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 17, 2026, 09:32 pm IST
inअंडमान और निकोबार द्वीप

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि तब दर्ज हुई, जब ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) ने अंदमान सागर में प्राकृतिक गैस की खोज की घोषणा की। अंदमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित ‘श्रीविजय पुरम-3’ अन्वेषण कुएं में प्राकृतिक गैस की उपस्थिति की पुष्टि ने न केवल देश के ऊर्जा क्षेत्र में नई आशा जगाई है, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी सिद्ध हुई है।

भारत विश्व की सबसे तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। बढ़ती जनसंख्या, तीव्र औद्योगिकीकरण, शहरीकरण तथा आधारभूत संरचना के विस्तार के कारण ऊर्जा की मांग निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए बड़े पैमाने पर तेल एवं गैस के आयात पर निर्भर है। ऐसे में घरेलू स्तर पर ऊर्जा संसाधनों की खोज राष्ट्रीय महत्व का विषय बन जाती है।

हाल ही में ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा अंदमान सागर में की गई प्राकृतिक गैस की खोज इसी दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘श्रीविजय पुरम-3’ नामक अन्वेषण कुआं समुद्र की लगभग 355 मीटर गहराई वाले क्षेत्र में खोदा गया। यह कुआं 1900 मीटर से अधिक गहराई तक ईओसीन संरचना में पहुंचा, जहां प्रारंभिक उत्पादन परीक्षण के दौरान लगातार गैस फ्लेयरिंग (तेल और प्राकृतिक गैस के कुओं से निकलने वाली अतिरिक्त गैस को खुले में नियंत्रित तरीके से जलाने की प्रक्रिया) के माध्यम से प्राकृतिक गैस की उपस्थिति प्रमाणित हुई।

केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस उपलब्धि को ‘ऊर्जा अवसरों के महासागर’ की संज्ञा दी। उनका यह कथन इस खोज के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। वास्तव में अंदमान बेसिन में प्राप्त यह सफलता भारत के समुद्री ऊर्जा संसाधनों की विशाल संभावनाओं की ओर संकेत करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगे के सर्वेक्षण एवं परीक्षण सफल रहे, तो अंदमान क्षेत्र भारत के प्रमुख ऊर्जा उत्पादक क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।

यह खोज भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘समुद्र मंथन मिशन’ अथवा राष्ट्रीय गहरे समुद्री अन्वेषण मिशन का परिणाम है। इस मिशन का उद्देश्य देश के समुद्री क्षेत्रों में छिपे हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज और दोहन करना है। वर्षों तक अपेक्षाकृत उपेक्षित रहा अंदमान बेसिन अब देश के सबसे आशाजनक ऊर्जा क्षेत्रों में उभर रहा है। वर्तमान अभियान के दौरान खोदे गए तीन अन्वेषण कुओं में से दो में हाइड्रोकार्बन की उपस्थिति की पुष्टि होना इस क्षेत्र की संभावनाओं को और अधिक मजबूत बनाता है।

ऊर्जा सुरक्षा किसी भी राष्ट्र की आर्थिक और सामरिक शक्ति का आधार होती है। जिन देशों के पास पर्याप्त घरेलू ऊर्जा संसाधन उपलब्ध होते हैं, वे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाले उतार-चढ़ाव तथा भू-राजनीतिक संकटों का बेहतर सामना कर सकते हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष तथा पश्चिम एशिया में समय-समय पर उत्पन्न होने वाले तनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता आज प्रत्येक राष्ट्र की आवश्यकता बन गई है।

भारत लंबे समय से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का एक बड़ा भाग आयात के माध्यम से पूरा करता रहा है। इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है और वैश्विक मूल्य वृद्धि का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में अंदमान सागर में प्राकृतिक गैस की खोज भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह खोज भविष्य में आयात पर निर्भरता कम करने तथा ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में सहायक हो सकती है।

अंदमान एवं निकोबार द्वीप समूह की पहचान अब तक मुख्य रूप से उसकी प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता तथा सामरिक स्थिति के लिए रही है। किंतु प्राकृतिक गैस की इस खोज ने इन द्वीपों को भारत के ऊर्जा मानचित्र पर भी विशेष स्थान दिला दिया है। भविष्य में यदि यहां बड़े पैमाने पर ऊर्जा उत्पादन प्रारंभ होता है, तो इससे क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन तथा आधारभूत संरचना के विस्तार को भी नई गति मिलेगी। भारत ने पिछले एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त की हैं। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, जैव ईंधन तथा ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में भारत विश्व के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना से लेकर विश्व के सबसे बड़े सौर ऊर्जा पार्कों के निर्माण तक, भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। हालांकि नवीकरणीय ऊर्जा का महत्व लगातार बढ़ रहा है, फिर भी प्राकृतिक गैस आने वाले दशकों में भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। प्राकृतिक गैस को अपेक्षाकृत स्वच्छ जीवाश्म ईंधन माना जाता है, क्योंकि इससे कोयले और पेट्रोलियम उत्पादों की तुलना में कम कार्बन उत्सर्जन होता है। गैस आधारित ऊर्जा उत्पादन पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायक हो सकता है।

अंदमान में हुई यह खोज भारत की तकनीकी एवं वैज्ञानिक क्षमता का भी प्रमाण है। गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल एवं गैस की खोज अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके लिए उन्नत तकनीक, उच्च प्रशिक्षित मानव संसाधन, अत्याधुनिक उपकरण और विशाल निवेश की आवश्यकता होती है। ऐसे कठिन समुद्री वातावरण में सफल अन्वेषण भारत की वैज्ञानिक दक्षता और तकनीकी प्रगति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान खोज केवल शुरुआत है। अभी विस्तृत मूल्यांकन, भंडारों का आकलन, वाणिज्यिक व्यवहार्यता परीक्षण तथा उत्पादन संबंधी योजनाएं बनाई जानी शेष हैं।

इसके बावजूद प्रारंभिक परिणाम अत्यंत उत्साहवर्धक हैं और यह संकेत देते हैं कि अंदमान बेसिन में विशाल हाइड्रोकार्बन भंडार मौजूद हो सकते हैं। विश्व के अनेक देशों में समुद्री ऊर्जा खोजों ने उनकी अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान की है। यदि अंदमान क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर प्राकृतिक गैस एवं अन्य हाइड्रोकार्बन संसाधनों की पुष्टि होती है, तो यह भारत के ऊर्जा परिदृश्य को बदल सकता है। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि आर्थिक विकास, औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रतिपादित ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की सफलता में ऊर्जा आत्मनिर्भरता की महत्वपूर्ण भूमिका है। घरेलू ऊर्जा संसाधनों का विकास विदेशी निर्भरता को कम करने, व्यापार घाटे को नियंत्रित करने तथा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में सहायक होगा। अंदमान सागर में प्राकृतिक गैस की खोज इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

यह खोज केवल एक भूवैज्ञानिक सफलता नहीं है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय संकल्प का प्रतीक है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अपने समुद्री संसाधनों का उपयोग कर ऊर्जा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए तैयार है।
अंदमान सागर में प्राकृतिक गैस की खोज भारत के उज्ज्वल ऊर्जा भविष्य का संकेत है। यदि आगामी वर्षों में अन्वेषण और उत्पादन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक आगे बढ़ती है, तो यह खोज भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी। आने वाली पीढ़ियां संभवतः इस उपलब्धि को उस ऐतिहासिक क्षण के रूप में याद करेंगी, जब भारत ने अपने समुद्री संसाधनों की शक्ति को पहचानते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर एक निर्णायक कदम बढ़ाया।

Topics: पाञ्चजन्य विशेषसौर और पवन ऊर्जाऊर्जा सुरक्षाऊर्जा आत्मनिर्भरताअंदमान-निकोबार‘आत्मनिर्भर भारत’प्राकृतिक गैसअंदमान सागरजीवाश्म ईंधनऑयल इंडियाविदेशी मुद्राअन्वेषण कुआंस्वच्छ ऊर्जाहाइड्रोकार्बन संसाधनजैव ईंधनईओसीन संरचनारोजगार सृजनआयात पर निर्भरता
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