श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भगवान राम के नाम पर आने वाले एक-एक पैसे के प्रति जवाबदेह है और यदि जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जाएगी। इस बीच मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने पड़ताल शुरू कर दी है, जबकि विपक्षी दल इसे लेकर सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठा रहे हैं। उक्त बातें विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कही हैं। वे रविवार को छत्तीसगढ़ के प्रवास पर रायपुर पहुंचे थे ।
अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े कथित चोरी और वित्तीय अनियमितता के मामले ने देशभर में चल पड़ी चर्चाओं के बीच उन्होंने कहा, अयोध्या का राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था और भावनाओं का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर से जुड़े कथित चोरी या वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों ने स्वाभाविक रूप से श्रद्धालुओं के बीच चिंता बढ़ा दी है। यही वजह है कि इस मामले को सामान्य आपराधिक घटना के बजाय आस्था और विश्वास से जुड़ा संवेदनशील विषय माना जा रहा है।
रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार का कहना था कि मंदिर की सुरक्षा और वित्तीय व्यवस्था को लेकर पहले से सभी आवश्यक इंतजाम किए गए थे। इसके बावजूद यदि किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका सामने आई है, तो उसका पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ निवारण होना चाहिए।
एक-एक पैसे के प्रति जवाबदेह है ट्रस्ट
आलोक कुमार ने कहा कि “श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट” भगवान राम के नाम पर आने वाले प्रत्येक रुपये के प्रति अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करता है। ट्रस्ट का दायित्व सिर्फ मंदिर निर्माण और संचालन तक सीमित न होकर श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना भी है। यह उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
किसी भी प्रकार का संदेह श्रद्धालुओं के मन में नहीं रहना चाहिए। यही कारण है कि ट्रस्ट स्वयं इस पूरे मामले की खुली और निष्पक्ष जांच का समर्थन कर रहा है। यदि जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
ट्रस्ट के आग्रह पर गठित हुई एसआईटी
उन्होंने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए “श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट” ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आग्रह किया था। इसके बाद तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया, जिसने जांच शुरू कर दी है। आलोक कुमार ने कहा कि जांच दल में ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है जिन्हें इस प्रकार के मामलों की जांच का व्यापक अनुभव है। उन्होंने भरोसा जताया कि एसआईटी निष्पक्ष तरीके से तथ्यों को सामने लाएगी और ट्रस्ट जांच में हर स्तर पर सहयोग करेगा।
उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट अगले 15 दिनों के भीतर आने की संभावना है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसियों को अपना काम पूरा करने देना चाहिए।
दोषी चाहे कितना प्रभावशाली हो, नहीं मिलेगी राहत
इस दौरान विहिप अध्यक्ष ने दो टूक कहा कि जांच में यदि किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसकी सामाजिक या राजनीतिक हैसियत को देखते हुए कोई रियायत नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि चाहे कोई कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों न हो, यदि वह दोषी पाया जाता है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
आलोक कुमार ने कहा कि इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात सत्य का सामने आना है। सिर्फ आरोप लगाना या राजनीतिक बयान देना समाधान नहीं है। जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से कार्य करने देना चाहिए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।
अभी किसी ट्रस्टी पर आरोप नहीं
मामले को लेकर विभिन्न स्तरों पर कई तरह की चर्चाएं और आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी भी ट्रस्टी के खिलाफ कोई आरोप स्थापित नहीं हुआ है। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, जांच प्रारंभिक चरण में है और बिना तथ्यों के किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। यदि व्यवस्था में कहीं कोई खामी, कमी या लीकेज पाया जाता है तो उसे दूर किया जाएगा और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
उनका कहना था कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य केवल दोषी की पहचान करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी किसी भी संभावना को समाप्त करना भी है।
अखिलेश यादव पर विहिप का पलटवार
राम मंदिर से जुड़े इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के कुछ नेताओं ने मामले को लेकर सवाल उठाए हैं तथा सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आलोक कुमार ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अखिलेश यादव को लगता है कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होनी चाहिए, तो वे स्वयं अदालत में याचिका क्यों नहीं दायर करते।
उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़े इतने संवेदनशील विषय पर निम्न स्तर की राजनीति नहीं होनी चाहिए। सभी पक्षों को जांच पूरी होने तक संयम बरतना चाहिए और जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से अपना काम करने देना चाहिए। अब आगामी दिनों में आने वाली एसआईटी रिपोर्ट इस मामले की सच्चाई उजागर करेगी, वहीं यह भी तय करेगी कि श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करने के लिए आगे कौन से कदम उठाए जाने चाहिए ।

















