
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि अगले हफ्ते होने वाले G7 समिट में भारत सिर्फ अपनी बात ही नहीं रखेगा, बल्कि ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आकांक्षाओं और चिंताओं को भी मजबूती से रखेगा। यह बात उन्होंने फ्रांस जाने से पहले कही। समिट और द्विपक्षीय बैठकें दोनों ही महत्वपूर्ण हैं। पीएम मोदी फ्रांस में G7 समिट में हिस्सा लेंगे और वहां फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से भी मुलाकात करेंगे।
यात्रा का कार्यक्रम
फ्रांस में मैक्रों के साथ बैठक के बाद पीएम मोदी स्लोवाकिया जाएंगे।
यह स्वतंत्र स्लोवाकिया (1993) के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा होगी।
इसके बाद वे वापस फ्रांस लौटकर 16-17 जून को इवियान में G7 समिट में शामिल होंगे।
समिट के दौरान पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और अन्य G7 नेताओं से भी मुलाकात करेंगे।
पीएम मोदी ने कहा, “भारत की मौजूदगी G7 में हमारे पार्टनर्स के भरोसे और भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को दिखाती है। यह लगातार आठवीं बार है जब भारत को G7 समिट के लिए आमंत्रित किया गया है।” समिट के इतर फ्रांस एक विशेष बैठक का आयोजन कर रहा है जिसमें पश्चिम एशिया (मध्य पूर्व) की स्थिति पर चर्चा होगी। इस बैठक में कतर, यूएई और मिस्र के नेता भी शामिल होने वाले हैं।
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पीएम मोदी पश्चिम एशिया के संघर्ष के नतीजों पर भारत की चिंताओं को रखेंगे, खासकर ग्लोबल साउथ पर पड़ने वाले असर को। इनमें ऊर्जा संकट मुख्य मुद्दा है। साथ ही, होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से मालवहन की आजादी को भी महत्व दिया जाएगा।
समिट से पहले फ्रांस के राजदूत थिएरी माथू ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा था कि फ्रांस चाहता है कि भारत एक “डिफेंसिव” गठबंधन में शामिल हो, जो संघर्ष खत्म होने के बाद ईरान के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा सुनिश्चित करे। उनके अनुसार, भारत की भागीदारी एक मजबूत संदेश देगी।
पीएम मोदी ने मैक्रों से मिलने से पहले कहा, “इस साल की शुरुआत में राष्ट्रपति मैक्रों भारत आए थे और हमने अपने संबंधों को स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया था। हम फरवरी के बाद हुई प्रगति की समीक्षा करेंगे और आगे के सहयोग के रास्ते तय करेंगे।” यह यात्रा भारत की बढ़ती वैश्विक भागीदारी और रणनीतिक साझेदारियों को और मजबूत करने का मौका है। पीएम मोदी ग्लोबल साउथ की आवाज को विकसित देशों के मंच पर पहुंचाने पर जोर देंगे।