अंधे वैश्वीकरण की इस दौड़ में जहां दुनियाभर के देश केवल अपनी सोच रहे हैं। ऐसे वक्त में भी भारत ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को आगे रखकर काम किया है। इसका ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया है, जिसमें उन्होंने G7 समिट के दौरान ईरान युद्ध के कारण उपजी स्थिति को लेकर संतुलित विकास को लेकर बात कही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एक ऐसा वित्तीय तंत्र बनाना चाहिए, जिससे ग्लोबल साउथ के कमजोर देशों को संकटों का सामना नहीं करना पड़े।
प्रधानमंत्री मोदी आज (18 जून, 2026) को G7 समिट के दौरान एक आउटरीच सेशन को संबोधित कर रहे थे। इस सेशन का विषय था – शेयर्ड एंड बैलेंस्ड ग्रोथ, यानी साझा और संतुलित विकास। उसी दौरान उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट की वजह से ईंधन, खाद और खाने-पीने की सप्लाई चेन बाधित हुई हैं। इसका असर ग्लोबल साउथ के देशों पर लंबे समय तक पड़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कमजोर देश ऐसे संकटों का बोझ अकेले न उठाएं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “अगर हम वाकई अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत करना चाहते हैं, तो सबसे कमजोर देशों को इन संकटों का बोझ अकेले नहीं उठाना चाहिए।”
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वैश्विक कौशल सहयोग का प्रस्ताव
पीएम मोदी ने G7 देशों के साथ मिलकर वैश्विक कौशल सहयोग बनाने का सुझाव दिया। इसका मकसद विकासशील देशों में उपलब्ध युवा प्रतिभा, उद्यमिता और स्किल्स का पूरा फायदा उठाना है। उन्होंने बताया कि विकसित देशों में समाज बूढ़ा होता जा रहा है, जबकि भारत समेत ग्लोबल साउथ के पास युवा प्रतिभा की भरपूर क्षमता है। दोनों के बीच यह प्राकृतिक पूरकता है। इस पार्टनरशिप के तहत स्किल मैपिंग और भरोसेमंद स्किल्ड मूवमेंट को बढ़ावा दिया जा सकता है।
IMPACT पार्टनरशिप का आह्वान
पीएम मोदी ने इंटरनेशनल मोबिलाइजेशन पार्टनरशिप फॉर एक्सीलरेटिंग कनेक्टिविटी एंड ट्रेड (IMPACT) नाम से एक नई पहल का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य व्यापार, तकनीक और ऊर्जा कॉरिडोर बनाना है। इसमें G7 देशों की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ देशों की लोकल ओनरशिप को जोड़ा जाएगा। उन्होंने IMEC (India-Middle East-Europe Corridor) का उदाहरण दिया और कहा, “यह स्ट्रेटेजिक कॉरिडोर एशिया, मिडिल ईस्ट और यूरोप को जोड़ता है। यह व्यापार को तेज करेगा, सप्लाई चेन को मजबूत करेगा और निवेश, रोजगार व इनोवेशन के नए मौके पैदा करेगा।”
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने कहा कि अब ऐसे और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की जरूरत है, जो लोकल ओनरशिप, पारदर्शी फाइनेंसिंग और लंबे समय तक टिकने वाली सस्टेनेबिलिटी पर आधारित हों। G7 को अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और पैसिफिक आइलैंड देशों के साथ कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स पर काम करना चाहिए।
भारत की व्यवहारिक प्रतिबद्धता
पीएम मोदी ने बताया कि भारत सिर्फ बातें नहीं करता, बल्कि काम भी करता है। उन्होंने कहा कि G7 समिट में शामिल ज्यादातर देशों के साथ भारत ने ट्रेड एग्रीमेंट्स पूरे कर लिए हैं। “यह दर्शाता है कि भारत टुकड़ों में बंटने में नहीं, एकजुटता में विश्वास रखता है। भारत संरक्षणवाद में नहीं, साझेदारी में, अनिश्चितता में नहीं, साझा विकास में यकीन रखता है।” उन्होंने कहा कि भारत सभी के साथ मिलकर साझा आर्थिक मजबूती बढ़ाने, स्थिर, भरोसेमंद और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था बनाने के लिए काम करता रहेगा।

















