चीन की विक्ट्री डे परेड का संदेश: हथियारों का प्रदर्शन और ताइवान-अमेरिका को चेतावनी
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चीन की विक्ट्री डे परेड का संदेश: हथियारों का प्रदर्शन और ताइवान-अमेरिका को चेतावनी

बीजिंग में चीन की विशाल विजय दिवस परेड! परमाणु मिसाइल, ड्रोन और हाइपरसोनिक हथियारों का प्रदर्शन, ताइवान-अमेरिका के लिए कड़ा संदेश।

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)
Sep 6, 2025, 05:00 pm IST
inविश्व, विश्लेषण

चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध में जापान पर चीन की जीत की 80 वीं वर्षगांठ को चिह्नित करने के लिए 3 सितंबर को बीजिंग में एक विशाल विक्ट्री डे (विजय दिवस) परेड का आयोजन किया। 31 अगस्त और 1 सितंबर को चीन द्वारा आयोजित एससीओ शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद विजय दिवस परेड चीन की शक्ति को प्रदर्शित करने के लिए एक और प्रमुख कार्यक्रम था। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के लिए, परेड ने चीन में शक्ति संरचना पर उनकी पकड़ मजबूत करने का एक और मौका दिया।

परेड में शामिल विदेशी नेता

विजय परेड के लिए मेहमानों की सूची ने भी ध्यान आकर्षित किया। परेड में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के किम जोंग उन ने भाग लिया और जिनपिंग, पुतिन और किम जोंग की तिकड़ी ने मीडिया का अधिकतम ध्यान आकर्षित किया। परेड में ईरान, म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, इंडोनेशिया और पाकिस्तान के नेताओं समेत कुल 26 विदेशी नेता शामिल हुए। एससीओ शिखर सम्मेलन में उपेक्षित होने के बाद, मीडिया का ध्यान खींचने के लिए पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ द्वारा एक और असफल प्रयास की खबर से सोशल मीडिया हैंडल भरे हुए हैं।

नवीनतम हथियार और सैन्य शक्ति का प्रदर्शन

परेड के दौरान प्रदर्शन पर चीन के नवीनतम हथियार और युद्ध प्रणाली थे। परेड में चीन की परमाणु मिसाइल DF -61 का प्रदर्शन किया गया जिसे मोबाइल प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। साथ ही चीन की सबसे लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल JL-3 जिसे पनडुब्बियों से लॉन्च किया जा सकता है, को भी प्रदर्शित किया गया। चीन का उद्देश्य अपने ‘परमाणु त्रय’ का प्रदर्शन करना और भूमि, वायु और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता का प्रदर्शन करना था। DF-17 और YJ-21 जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों का भी प्रदर्शन किया गया। एक अन्य आकर्षण नई पीढ़ी के ड्रोन और एंटी-ड्रोन हथियार और सिस्टम थे। एयरोस्पेस, साइबर स्पेस और सूचना युद्ध में उनकी तेजी से प्रगति को उजागर करने के लिए अन्य सैन्य समर्थन प्रणालियों को भी दिखाया गया।

ताइवान के लिए संदेश

पहला संदेश स्पष्ट रूप से ताइवान के लिए था। चीन पिछले पांच साल से ताइवान पर कब्जा करने की तैयारी कर रहा है। लेकिन चीन का मकसद ताइवान को बिना युद्ध लड़े उसको अधीन करना है। सबसे खराब स्थिति में, चीन लंबी दूरी के वैक्टर, ड्रोन और साइबर क्षमता द्वारा ताइवान को हराने का इरादा रखता है। आने वाले समय में, ताइवान गैर-गतिज साधनों के माध्यम से चीन से बढ़ती शत्रुता देख सकता है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग चाहेंगे कि ताइवान जल्द से जल्द चीन का हिस्सा बने, ठीक उसी तरह जैसे 1997 में हांगकांग चीन का विशेष प्रशासनिक क्षेत्र बना था।

अमेरिका और यूरोप के लिए संदेश

परेड का केंद्रीय संदेश स्पष्ट रूप से अमेरिका और यूरोपीय देशों के लिए था। यह विजय परेड विश्व मामलों में अमेरिकी आधिपत्य को चुनौती देने के लिए अन्य महाशक्ति के रूप में चीन के आगमन का संकेत देने के लिए थी। चीन, रूस और उत्तर कोरिया का ट्रोइका जिसके पीछे साम्यवाद और परमाणु शक्ति की समानता है, अमेरिका और पश्चिम देशों के लिए एक स्पष्ट खतरा है। इसलिए राष्ट्रपति ट्रम्प ने यह कहने में समय नहीं गंवाया की चीन, रूस और उत्तर कोरिया मिलकर अमरिका को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। जापान, दक्षिण चीन सागर के आसपास के देशों और अन्य एशियाई और अफ्रीकी देशों के लिए भी इस परेड से संदेश मिल गया होगा।

रूस-यूक्रेन युद्ध और प्रभाव

रूस-यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी के साथ, राष्ट्रपति पुतिन युद्ध को और भी लंबा खींचने की क्षमता रखते हैं। रूस पहले से ही चीन और ईरान से सैन्य हार्डवेयर प्राप्त कर रहा है। विजय परेड में इन नेताओं की मौजूदगी अमेरिका और यूरोपीय देशों को नागवार गुजरी होगी। यूक्रेन में अपने सैनिकों को तैनात करने की यूरोपीय देशों की क्षमता संदिग्ध है। सैन्य उद्देश्य के साथ रूसी सैनिकों द्वारा कब्जा किए गए और अधिक क्षेत्र यूक्रेन को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर यूक्रेन युद्धविराम और युद्ध की समाप्ति में देरी करता है तो उसे ज्यादा क्षति होगी। रूस निश्चित रूप से ताकत की स्थिति से बातचीत करना चाहेगा।

चीन के नए हथियारों का परीक्षण

चीन की कोशिश अपने नए हथियारों का परीक्षण करना भी है। चीन यूक्रेन के चल रहे युद्ध, ईरान के संघर्ष क्षेत्रों में और हमास, हौथी और हिजबुल्लाह जैसे अन्य आतंकवादी संगठनों के माध्यम से अपने नवीनतम हथियारों और अन्य सैन्य हार्डवेयर का परीक्षण करता है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान ने चीनी सैन्य हार्डवेयर का इस्तेमाल किया और वह युद्ध लड़ने में भारतीय श्रेष्ठता के खिलाफ उन्हें भुनाने में विफल रहा। युद्ध जैसी स्थितियों में इस तरह के सक्रिय उपयोग के माध्यम से, चीनी अपनी सैन्य क्षमताओं को परिष्कृत और बेहतर बनाते हैं। हमें अगली बार पाकिस्तान के खिलाफ अधिक सतर्क रहना होगा।

चीन की आंतरिक राजनीति और सत्ता संरचना

विजय दिवस परेड को चीन में घरेलू आबादी पर भी संबोधित माना जा सकता है। इस परेड के माध्यम से, सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (Chinese Communist Party, CCP) चीन में सत्ता के एकमात्र अधिकार के रूप में अपनी पकड़ को और मजबूत करती है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग वर्ष 2012 से सत्ता में हैं और तीसरे कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। चीन में सत्ता के लिए आंतरिक संघर्ष नया नहीं है और राष्ट्रपति जिनपिंग को इस तरह के विशाल विजय दिवस परेड के माध्यम से उनके निरंकुश शासन को बढ़ावा मिलता है।

भारत के लिए सबक और रणनीति

जहां तक भारत का संबंध है, हमारे योजनाकारों और नेताओं ने चीन द्वारा शक्ति का दावा करने के एक और प्रयास पर ध्यान दिया होगा। भारत को इस बात पर भी सावधानीपूर्वक नजर रखनी होगी कि चीन से नवीनतम सैन्य हार्डवेयर से पाकिस्तान को कैसे लाभ होता है। भारत के चारों ओर विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ पर चीनी प्रयास हमारी कूटनीति और सेना के लिए एक और चिंता का विषय है। भारत को सैन्य हार्डवेयर के हर पहलू में चीन से मुकाबला करने की कोशिश करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि भारत की संप्रभुता पर किसी भी खतरे को मिटाने के लिए क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। साथ ही, भारत को दुनिया में शांति, समान शक्ति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करना जारी रखना चाहिए।

Topics: ‘ग्लोबल साउथ’चीन की आंतरिक राजनीतिSCO शिखर सम्मेलनचीन विजय दिवस परेडचीन के हथियारपरमाणु मिसाइल DF-61JL-3 मिसाइलताइवान संकटअमेरिका चीन तनावरूस-चीन गठबंधनउत्तर कोरियाभारत चीन रणनीतिशी जिनपिंगइंडो-पैसिफिक सुरक्षा
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