भारत लगातार अपनी ताकतों में इजाफा करता जा रहा है। वह लगातार अपने एयर डिफेंस सिस्टम में इजाफा करता जा रहा है। इसी क्रम में भारत ने 10 और 11 जून 2026 को तीन लगातार उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। इन परीक्षणों से देश की मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम की क्षमता साबित हुई है, जो लंबी और मध्यम दूरी की मिसाइलों को बीच में ही रोक सकती है।
रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि इन परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की लिस्ट में शामिल हो गया है, जिनके पास ICBM (इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल) तक को रोकने की BMD क्षमता है। फिलहाल अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल जैसे कुछ ही देशों के पास ऐसी क्षमता बताई जाती है।
DRDO ने IRBM इंटरसेप्टर मिसाइलें टेस्ट कीं
DRDO ने चंदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से दो एडवांस्ड इंटरसेप्टर मिसाइलों का सफल परीक्षण किया। ये मिसाइलें इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM) डिफेंस के लिए बनाई गई हैं। ये सिस्टम दुश्मन के विमानों और 2,000 से 5,000 किलोमीटर रेंज वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को डिटेक्ट, ट्रैक और नष्ट करने में सक्षम हैं। ये परीक्षण भारत के अपने ‘आयरन डोम’ जैसे सिस्टम को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
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नौसेना के लिए नई एंटी-शिप मिसाइल का पहला टेस्ट
इनके अलावा नेवल एंटी शिप मिसाइल मीडियम रेंज (NASM-MR) का पहला उड़ान परीक्षण भी सफल रहा। इस मिसाइल ने समुद्री लक्ष्यों पर पिनपॉइंट नेविगेशन, कम ऊंचाई पर समुद्र के ऊपर उड़ान और अंतिम चरण में बेहद सटीक हमला करके अपनी क्षमता दिखाई।
रक्षा मंत्री और अधिकारियों की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर DRDO को बधाई देते हुए लिखा, “मल्टी-लेयर्ड BMD क्षमता सफलतापूर्वक प्रदर्शित की गई। इन परीक्षणों ने भारत को ICBM तक रोकने वाली बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता वाले देशों की एलीट ग्रुप में शामिल कर दिया है।”
रक्षा सचिव और DRDO चेयरमैन राजेश कुमार सिंह ने इन परीक्षणों की निगरानी की और डिफेंस साइंटिस्ट्स तथा इंडस्ट्री के संयुक्त प्रयासों की सराहना की।
BMD सिस्टम क्या है?
BMD सिस्टम रडार, कमांड सेंटर्स और इंटरसेप्टर मिसाइलों का एक उन्नत नेटवर्क होता है। यह आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों को डिटेक्ट, ट्रैक और नष्ट कर देता है। एंडो-एटमॉस्फेरिक मिसाइलें पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर (100 किमी से नीचे) काम करती हैं।
एक्सो-एटमॉस्फेरिक मिसाइलें वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में काम करती हैं।

















