पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर (PoJK) में हालात पूरी तरह से बेकाबू हो चुके हैं और यह पूरा क्षेत्र इस समय सुलग रहा है। मुजफ्फराबाद समझौते को लागू न करने और बुनियादी हकों की मांग को लेकर शुरू हुआ नागरिक आंदोलन अब एक बड़े जन-विद्रोह और आजादी की जंग में तब्दील हो चुका है। रावलकोट, मुज़फ्फराबाद, कोटली, भिंबर, दादयाल, पलांद्री और सुधनोती जैसे प्रमुख शहरों में हजारों की संख्या में आम लोग, महिलाएं और युवा सड़कों पर उतर आए हैं।
शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने निहत्थे नागरिकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई जिसमें करीब 120 लोग मारे जाने की खबर है। पाकिस्तानी सरकार की इस नापाक हरकत के चलते PoJK की सड़कों पर पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ ‘गो बैक’ और आजादी के नारे लोग लगा रहे हैं। इसके कई विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
पाकिस्तानी सेना ने निहत्थे लोगों पर की गोलीबारी
ऐसे ही एक विडियो में पाक सेना एक निहत्थे शख्स पर गोलियां चलाती दिख रही है। वीडियो में शख्स बचने की कोशिश कर रहा है, उसके हाथ में कोई हथियार नहीं है फिर भी उस पर गोलियां बरसाई जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के जवानों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए केवल आंसू गैस या लाठीचार्ज का सहारा नहीं लिया बल्कि उन पर सीधे फायरिंग कर दी। यहीं नहीं पाकिस्तानी रेंजर्स ने जनाजे तक को निशाना बनाया। पाक सेना की इस बर्बर कार्रवाई ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन को एक हिंसक संघर्ष और गृहयुद्ध जैसी स्थिति में झोंक दिया है। आपको बता दें कि, PoJK में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैन होने का विरोध करते हुए जब रावलकोट, कोटली, भिंबर, दादयाल, पलांद्री और सुधनोती में हजारों लोग अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, तब उन्हें रोकने के लिए पाकिस्तानी सेना और अर्धसैनिक बल ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। वहां पर अब गृहयुद्ध कैसे हालात पनप गए हैं।
PoJK में उठी आजादी की मांग
पाकिस्तानी सेना के इस दमनकारी कदम ने आग में घी डालने का काम किया। अब तक जो आंदोलन मुख्य रूप से बिजली, आटे पर सब्सिडी और प्रशासनिक सुधारों तक सीमित था, वह अब पूरी तरह से एक राजनीतिक विद्रोह बन चुका है। रावलकोट और मुजफ्फराबाद की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं और बुजुर्गों ने सीधे तौर पर पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना के जनरलों को चुनौती दी है। प्रदर्शनस्थलों पर ‘पाकिस्तानी फौज वापस जाओ’, ‘हमे चाहिए आजादी’ जैसे नारे लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान ने पिछले 7 दशकों से अधिक समय से उनके प्राकृतिक संसाधनों (जैसे नीलम नदी की पनबिजली) को लूटा है और बदले में उन्हें केवल भुखमरी, महंगाई और गोलियां दी हैं।
12 सीटों पर भी हो रहा बवाल
दरअसल, PoJK में 12 सीटों पर भी बवाल हो रहा है। इन 12 सीटों पर पाकिस्तानी सरकार अपने और आईएसआई के लोगों को भीतरखाने भेजती है। बताया जा रहा है की इन सीटों पर पाकिस्तान हिज्बुल मुजाहिदीन और उनके रिश्तेदारों को ही जानबूझकर चुनकर भेजती है। इनकी मदद से वह अपनी पसंद का प्रधानमंत्री चुन लेती है और वहां की राजनीति को प्रभावित करती है।
PoJK में ठप्प हुआ जीवन
यह आंदोलन किसी एक शहर या कस्बे तक सीमित नहीं है बल्कि इसने पूरे PoJK को अपनी चपेट में ले लिया है। मुजफ्फराबाद और रावलकोट दोनों शहर इस आंदोलन के मुख्य केंद्र बने हुए हैं, जहां नागरिक समाज और व्यापारियों ने पूरी तरह से शटडाउन (हड़ताल) कर रखा है। कोटली और भिंबर इन इलाकों में युवाओं ने प्रशासनिक इमारतों का घेराव किया है और पाकिस्तानी झंडे हटाकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वहीं दादयाल, पलांद्री और सुधनोती जैसे पहाड़ी इलाकों में भी लोग धरने पर बैठे हैं। पूरे क्षेत्र में पहिया जाम है, बाजार पूरी तरह बंद हैं और सरकारी दफ्तरों में ताले लटके हुए हैं। स्थिति को दबाने के लिए प्रशासन ने इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया है ताकि कत्लेआम के वीडियो दुनिया के सामने न आ सकें। लेकिन इसके बावजूद आंदोलन को पाक सरकार रोकने में नाकामयाब साबित हुई। पाकिस्तानी सरकार की इस बर्बरता की भारत ने भी आलोचना की है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से खा की वह पाकिस्तान को उसके अत्याचारों के लिए दोषी ठहराए।

















