कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की नई सरकार बनने के साथ ही मंत्रिमंडल में असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मंत्री पद की शपथ लेने के महज दो दिन बाद ही वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से इस्तीफा देकर राज्य और पार्टी की राजनीति में सियासी हलचल तेज कर दी है।
रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा बना राजनीतिक चर्चा का विषय
शपथ ग्रहण के महज दो दिन बाद ही कांग्रेस सरकार को पहला बड़ा झटका देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
रामलिंगा रेड्डी का आरोप है कि उन्होंने न तो वर्तमान मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और न ही उनके पूर्ववर्ती मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मंत्री पद देने की मांग की थी। रामलिंगा रेड्डी के अनुसार, शपथ ग्रहण वाले दिन डी.के. शिवकुमार ने उनसे कहा था कि बेंगलुरु विकास विभाग का मंत्रालय उन्हें दिया जाएगा, लेकिन उन्हें जल संसाधन विभाग दिया गया है। उन्हें बताया गया था कि दोनों विभाग उन्हें आवंटित होंगे।
सरकार बनने के 48 घंटे के भीतर सामने आया असंतोष
रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा सिर्फ एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं, बल्कि नई सरकार के भीतर उभर रहे असंतोष का संकेत माना जा रहा है।
सरकार बनने के 48 घंटे के भीतर सामने आया यह घटनाक्रम कांग्रेस नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन गया है। रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस नेतृत्व डैमेज कंट्रोल में जुट गया है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि रामलिंगा रेड्डी हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता होने के साथ ही बेहद करीबी मित्र भी हैं। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि मैं उनसे व्यक्तिगत रूप से बात करूंगा और उनकी सभी चिंताओं का समाधान निकालने का प्रयास करूंगा।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर बोला हमला
कांग्रेस के अंदर बढ़ते असंतोष को लेकर भाजपा ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र का आरोप है कि सरकार बनने से पहले ही कांग्रेस में सत्ता संघर्ष शुरू हो गया है। भाजपा का दावा है कि यह सरकार स्थिरता देने में विफल साबित होगी।
के.एच. मुनियप्पा ने भी जताई नाराजगी
रामलिंगा रेड्डी के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.एच. मुनियप्पा ने भी अपने विभाग को लेकर असंतोष जाहिर करते हुए पार्टी नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करने की बात कही है।
लेकिन उनकी प्रतिक्रिया ने यह संकेत जरूर दिया कि विभागों के बंटवारे को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं में नाराजगी है।
डी.के. शिवकुमार सरकार के सामने शुरुआती राजनीतिक संकट
रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा और मुनियप्पा की नाराजगी ने डी.के. शिवकुमार सरकार के सामने शुरुआती दिनों में ही बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।
यह स्थिति पार्टी के लिए मुश्किल है, क्योंकि नेतृत्व, संगठन और सरकार के बीच संतुलन बनाकर इन चुनौतियों से कैसे निपटना है, यह एक बड़ी चुनौती है।
राजनीतिक जानकारों ने सिद्धारमैया से जोड़ा मामला
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के पीछे पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का हाथ है और इसे डी.के. शिवकुमार के साथ उनके मनमुटाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
रामलिंगा रेड्डी पार्टी के वरिष्ठ और अनुशासित नेता हैं। इससे पूर्व रामलिंगा रेड्डी वीरप्पा मोइली, धरम सिंह, एस.एम. कृष्णा और सिद्धारमैया सरकारों में अपनी भूमिका निभा चुके हैं, मगर उन्होंने कभी भी पार्टी के खिलाफ बगावत नहीं की है।












