देश में परीक्षाओं के पेपर लीक की घटनाओं की जांच और उसके लिए एक ही व्यवस्था बनाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। ये लीक अब छात्रों और उनके परिवारों के लिए बहुत बड़ी परेशानी बन चुके हैं।
याचिका किसने दायर की?
वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दायर की है। इसमें केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों से कहा गया है कि पेपर लीक की जांच के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था बनाई जाए। याचिका में ये भी मांग है कि लीक में शामिल लोगों की चल-अचल संपत्तियां जब्त कर ली जाएं, ताकि ऐसे अपराध रुक सकें।
याचिकाकर्ता कहते हैं कि बार-बार पेपर लीक होने से बच्चों और उनके माता-पिता का दिल टूट जाता है। सालों की मेहनत एक पल में बर्बाद हो जाती है। परीक्षा में निष्पक्षता खत्म होने से युवाओं का पूरा भविष्य प्रभावित हो जाता है।
कौन सी बेंच सुनवाई करेगी?
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।
याचिका में मुख्य मांगें
- पेपर लीक मामलों की जांच तय समय के अंदर पूरी करने के लिए दिशा-निर्देश।
- दोषियों पर जल्दी मुकदमा चलाने की व्यवस्था।
- लीक करने वालों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान।
- केंद्र और राज्यों के लिए एक समान कानूनी ढांचा।
नीट पेपर लीक का जिक्र
याचिका में हाल ही में हुए नीट मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक का उदाहरण दिया गया है। इसमें कहा गया है कि इस घटना ने पूरी व्यवस्था की कमजोरियों को खुलकर सामने ला दिया। मेडिकल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में भी अगर पेपर लीक हो सकता है, तो आम छात्रों का भरोसा कैसे बनेगा? याचिका में इसे संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।














