पटियाला हाउस कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और उसके 20 सदस्यों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। एडिशनल सेशंस जज प्रशांत शर्मा ने इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और यूएपीए के तहत आरोप तय किया है। कोर्ट ने सभी आरोपितों को 10 जुलाई को पेश होने का आदेश दिया।
PFI समेत 21 आरोपियों पर आतंकी साजिश और फंडिंग के आरोप तय
कोर्ट ने सभी आरोपितों के आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन एकत्र करने, आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ जंग छेड़ने, आतंकी गतिविधियों के लिए साजिश रचने इत्यादि तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 153ए, यूएपीए की धारा 17, 18,19 20, 22बी, 38 और 39 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट ने पीएफआई के अलावा ओएम अब्दुल सलाम, ईएम अब्दुल रहमान, अनीस अहमद, अफसर पाशा, वीपीएन एलामाराम, ई अबुबकर, प्रोफेसर पी कोया, एम मोहम्मद अली जिन्ना, अब्दुल वाहिद सैत, एएस इस्माइल, मो. युनूस, मोहम्मद बशीर, शफीर केपी, जसीर केपी, शाहिद नासीर, वसीम अहमद, मो. शाकिफ, मो. फारुख रहमान और यासिर हसन के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है।
2022 में PFI और सहयोगी संगठनों पर लगा था 5 साल का प्रतिबंध
केंद्र सरकार ने 28 सितंबर, 2022 को पीएफआई और उसके सहयोगी संगठनों को पांच सालों के लिए प्रतिबंधित कर दिया था। केंद्र सरकार ने यूएपीए की धारा 3(1) के अधिकारों के तहत ये प्रतिबंध लगाया था। केंद्र सरकार ने पीएफआई के सहयोगी संगठनों, रिहैब इंडिया फाउंडेशन (आरआईएफ), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई), ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल (एआईसीसी), नेशनल कंफेडरेशन ऑफ ह्यूमन राईट्स आर्गनाइजेशन (एनसीएचआरओ) नेशनल वुमंस फ्रंट, जूनियर फ्रंट, एम्पावर इंडिया फाउंडेशन और रिहैब फाउंडेशन, केरल को भी प्रतिबंधित किया है। एनआईए ने कई राज्यों में छापा मारकर पीएफआई के काफी सदस्यों को गिरफ्तार किया था।

















