देश में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े एक बड़े मामले में दिल्ली की विशेष NIA अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों समेत 21 आरोपियों के खिलाफ गंभीर आरोप तय कर दिए हैं। इनमें संगठन के चेयरमैन ओ. एम. ए. सलाम और वाइस चेयरमैन ई.एम. अबूबकर भी शामिल हैं। अदालत के इस फैसले के बाद मामला ट्रायल के अगले चरण में पहुंच गया है। कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान जुटाए गए दस्तावेजों और सबूतों से यह संदेह पैदा होता है कि आरोपी संगठन के माध्यम से देश विरोधी गतिविधियों में शामिल थे।
जांच में सामने आया ‘विजन 2047’ दस्तावेज
अदालत के अनुसार, यह केवल कुछ लोगों की व्यक्तिगत गतिविधियां नहीं थीं, बल्कि एक संगठित योजना का हिस्सा हो सकती हैं। मामले में ‘विजन 2047’ नाम का एक दस्तावेज भी चर्चा में है। अदालत के मुताबिक, जांच में दावा किया गया है कि यह दस्तावेज PFI से जुड़ा था। आरोप है कि इसमें वर्ष 2047 तक शरिया कानून आधारित व्यवस्था स्थापित करने की योजना का उल्लेख किया गया था। साथ ही कुछ अन्य गंभीर आरोप भी जांच के दौरान सामने आए हैं। विशेष NIA अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी, UAPA के तहत आतंकी गतिविधियों को समर्थन देने, फंड जुटाने, प्रशिक्षण शिविर चलाने और नए सदस्यों की भर्ती जैसे आरोप तय किए हैं।
हालांकि अभी अदालत ने किसी को दोषी नहीं माना है। आरोप तय होने का मतलब है कि मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और सबूतों की विस्तार से जांच होगी। इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी। उस दिन सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा और मुकदमे की आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। गौरतलब है कि सितंबर 2022 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश के कई राज्यों में छापेमारी कर PFI से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने 2022 में संगठन पर UAPA के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। PFI की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और इसका मुख्यालय केरल में था। संगठन पर अवैध फंडिंग, हिंसक गतिविधियों की साजिश और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने जैसे कई गंभीर आरोप लगे थे। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और अंतिम फैसला ट्रायल पूरा होने के बाद ही आएगा।













