उदयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा चित्तौड़ प्रान्त के महाविद्यालयीन विद्यार्थियों के लिए आयोजित 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का विद्या निकेतन विद्यालय, फतहनगर में सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस गरिमामयी समापन समारोह की अध्यक्षता पूज्या आई मां कंकू केसर ने की।
संघ शिक्षा वर्ग केवल प्रशिक्षण नहीं, राष्ट्र निर्माण की कार्यशाला है
समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजस्थान के क्षेत्र प्रचारक श्री निम्बाराम जी ने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ शिक्षा वर्ग केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र के लिए पूर्णतः समर्पित व्यक्तित्व के निर्माण की एक जीवंत कार्यशाला है। समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए चरित्रवान, अनुशासित और संगठित व्यक्तियों की आवश्यकता है, और संघ इसी दिशा में सतत कार्य कर रहा है।
प्रतिकूल परिस्थितियों में संघ का संकल्प-
श्री निम्बाराम जी ने संघ के प्रसिद्ध गीत “आँधी क्या है तूफान मिलें, चाहे जितने व्यवधान मिलें” का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वयंसेवकों का जीवन परिस्थितियों से संघर्ष करते हुए भी अपने ध्येय के प्रति अडिग रहने का प्रतीक है।
आज समापन समारोह में हो रही तेज वर्षा के बीच स्वयंसेवकों एवं समाजजनों की अडिग उपस्थिति इस गीत की भावना को पूर्णतः साकार करती हुई दिखाई दी।
राष्ट्रकार्य में आने वाली कठिनाइयाँ स्वयंसेवकों के उत्साह को कम नहीं कर सकतीं, बल्कि उन्हें और अधिक दृढ़ बनाती हैं।
हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष: मेवाड़ में होगा ऐतिहासिक आयोजन
मेवाड़ की गौरवशाली परंपरा का स्मरण करते हुए क्षेत्र प्रचारक ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और अदम्य साहस का एक प्रेरक आदर्श है। इस वर्ष हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं, जो सम्पूर्ण राष्ट्र और विशेष रूप से मेवाड़ के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।
उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक अवसर पर मेवाड़ में एक विशाल एवं भव्य कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। उन्होंने सभी स्वयंसेवकों, अभिभावकों एवं समाजजनों से इस ऐतिहासिक आयोजन में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता करने का आह्वान किया, ताकि नई पीढ़ी अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़ सके।
“युवा ही देश की सबसे बड़ी पूंजी” – पूज्या आई मां कंकू केसर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं पूज्या आई मां कंकू केसर ने अपने आशीर्वचन में कहा कि राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करने वाले युवाओं का निर्माण ही किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने स्वयंसेवकों को सदैव सेवा, संस्कार और समर्पण के मार्ग पर अग्रसर रहने का आशीर्वाद प्रदान किया और समाज के प्रति दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का आह्वान किया।
तेज बारिश भी नहीं डिगा सकी उत्साह, गूंजा ‘पाथेय कण’ और ‘संविधान’ का संदेश
अनुशासन का अद्भुत नजारा: समापन समारोह के दौरान हुई मूसलाधार वर्षा भी स्वयंसेवकों एवं वहां उपस्थित समाजजनों के उत्साह को डिगा नहीं सकी। तेज बारिश के बावजूद सभी स्वयंसेवक पूरे अनुशासन एवं एकाग्रता के साथ मैदान में डटे रहे।
पर्यावरण और स्वावलंबन: शिक्षार्थियों ने स्वावलंबन की भावना के साथ निवास, भोजन और स्वच्छता व्यवस्थाओं का संचालन स्वयं किया। पूरे 15 दिवसीय वर्ग में सिंगल यूज प्लास्टिक का पूर्णतः निषेध रहा और दिनचर्या ‘जल संरक्षण’ पर आधारित रही।
संविधान प्रदर्शनी: कार्यक्रम स्थल पर भारत के संविधान के चित्रों एवं संबंधित अध्यायों के साथ एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई थी। साथ ही शिक्षार्थियों को स्वाध्याय के लिए पिछले 30 वर्षों के ‘पाथेय कण’ विशेषांक भी उपलब्ध करवाए गए।
संघ शिक्षा वर्ग के प्रमुख आंकड़े (एक नज़र में):
- अवधि: 17 मई दोपहर से 2 जून (प्रातः दीक्षांत समारोह तक)।
- सहभागी: चित्तौड़ प्रांत के 15 प्रशासनिक एवं संघ दृष्टि से 27 जिलों के 83 स्थानों से कुल 98 शिक्षार्थी।
- कार्यकर्ता विवरण: इनमें 44 कार्यकर्ता शाखा स्तर तथा 54 स्वयंसेवक प्रवासी कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं।
- प्रबंधन टीम: इन शिक्षार्थियों के सघन प्रशिक्षण हेतु 25 शिक्षक और व्यवस्थाओं के लिए 29 प्रबंधक दिन-रात प्रयासरत रहे।

















