नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं किया जा सकता है और परिवार की परिभाषा से उन्हें हटाना साफ तौर पर मनमाना और संवैधानिक रूप से गलत है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को निरस्त करते हुए ये टिप्पणी की।
दरअसल इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा था कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए परिवार की परिभाषा में शादीशुदा बेटी शामिल नहीं है। इस आधार पर उच्च न्यायालय ने अनुकंपा के आधार पर उसे उचित मूल्य की दुकान का डीलर नियुक्त करने की उसकी मांग खारिज कर दिया था। महिला ने यूपी सरकार के 2019 के एक आदेश को चुनौती दी थी जिसमें शादीशुदा बेटियों को परिवार की परिभाषा से बाहर रखा गया था। इस फैसले के एक महिला ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जिस नियम को चुनौती दी गई है, वह इस सोच पर आधारित है कि शादी के बाद बेटी अपने माता-पिता के परिवार की सदस्य नहीं रहती या उन पर निर्भर नहीं रहती। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ऐसी सोच संवैधानिक रुप से गलत है।
















