मालाबार देवस्वम बोर्ड को झटका: 'तिरुमांधामकुन्नू मंदिर' की कमान पारंपरिक ट्रस्टियों को सौंपें, केरल HC का बड़ा फैसला
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मालाबार देवस्वम बोर्ड को झटका: ‘तिरुमांधामकुन्नू मंदिर’ की कमान पारंपरिक ट्रस्टियों को सौंपें, केरल HC का बड़ा फैसला

केरल उच्च न्यायालय ने मालाबार देवस्वम बोर्ड को बड़ा झटका देते हुए अंगड़ीपुरम तिरुमांधामकुन्नू मंदिर का प्रशासन उसके पारंपरिक ट्रस्टियों को वापस सौंपने का निर्देश दिया है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jun 2, 2026, 06:15 pm IST
in भारत, केरल, धर्म-संस्कृति
kerala high court orders return of thirumandhamkunnu temple to trustees



मलप्पुरम (केरल) । केरल उच्च न्यायालय (Kerala High Court) ने मालाबार देवस्वम बोर्ड (Malabar Devaswom Board) को एक कड़ा निर्देश देते हुए अंगड़ीपुरम स्थित प्रसिद्ध तिरुमांधामकुन्नू मंदिर (Thirumandhamkunnu Temple) का प्रशासन उसके पारंपरिक ट्रस्टियों को वापस सौंपने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बोर्ड ने बिना किसी उचित कारण के मंदिर को अपने नियंत्रण में ले लिया था। गौरतलब है कि यह मंदिर पिछले कई वर्षों से सीपीएम (CPM) प्रबंधित मालाबार देवस्वम बोर्ड के नियंत्रण में था।

कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति अवैध: हाईकोर्ट

अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि मालाबार देवस्वम बोर्ड द्वारा मंदिर में ‘कार्यकारी अधिकारी’ (Executive Officer) की नियुक्ति और उसके बाद की गई सभी प्रशासनिक कार्रवाइयां पूरी तरह से अवैध थीं।

अदालत के प्रमुख निर्देश:

  • फैसले की तारीख (26 मई) से एक महीने के भीतर एक नया वंशानुगत ट्रस्टी (Hereditary Trustee) नियुक्त किया जाना चाहिए।
  • नई नियुक्ति के बाद, वर्तमान कार्यकारी अधिकारी को मंदिर का पूरा प्रशासन नए ट्रस्टी को सौंपना होगा।
  • एक नई प्रबंधन समिति (Managing Committee) गठित करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है।

यह ऐतिहासिक आदेश जस्टिस वी. राजा विजयराघवन और जस्टिस के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने जारी किया है।

विवादों का केंद्र रहा है तिरुमांधामकुन्नू मंदिर

यह मंदिर हाल के वर्षों में कई बड़े विवादों के कारण सुर्खियों में रहा था। देवस्वम बोर्ड के नियंत्रण के दौरान कई ऐसे फैसले लिए गए, जिन पर हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं ने कड़ी आपत्ति जताई थी।

प्रमुख विवाद-

मंदिर की संरचनाओं को मस्जिदों की तरह हरे रंग (Green shade) में रंग दिया गया था। इसके अलावा, तिरुमांधामकुन्नू ‘पूरम उत्सव समिति’ में मुसलमानों को शामिल करने को लेकर भी भारी विरोध हुआ था। सबसे गंभीर मामला तब सामने आया जब गैर-हिंदुओं ने मंदिर के गर्भगृह (Sanctum Sanctorum) में प्रवेश कर हमला किया था।

पारंपरिक अधिकारों का हुआ हनन

कोर्ट ने टिप्पणी की कि कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति ने वल्लुवनाड स्वरूपम (Valluvanad Swaroopam)—जो मंदिर के वंशानुगत ट्रस्टी हैं—के पारंपरिक अधिकारों की अनदेखी की है।

  • कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने का प्राथमिक अधिकार ट्रस्टी के पास ही होता है।
  • देवस्वम अधिकारी केवल उन असाधारण परिस्थितियों में ही हस्तक्षेप कर सकते हैं, जब ट्रस्टी अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रहता है।

अदालत ने यह भी माना कि 2013 में ‘अस्थायी व्यवस्था’ के रूप में नियुक्त किए गए कार्यकारी अधिकारी को 13 वर्षों तक काम करने की अनुमति देना सीधे तौर पर वंशानुगत ट्रस्टी के प्रशासनिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।

फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि नई प्रबंधन समिति को मंदिर के देवता और भक्तों के हितों की रक्षा करते हुए पारंपरिक ट्रस्टी परिवारों के प्रमुख सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

अवैध नियुक्तियों वाली याचिकाएं खारिज

इस मुख्य मामले के साथ-साथ, अदालत ने मंदिर में कर्मचारी नियुक्तियों, सेवाओं के नियमितीकरण (Regularization) और बर्खास्तगी से संबंधित कई अन्य याचिकाओं पर भी विचार किया। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए 29 व्यक्तियों द्वारा दायर उन याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनकी नियुक्तियां अवैध और नियम विरुद्ध पाई गई थीं।

Topics: मालाबार देवस्वम बोर्डThirumandhamkunnu TempleMalabar Devaswom Boardkerala high courtकेरल हाईकोर्टतिरुमांधामकुन्नू मंदिर
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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