कोटा: साहित्य परिषद् के महाधिवेशन में बोले ओम बिरला- 'आत्मबोध से विश्वबोध' का मापदंड है साहित्य
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कोटा: साहित्य परिषद् के महाधिवेशन में बोले ओम बिरला- ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ का मापदंड है साहित्य

कोटा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राजस्थान का नौवां प्रदेश महाधिवेशन शुरू। 'आत्मबोध से विश्वबोध' और लोक साहित्य जैसे अहम विषयों पर हो रहा गहन मंथन।

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 30, 2026, 08:28 pm IST
inभारत, राजस्थान
Sahitya Parishad Rajasthan Adhiveshan Om Birla Kota



कोटा। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राजस्थान का नौवां प्रदेश महाधिवेशन शनिवार को प्रातः दस बजे कोटा में भव्य रूप से प्रारंभ हुआ। इस महाधिवेशन का आयोजन तलवंडी स्थित राजकीय आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा एकीकृत महाविद्यालय में किया जा रहा है। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत मां भारती और मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा परिषद् गान के साथ हुई।

उद्घाटन सत्र: “भारत की आत्मा साहित्यकारों में बसती है”

उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में ओम कृष्ण बिरला उपस्थित रहे। उन्होंने रचनाकारों के पावन दायित्व का उल्लेख करते हुए साहित्य की महत्ता पर प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि ओम कृष्ण बिरला ने कहा: “भारत की आत्मा भारत के साहित्यकारों में बसती है। अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की स्थापना का मूल उद्देश्य भारतबोध और राष्ट्रभक्ति से युक्त भारतीयता रहा है, जो अब ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ जैसे उदात्त वैश्विक मानवीयता के मापदंड पर पूरी तरह खरा उतर रहा है।”

सत्र के विशिष्ट अतिथि डॉ. पवनपुत्र बादल ने भारतीय साहित्य के मानवीय मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत भूमि महान साहित्यकारों और विचारकों की भूमि रही है। उन्होंने महाकवि कालिदास और गोस्वामी तुलसीदास के काव्य में निहित विराट मानवीय मूल्यों का भी विशेष उल्लेख किया।

इस सत्र का कुशल संचालन परिषद् के प्रदेश महामंत्री डॉ. केशव शर्मा ने किया। 

तृतीय एवं चतुर्थ सत्र: लोक साहित्य और वार्षिक कलेंडर पर चर्चा

दोपहर के भोजनावकाश के पश्चात महाधिवेशन के विभिन्न सत्रों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर मंथन किया गया।

तृतीय सत्र के मुख्य बिंदु:

  • चर्चा के विषय: लोक मंथन, बाल साहित्य, युवा कार्य और लोक साहित्य।
  • विशिष्ट वक्ता: राष्ट्रीय मंत्री भरत ठाकौर, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंदु शेखर तत्पुरुष और प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अन्नाराम शर्मा।
  • संचालन: जयपुर प्रान्त अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश भार्गव।

चतुर्थ सत्र व पुस्तक लोकार्पण:

  • इस सत्र में ‘आदर्श इकाई’ एवं ‘वार्षिक कैलेंडर’ पर विस्तार से चर्चा की गई।
  • सत्र के मुख्य वक्ता भरत ठाकौर, डॉ. अन्नाराम शर्मा और पवनपुत्र बादल रहे।
  • इसी सत्र में साहित्य परिषद् से जुड़े विभिन्न साहित्यकारों की नई पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया।

पंचम सत्र एवं देशभक्ति से ओतप्रोत काव्य संध्या

महाधिवेशन का पंचम सत्र ‘संभागशः बैठक, दायित्व घोषणा और दायित्व बोध’ पर केंद्रित रहा। इस दौरान संगठन को मजबूत करने के लिए विविध दायित्वों की घोषणाएं की गईं और आगामी रूपरेखा तय की गई।

दिवस के अंत में, संध्याकाल के समय एक भव्य काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें प्रदेश भर से आए हुए कवियों ने ‘संघ’ विषय पर केंद्रित अपनी कविताओं का पाठ किया। कविताओं के माध्यम से पूरा वातावरण राष्ट्रीयता और देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया। इस शानदार काव्य संध्या का संचालन प्रख्यात कवि योगीराज योगी ने किया।

Topics: Hindi Literatureकोटा न्यूजप्रदेश महाधिवेशनAkhil Bharatiya Sahitya Parishad Rajasthanअखिल भारतीय साहित्य परिषदKota News
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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