काम और जिम्मेदारियों के बीच सामान्य चलती जिंदगी में एक दिन यकायक सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूलने लगती है तो महसूस होता है कि सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है जैसा कि बाहर से दिख रहा है। धड़कनें अनियंत्रित हो रही हैं, सांस लेना दूभर है और लग रहा है हर सीढ़ी पर कुछ देर रुका जाए। दरअसल, यह आपके दिल के बीमार होने की पहली सीढ़ी का शुरुआती लक्षण है। दरअसल उच्च रक्तचाप धीरे से आपके जीवन में जगह बना लेता है, जिसका पता हमें बाद में चलता है, इसलिए उच्च रक्तचाप को साइलेंट किलर भी कहा गया है। उच्च रक्तचाप की बढ़ती समस्या को सरकार ने भी गंभीरता से लिया है, गैर संचारी रोगों में उच्च रक्तचार प्रमुख है।
हाल ही में विश्व हाइपरटेंशन दिवस पर नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे द्वारा जारी अध्ययन ने चिंता बढ़ा दी। इसके अनुसार चालीस साल से अधिक उम्र के युवा तेजी से इसके शिकार हो रहे हैं, अहम यह है कि क्योंकि यह समस्या शांति से हमारे जीवन में अपनी पैठ जमा लेती है, इसलिए इसका पता हृदयघात की वजह से होने वाली मौतों के रूप में ही सामने आता है। भारत में सबसे ज्यादा 32.1 प्रतिशत मौतें हृदय रोगों की वजह से हो रही हैं। उत्तर भारत में तो यह आंकड़ा 35 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। देश का हर पांचवा व्यक्ति आज उच्च रक्तचाप का शिकार है, पहले इसे जहां बढ़ती उम्र की समस्या माना जाता है, अब 30 साल की उम्र में भी उच्च रक्तचाप के मरीज देखे जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी उच्च रक्तचाप का दखल तेजी से बढ़ा है।
गांवों की खुशहाल जिंदगी पर तनाव का साया
विशेषज्ञ मानते हैं कि निश्चित रूप से शहरों की तरह ही गांवों में तनाव ने अपनी पहुंच बना ली है। गांवों की खुशहाल जिंदगी पर तनाव का साया गहराया है, जिसका असर उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आया है। इस संदर्भ में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं जिसके अनुसार देश में 15 साल से कम उम्र के 24 प्रतिशत पुरूष तथा 21 प्रतिशत महिलाएं उच्च रक्तचाप की शिकार हैं, जिसे प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रित करना बेहद जरूरी है। यह भी सामने आया है कि अधिकांश लोगों को अपने बढ़े हुए रक्तचाप की जानकारी ही नहीं होती है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल की कई बीमारियों को दावत देता है, और यह ऐसी बीमारियां हैं जो अचानक हृदयाघात के रूप में जीवन के लिए खतरा पैदा कर देती हैं। शुरुआती लक्षणों को पहचान कर हृदयाघात जैसी समस्याओं को भी काफी हद तक टाला जा सकता है।

उच्च रक्तचाप दिल की गंभीर बीमारियों का प्रारंभिक चरण है, जिसे संयमित जीवन शैली, व्यायाम, सही खानपान और व्ससनों जैसे धूम्रपान का त्याग कर नियंत्रित किया जा सकता है। भारत सरकार ने एनसीडी (गैर संचारी रोग नियंत्रण) कार्यक्रम के तहत 30 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के स्क्रीनिंग का लक्ष्य रखा है, वहीं 75/25 पहल के तहत 2025 तक 7.5 करोड़ लोगों को उच्च रक्तचाप और मधुमेह की मानकीकृत चिकित्सा उपलब्ध कराने की योजना पर काम चल रहा है।
उच्च रक्तचाप को सही समय पर पहचानें
एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ अंबुज रॉय ने बताया कि भारतीयों में सामान्य रक्चाप का एक पैरामीटर तय किया गया है, जिसमें 120/80 को सामान्य रक्तचाप माना जाता है, जिसें ऊपरी पैरामीटर को सिस्टोलिक कहा जाता है, जिसकी या उच्चम सामान्य स्थिति 120 एमजीडीएल है वहीं नीचले स्तर को डायस्टोलिक कहा जाता है, जिसकी सामान्य स्थिति 80 एमजीडीएल है। इन दोनों ही अपर लिमिट में यदि बदलाव हों मसलन 120 एमजीडीएल 140 और 80 से 90 पहुंच जाएं तो यह स्थिति उच्च रक्तचाप की कहलाएगी, इसमें मरीज को तुरंत चिकित्सक से मिलना चाहिए, बीपी की सामान्य जांच घर पर भी की जा सकती है। 30 साल की उम्र के बाद यदि सांस फूलना, थकावट या चक्कर या फिर कमजोर महसूस हो तो हर महीने बीपी चेक करना अपनी आदत में शामिल कर लें। डॉ अंबुज रॉय ने बताया वर्ष 2017 में त्रिपुरा सरकार ने एम्स भारतीय जन स्वास्थ्य प्रतिष्ठाान और भारत में मधुमेह नियंत्रण परिषद (सीसीडीसी, काउंसिल फॉर कंट्रोल ऑफ डायबिटिज इन इंडिया) के सहयोग से एनसीडी यानि नॉन कम्युनिकेबल डिसिस अभियान त्रिपुरा में शुरू किया था।
31.5 प्रतिशत लोग उच्च रक्तचाप के शिकार
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में उच्च रक्तचाप यानि हाइपरटेंशन तेजी से साइलेंट किलर बन रहा है। हर साल 16 लाख लोग उच्च रक्तचाप और इससे जुड़ी बीमारी की वजह से जान गंवा रहे हैं, यानि रोज लगभग 4400 मौतें उच्च रक्तचाप की वजह से हो रही हैं, यह आंकड़ा एचआईवी, डेंगू, मलेरिया जैसी संक्रामक बीमारियों से कहीं ज्यादा है। देश में 30 करोड़ लोग इस समय उच्च रक्तचाप के साथ जी रहे हैं जिसका सही समय पर इलाज बेहद जरूरी है। अधिकांश लोग इसके शुरूआती लक्षण नहीं पहचान पाते।
प्रदूषण और उच्च रक्तचाप का भी है गहरा संबंध
आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर एम्स ने पहली बार प्रदूषण और उच्च रक्तचाप के असर को जानने के लिए अध्ययन किया। अध्ययन में यह देखा गया कि प्रदूषण की स्थिति पीएम 2.5 हर दस माइक्रोग्राम की वृद्धि से हाई बीपी का खतरा पांच गुना बढ़ जाता है। डॉ अंबुज रॉय इस पर कहते हैं कि यदि लोगों का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर यदि केवल दो एमजीडीएल तक भी नियंत्रित हो जाएं तो हृदयघात के खतरे को 10 प्रतिशत तक टाला जा सकता है।
कुछ कारगर उपाय से होगा बचाव
- खाने में नमक का सेवन कम करें, मानक के अनुसार रोजाना एक व्यस्क को पांच ग्राम से कम नमक का सेवन करना चाहिए, इसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के नमक शामिल हैं, कई संरक्षित खाद्य उत्पाद जैसे चिप्स आदि में अधिक नमक होता है
- व्यायाम को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अवश्य शामिल करें, जिससे वजन कम होगा और दिल को अधिक काम नहीं करना पड़ेगा
- मेडिटेशन और योगा को भी नियमित दिनचर्या में शामिल करें, तनावमुक्त रहें और व्यसन जैसे एल्कोहल, सिगरेट आदि का प्रयोग न करें

















