जब भी भारतीय मूल का कोई भी व्यक्ति विदेशों में किसी बड़े पद पर जाता है या राजनीति में जाता है, और लोकतान्त्रिक प्रक्रियाओं के चलते किसी पद पर पहुंचता है तो हर भारतीय को गर्व होता है और यह कहा जाता है कि भारत में अवसर नहीं है, इसलिए बाहर अवसर व्यक्ति ले रहा है। मगर क्या हो, जब कोई व्यक्ति झूठ का सहारा लेकर आगे बढ़े और भारत में अपने ही परिवार के विषय में नकारात्मक बोलकर दूसरी ही पहचान धारण करके किसी पद पर जाए और उसका झूठ खुले तो भारतीयों की कैसी छवि बनेगी? ऐसा ही एक मामला स्कॉटलैंड के भारतीय मूल के सांसद क्यू मणिवन्नम का आ रहा है। जिनके झूठ का किस्सा इन दिनों सोशल मीडिया और मीडिया का हिस्सा बना हुआ है और भारतीयों के चरित्र पर लोग उंगली उठा रहे हैं।
कौन हैं क्यू मणिवन्नम?
अब प्रश्न उठता है कि क्यू मणिवन्नम कौन हैं और क्यों इतना विवाद है? दरअसल, क्यू मणिवन्नम तमिलनाडु से हैं और वे अपने आपको क्वीर कहते हैं। और उन्होंने हाल ही में स्कॉटलैंड में ग्रीन पार्टी से सांसद पद पर जीत हासिल की है। हालांकि, वे अभी स्टूडेंट वीजा पर ही हैं, और अस्थाई ग्रैजूइट वीजा के लिए पैसे इकट्ठे करने का अभियान चल रहा है। और उसके बाद ग्लोबल टेलेंट वीजा के आवेदन का विचार है, जो यूके प्रतिभाशाली व्यक्तियों को प्रदान करता है।
हालांकि, विवाद तो इसी पर है कि वे अभी स्टूडेंट वीजा पर हैं और फिर भी सांसद नियुक्त हो गए हैं। यूके में स्थानीय नेता इस बात पर आपत्ति जता रहे हैं। मगर जो सबसे अधिक आपत्तिजनक और विवादास्पद है वह है उनके द्वारा बोला गया झूठ। दरअसल, किसी भी देश की राजनीति इन दिनों वोक विषयों की राजनीति हो गई है। झूठे शोषण की कहानियों के आधार पर लोग अपना प्रचार अभियान करते हैं। भारत में भी झूठे शोषण की कहानियों के चलते कई तथ्य दब जाते हैं। मगर क्या यह स्कॉटलैंड में भी होता है, यह विचारणीय प्रश्न है।
टेलीग्राफ के अनुसार मणिवन्नम ने कहा था कि वे एक ट्रांसजेन्डर तमिल इमिग्रेंट हैं और वे घृणा का सामना करके आज सांसद के रूप में खड़े हैं।
मणिवन्नम ने यह कहा था कि वह तमिलनाडु से एक नीची जाति से आते हैं और उन्होंने स्कॉटलैंड में भी वही प्रतिरोध देखा था। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें इस देश के सामाजिक और ईकोलॉजिकल न्याय के इतिहास से जुड़ाव महसूस होता है। यह तक उन्होंने कहा था कि वे वंचित लोगों के लिए हमेशा काम करते रहेंगे फिर चाहे वे शरणार्थी हों या फिर अप्रवासी या फिर पीड़ा का सामना कर रहे फिलिस्तीनी नागरिक।
बदले नियमों के कारण मणिवन्नम बने सांसद
हाल ही में स्कॉटलैंड में ये नियम बदल गए थे कि कौन व्यक्ति सांसद हो सकता है। अब कानूनों में ढील देते हुए कम अवधि के वीजा में भी लोग सांसद पद के लिए लड़ सकते हैं और चुने भी जा सकते हैं।
विवाद और झूठ
मणिवन्नम के विचारों को लेकर तो वहाँ के स्थानीय नागरिकों और ब्रिटिश राष्ट्रवादियों के दिल में फांस है ही, मगर जो सबसे बड़ा कारण है वह है उनका बोला गया झूठ। लोग पूछ रहे हैं कि क्यू मणिवन्नम स्कॉटलैंड की राजनीति में कर क्या रहे हैं? क्योंकि वह अभी तक स्टूडेंट ही हैं।
मगर उन्होंने अपनी पृष्ठभूमि के विषय में कहा कि वे तमिलनाडु से निम्न जाति से हैं और उनका बचपन काफी संघर्षपूर्ण रहा। मगर Sunday times की पड़ताल में यह गलत निकला। इसमें पता चला कि वे दरअसल, एक उच्च मध्यवर्गीय परिवार से हैं।
Before being elected MSP for Edinburgh and Lothians East, Q Manivannan – who is a biological male and whose original first name is Srivatsan, but who now uses the pronouns they/them – told party members that they were ‘a queer Tamil immigrant’ from a ‘lower caste’ background.… pic.twitter.com/a3Acg6crsC
— The Spectator (@spectator) May 26, 2026
इसमें Sunday times के हवाले से लिखा है कि “जहां एक तरफ सांसद यह दावा करते हैं कि वे वह ‘तवायफ़ों, नर्तकियों, संगीतकारों, शिकारियों और वेश्याओं’ जैसे अंडरवर्ल्ड के विविध और अनोखे लोगों के परिवारों से हैं तो वहीं दूसरी ओर, इस ग्रीन पार्टी के नेता के पिता के पास कथित तौर पर केमिकल इंजीनियरिंग और बिज़नेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्रियाँ हैं, और उनकी माँ भी अकादमिक क्षेत्र में कार्यरत हैं।
युवा मणिवन्नम ने एक प्राइवेट स्कूल और एक प्राइवेट लिबरल आर्ट्स और लॉ यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की; और 2019 में, वह दिल्ली स्थित एक कंसल्टेंसी में काम करने चले गए, जो बेहद अमीर लोगों को अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में दाखिला दिलाने में मदद करती है।“
इस पर विवाद है कि मणिवन्नम ने झूठ क्यों बोला? और इसके साथ मणिवन्नम श्वेत विरोधी भी बताए जाते हैं। लोगों का कहना है कि झूठ बोलकर वोट मांगना कहाँ की नैतिकता है और वह भी श्वेत विरोधी विचारों के साथ? लोग कह रहे हैं कि मणिवन्नम स्कॉटलैंड के पहले नस्लवादी, कम्युनिस्ट, शादी विरोधी, पुलिस विरोधी, स्टूडेंट वीजा और ट्रांस सांसद हैं। यह भी कहा जा रहा है कि क्यू मणिवन्नम ने इस मांग का समर्थन किया है कि स्कॉटिश टैक्स देने वाले लोग “फ़िलिस्तीन के लिए मुआवज़े” का खर्च उठाएं। यह घोषणापत्र ही विवादित है जिसमें लैंड की “फ़िलिस्तीन के उपनिवेशीकरण और उस पर कब्ज़े” में कथित भूमिका की जांच करने की भी मांग की गई है।
परंतु फिलिस्तीन के प्रति इस मांग से अधिक लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि मणिवन्नम ने अपनी पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर झूठ क्यों बोला?











