गत जनवरी माह में किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) की ओर से अवैध मजारों और अतिक्रमण को हटाने के लिए नोटिस जारी की गई थी। नोटिस में कहा गया था कि मजारों के मुतवल्ली नोटिस चस्पा किए जाने से 15 दिन के अंदर स्वयं मजारों को हटा लें। नोटिस अवधि बीत जाने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने न्यायालय की शरण लिया। न्यायालय के आदेश पर मुस्लिम पक्ष को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया था। केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि मुस्लिम पक्ष के लोग मालिकाना हक साबित करने का कोई भी कागजात प्रस्तुत नहीं कर पाये हैं। अब मजारों को हटाने की कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन को पत्र भेजा जायेगा।
केजीएमयू परिसर में मजारों को हटाने के लिए गठित की थी कमेटी
उल्लेखनीय है कि करीब दो वर्ष पहले केजीएमयू परिसर में अवैध कब्जा और मजारों को हटाने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया था। इसका नोडल अधिकारी, वहां के डीन डॉ. के के सिंह को नियुक्त किया गया था। कमेटी ने अवैध कब्जे और मजारों का सर्वे कराया। उसी दौरान पाया गया कि नेत्र रोग विभाग के बगल की जमीन को कब्जा कर के मजार बना दी गई थी। जब उस भूमि को खाली करवाने का प्रयास किया गया तो काफी विवाद हुआ। विवाद को देखते हुए मजार हटवाने की कार्रवाई को रोक दिया गया था। अभी हाल ही में जब कन्वर्जन का मामला तूल पकड़ा तो फिर से मजारों को हटाने की कार्रवाई में तेजी आई है।
केजीएमयू प्रशासन ने मजार को किया चिन्हित
केजीएमयू प्रशासन ने ट्रॉमा सेंटर, रेस्पीरेटरी मेडिसिन, क्वींस मैरी और नेत्र रोग विभाग के पीछे स्थित मजार को चिन्हित किया हैं। इसके अलावा कुछ अन्य स्थानों पर भी मजार बना दी गई है। केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. के के सिंह के अनुसार, करीब डेढ़ साल से कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के निर्देश पर अवैध कब्जों को हटाया जा रहा है। इस परिसर में अवैध मजारे भी चिन्हित की गई हैं। इन मजारों को जल्द ही हटाया जायेगा। जहां पर मजार बना दी गई है। उसके चारों तरफ अतिक्रमण कर लिया गया है। इस अतिक्रमण को भी हटाया जाएगा। अवैध अतिक्रमण के कारण पार्किंग की भी समस्या हो रही है। वाहनों का आवागमन बाधित हो रहा है। भविष्य में केजीएमयू का विस्तार किया जाना है इसलिए अतिक्रमण हटना बहुत जरूरी है।

















