लखनऊ के मलिहाबाद स्थित कसमंडी कलां इलाके में राजा कंसा के किले को लेकर शुरू हुआ विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। मंगलवार को कुछ हिंदूवादी नेता वहां पर पूजा की थाली लेकर गए। मगर वहां पर तैनात पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उसके बाद इन लोगों ने जमीन पर बैठ कर आरती उतारी।
अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने कहा कि ” जब विरोध शुरू हुआ तब मौलाना जमील अहमद उर्फ जॉनी भाग गये। उन्हें सामने लाया जाए।” फिलहाल जिला प्रशासन ने वहां पर पूजा और नमाज दोनों पर रोक लगा दी है।
हिंदू पक्ष का कहना है कि सूरवीर, पराक्रमी महाराजा कंसा पासी का ये किला है। इसमें एक मौलाना ने कब्र बनाकर नमाज पढ़ना शुरू कर दिया था। हमारी मांग है कि उस मौलाना और उसके सहयोगियों को ढूंढ़कर सबके सामने लाया जाए और इस परिसर को मुक्त कराकर किले के अंदर स्थित शिव मंदिर को हिंदुओं को सौंपा जाए।
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
उल्लेखनीय है कि लखनऊ के मलिहाबाद तहसील क्षेत्र के कसमंडी कला गांव में एक किला जैसा पुराना ढांचा स्थित है। वहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि लगभग 4 साल पहले जमील अहमद उर्फ जॉनी नाम का मौलाना वहां पहुँचा था। मौलाना ने किले के बगल में मस्जिद बना दी थी। उसके बाद वहां पर मदरसा चलने लगा। किले के पूरे परिसर का इस्तेमाल मौलाना करने लगा।
वहां के लोगों को जब मौलाना की गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो लोगों ने उसका विरोध शुरू किया। विरोध को देखते हुए गत 21 मई को मौलाना फरार हो गया। मान्यता है कि राजा कंसा के नाम पर ही उस गांव का नाम कसमंडी पड़ा था।

















