सुप्रीम कोर्ट ने इस महीने की शुरुआत में कहा कि UAPA के मामलों के ट्रायल समय पर पूरा करने के लिए अलग-अलग NIA कोर्ट बनाए जाएं। CJI सूर्या कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने आदेश दिया कि अगर किसी हाई कोर्ट के इलाके में 15 से ज्यादा ट्रायल लंबित हैं तो दो कोर्ट बनाएं और 25 से ज्यादा हैं तो तीन कोर्ट बनाएं। कोर्ट ने ये भी कहा कि NIA कोर्ट के जजों पर कोई अतिरिक्त काम न डाला जाए। कोर्ट चाहती है कि औसतन हर NIA केस एक महीने में निपट जाए, इसके लिए रोज सुनवाई होनी चाहिए।
दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट की स्थिति
दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा इस समय 43 NIA केस सुन रहे हैं, जो UAPA के तहत चल रहे हैं। इनमें आतंकवाद, क्रॉस-बॉर्डर साजिश और कट्टरपंथ जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। इसके अलावा 38 और केस भी हैं जो NIA ने दर्ज नहीं किए थे। कुल 81 केस इस एक कोर्ट में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एक जज के लिए 10 केस की सिफारिश की थी, यानी ये कोर्ट उससे आठ गुना ज्यादा केस संभाल रही है। जस्टिस शर्मा 20 नवंबर 2025 को इस कोर्ट में आए। सितंबर 2022 से अब तक वे पांचवें जज हैं। पहले चार जज औसतन 11-11 महीने ही वहां रहे।
कितनी सुनवाइयां हो रही हैं
43 NIA केसों में अब तक कुल 132 सुनवाइयां हो चुकी हैं। हर केस में औसतन 19 सुनवाइयां हुई हैं। इन 43 में से 7 केसों में जस्टिस शर्मा दोबारा से सुनवाई कर रहे हैं। इनमें से एक केस 2017 का है। इन 7 केसों में 87 आरोपी हैं और 32 के खिलाफ चार्ज तय करने की बहस अभी बाकी है। कई बार पहले जज के ट्रांसफर हो जाने से आर्गुमेंट्स दोबारा या तीसरी बार शुरू हो रहे हैं।
इसे भी पढ़ें: ऊर्जा सुरक्षा ही नहीं विश्व में भारत की स्थिति मजबूत करती हैं प्रधानमंत्री की यात्राएं
कुछ महत्वपूर्ण केस
जस्टिस शर्मा जिन 10 केसों में नई सुनवाई कर रहे हैं (जिनमें 7 NIA के), उनमें शामिल हैं:
- 2017 का लश्कर-ए-तैयबा चीफ हाफिज सईद से जुड़ा आतंक फंडिंग का केस
- 2020 का वेस्ट बंगाल-केरल में अल-कायदा मॉड्यूल का केस
- 2021 का ISIS से जुड़े डिजिटल मैगजीन छापने और फैलाने का केस
- 2021 का गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और 19 अन्य के खिलाफ कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और एक्सटॉर्शन का केस
- सुकेश चंद्रशेखर से जुड़े दो 2021 के 200 करोड़ रुपये एक्सटॉर्शन वाले केस
- 2022 का PFI चेयरमैन ओमा सलाम का ट्रांसनेशनल साजिश और कट्टरपंथी कैंप का केस
- 2022 का कनाना के अर्शदीप डल्ला और खालिस्तान टाइगर फोर्स से जुड़ा केस
- 2024 का ह्यूमन ट्रैफिकिंग और साइबर स्लेवरी वाला केस
ट्रायल में देरी की वजह
एक डिफेंस वकील ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जजों के बार-बार ट्रांसफर होने से सुनवाई रुक जाती है। खासकर बड़े केसों में, जहां कई आरोपी होते हैं, ये समस्या ज्यादा होती है। UAPA में जमानत मिलना बहुत मुश्किल है, इसलिए देरी का मतलब अंडरट्रायल कैदियों के लिए लंबी जेल हो जाता है।
NIA की तरफ से पब्लिक प्रॉसीक्यूटर राहुल त्यागी भी यही कहते हैं कि नए कोर्ट बनें तो आधे सुने गए केस मौजूदा जज के पास ही रहें, ताकि दोबारा से शुरू न हों। NIA एक्ट की धारा 11 जज को रिटायरमेंट के बाद भी केस पूरा करने की अनुमति देती है, ताकि ट्रायल में निरंतरता बनी रहे।

















