भारत का तख्तापलट करने आए कौन हैं अमेरिकी मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनियन ?
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भारत का तख्तापलट करने आए कौन हैं अमेरिकी मैथ्यू वैनडाइक और 6 यूक्रेनियन ?

बड़ी हैरानी की बात है कि जब भारत किसी देश की सत्तापलट में नहीं है, तो मैथ्यूज वैनडाइक और 6 यूक्रेनी भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को गिराने में क्यों लगे हुए थे!

Written byफिरोज बख्त अहमदफिरोज बख्त अहमद
Mar 24, 2026, 07:40 pm IST
inविश्लेषण
आखिर भारत में क्या कर रहा था मैथ्यू वैनडाइक

आखिर भारत में क्या कर रहा था मैथ्यू वैनडाइक

आजकल भारत की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई गूढ़ प्रश्न उठ रहे हैं कि मिजोरम में क्या करने गए थे एक अमेरिकन मैथ्यूज वैनडाइक और 6 यूक्रेनी? एनआईए ने उन्हें क्यों क्यों हिरासत में लिया? एक और अति सीरियस सवाल है कि जो गिरफ्तारी बहुत पहले हो जानी चाहिए थी, आख़िर इतनी देर में जाकर क्यों हुई?

बड़ी हैरानी की बात है कि जब भारत किसी देश की सत्तापलट में नहीं है, तो मैथ्यूज वैनडाइक और 6 यूक्रेनी भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निपटाने और सरकार को गिराने में क्यों लगे हुए थे! इसका उत्तर सुरक्षा एजेंसियों को देना ही होगा। क्या ये उनके साथ वही करना चाह रहे थे जो वेनेजुएला के निकोला मादुरो के साथ किया है?

एनआईए ने दिल्ली और लखनऊ सहित कई प्रमुख ट्रांजिट प्वाइंट्स से इन छह यूक्रेनी नागरिकों को पकड़ा। इसके अलावा एक अमेरिकी नागरिक को कोलकाता एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया, जिसकी पहचान मैथ्यू वैनडाइक के रूप में हुई है। इन सभी के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एनआईए की गिरफ्त में यूक्रेन के नागिरक

म्यांमार में उग्रवादियों को दी ट्रेनिंग

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र से जुड़ी यह साजिश अब कूटनीतिक स्तर पर तूल पकड़ती जा रही है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए ने यहां छह यूक्रेनी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इन पर अवैध रूप से मिजोरम में प्रवेश करने और फिर पड़ोसी देश म्यांमार जाकर उग्रवादियों को लड़ाई की ट्रेनिंग देने का आरोप है। इन सभी के खिलाफ विदेशी अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कौन है मैथ्यू वैनडाइक

इन सभी पर आरोप है कि ये भारत के संवेदनशील इलाकों में बिना परमिशन के गए। इनमें से एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक है, जिसका दुनिया भर के संघर्षों में लड़ने का इतिहास रहा है। उसने गद्दाफी के खिलाफ लड़ाई लड़ी, आईएसआईएस के खिलाफ बंदूक उठाई और वेनेजुएला और यूक्रेन में भी उसके कारनामों की बौछार है। ऐसे में भारत की खुफिया एजेंसियों ने सतर्कता दिखाई और उसे धर दबोचा। सबसे ज्यादा चर्चा मैथ्यू आरोन वैनडाइक को लेकर है। खुद को डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर, पूर्व पत्रकार और ‘फ्रीडम फाइटर बताने वाला 46 वर्षीय वैनडाइक आखिर है कौन?

Matthew VanDyke explains his organization’s process of recruiting former U.S. Military personnel to train militants across the world.

pic.twitter.com/wzGDgfoJu7

— Navroop Singh (@TheNavroopSingh) March 18, 2026

टूरिस्ट वीजा पर भारत आए

विषय की गंभीरता समझें- आखिर हुआ क्या है? एनआईए की एफआईआर और शुरुआती जांच से साफ होता है कि यह मामला सीधे भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाई इलाकों से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि वैनडाइक और उसके यूक्रेनी सहयोगी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे. यूक्रेनी नागरिकों की पहचान पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफनकिव, मैक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की के रूप में हुई है। हालांकि इन व्यक्तियों के बारे में ज्यादा जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन मैथ्यू वैनडाइक का नाम सामने आते ही हलचल मच गई, क्योंकि वह एक जाना-पहचाना चेहरा है और अमेरिका की ओर से कई देशों में अस्थिरता पैदा करने और तख्तापलट के बदनाम ज़माना कई संघर्षों से जुड़ा रहा है। उसकी पहचान उसकी तस्वीरों के जरिए भी की गई।

पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह की राय

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी और देश के वरिष्ठतम सुरक्षा सलाहकारों में से एक, विक्रम सिंह का कहना है कि आए दिन ये लोग सवाल करते थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कब मणिपुर का दौरा करेंगे, ताकि उनपर हमला किया जाए।

विक्रम सिंह
पूर्व पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश

विक्रमजी के अनुसार अमेरिका की दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से ही यह रुचि रही है कि दूसरे देशों में दखलंदाजी करे और वहां की सरकारों को तख्तापलट कर अपने पिट्ठू वहां बिठाए और उनकी संपत्ति, तेल व संपदा पर कब्ज़ा करे, जैसा कि अफगानिस्तान, ईराक, लीबिया, कांगो, वेनेज़ुएला आदि में देखने में आया है। पड़ोसी दुश्मन देश पाकिस्तान में उसने यह कारनामा चुनाव में चुनी गई पूर्व प्रधानमंत्री, इमरान खान की सरकार को बड़ी कलाकारी से साथ बे ईमानी से पलट कर शहबाज शरीफ़ और आसिम मुनीर की सत्ता का जुगाड़ जमा दिया है। इस प्रकार से 1945 से अब तक अमेरिका ने 15 देशों की सरकारों का तख्तापलट कर अपनी कठपुतली सरकारें बिठाई हैं, ठीक इसी प्रकार से, जैसे पिछले लगभग 40 वर्ष से उसने अरब देशों में अपनी बेसें स्थापित कर उनके तेल को लूटकर, उन्हें सुरक्षा न प्रदान कर, इजरायल को सुरक्षा दी है और जिसके लिए वह मौजूदा समय में तीन ट्रिलियन डॉलर खर्च कर चुका है।

मशहूर शायर और संपादक, “एमएमसी न्यूज़”, मुमताज़ आलम रिज़वी ने क्या खूब कहा है, अमेरिका के बारे में:

“अमेरिका को जंग से जबरदस्त प्यार है,
क्योंकि उसे बेचने अपने हथियार बेशुमार हैं!”

पहले गुवाहाटी फिर मिजोरम गए

सूत्रों के अनुसार, 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग तारीखों में टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे. वे गुवाहाटी पहुंचे और फिर जरूरी दस्तावेजों के बिना मिजोरम गए. यहां जाने के लिए “रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट” (आरएपी) और “इनर लाइन परमिट” (आई एल पी) लेना पड़ता है। ये न सिर्फ यहां बिना परमिशन गए, बल्कि आरोपों के अनुसार, उन्होंने म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र संगठनों (ईएजीस) से संपर्क स्थापित किया. जांच एजेंसियों का कहना है कि इन संगठनों के संबंध भारत के पूर्वोत्तर में सक्रिय उग्रवादी गुटों से भी जुड़े हैं। उनका उद्देश्य म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को पहले से तय ड्रोन वॉरफेयर ट्रेनिंग देना था।

पर्दे के पीछे साजिश

हालांकि, एनआईए ने केवल 7 नागरिकों की ही गिरफ्तारी बताई है, मगर अभी कई और होनी हैं, क्योंकि पर्दे के पीछे इन सातों विदेशियों ने जातीय सशस्त्र समूहों से संपर्क किया और प्रशिक्षण गतिविधियों में शामिल हुए. पुलिस रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ईएजीस पूर्वोत्तर के उग्रवादी संगठनों से जुड़े हुए हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क यूरोप से बड़ी मात्रा में ड्रोन भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचा रहा था। कमाल है, हमारी सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही हैं, कि मामला इतना आगे पहुंच गया!

मैथ्यू और गिरफ्तार किए गए लोगों का मकसद

एनआईए ने आरोप लगाया है कि यह समूह हथियारों की आपूर्ति, उग्रवादियों को प्रशिक्षण देने और यूरोप से आयातित ड्रोन का उपयोग कर म्यांमार में ट्रेनिंग कैंप्स को समर्थन देने की योजना बना रहा था, जिसमें ड्रोन वॉरफेयर, ऑपरेशन, असेंबली और जैमिंग तकनीक पर फोकस था। वैनडाइक और उसके साथियों पर आरोप है कि वे म्यांमार के विद्रोही गुटों को हथियारों के इस्तेमाल और ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग दे रहे थे।

एनआईए के मुताबिक, म्यांमार में सक्रिय कई सशस्त्र समूहों के भारत में प्रतिबंधित संगठनों से पहले से संबंध हैं। इन समूहों पर भारतीय उग्रवादी संगठनों को हथियार, उपकरण और प्रशिक्षण देने का संदेह है, जो सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

भारतीय क्षेत्र के जरिये कैसे भेजा गया ड्रोन

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क के भारत के अंदर कोई स्थानीय कनेक्शन हैं या नहीं या आया कि कुछ भारतीय भी इस में शामिल हैं। ड्रोन को भारतीय क्षेत्र के जरिए कैसे भेजा गया। गिरफ्तारी के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन की जांच की जा रही है और आगे की जांच के लिए आरोपियों को विभिन्न स्थानों पर ले जाया जाएगा।

मार्च 2025 में दी थी चेतावनी

मार्च 2025 में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने चेतावनी दी थी कि अमेरिका और ब्रिटेन के भाड़े के सैनिक और पूर्व विशेष बलों के सदस्य मिजोरम के रास्ते म्यांमार में प्रवेश कर रहे हैं, ताकि वहां की सैन्य सरकार के खिलाफ लड़ रहे स्थानीय समूहों को प्रशिक्षण दे सकें। वहीं, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भी अपनी सरकार गिरने से पहले अमेरिका पर आरोप लगाया था कि वह भारत से सटे इलाकों में एक ईसाई राज्य बनाना चाहता है। ऐसे में भारत सरकार की जांच एजेंसियां इस घटना को हल्के में नहीं लेना चाहेंगी। भारत को अत्यंत सतर्कता बरतनी होगी अपनी सुरक्षा को लेकर। जय हिंद! जय भारत!

 

Topics: शेख हसीनापूर्वोत्तर भारतअमेरिकी हस्तक्षेपमैथ्यू वैनडाइकमिजोरम सुरक्षायूक्रेनी नागरिकभारत में तख्तापलटयूएपीए मामलाम्यांमार उग्रवादी संबंधविक्रम सिंह पूर्व डीजीपीएनआईए
फिरोज बख्त अहमद
फिरोज बख्त अहमद
हैदराबाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलाधिपति [Read more]
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