चंडीगढ़। जिस ‘लोकपाल’ की तोतारटंत कर आम आदमी पार्टी (AAP) ने राजनीति में कदम रखा था, पंजाब में सत्ता में आने पर अब वह उसी मुद्दे से कन्नी काटती नजर आ रही है। पंजाब में लंबे समय से लोकपाल का पद खाली रहने पर पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की सरकार को कड़ी फटकार लगाई है।
अदालत ने सख्त लहजे में स्पष्ट किया है कि सरकार दो दिन के भीतर लोकपाल की नियुक्ति को लेकर अपना जवाब दाखिल करे, वरना कोर्ट इस मामले में अपने आदेश जारी करने को मजबूर हो जाएगा।
“लोकतंत्र है तो चुनाव होते रहेंगे…”
सुनवाई के दौरान जब पंजाब सरकार की तरफ से यह दलील दी गई कि ‘निकाय चुनाव’ और मतगणना के चलते अधिकारियों की व्यस्तता है, इसलिए नियुक्ति और जवाब दाखिल करने में समय लग रहा है, तो हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया।
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा-
“भारत में लोकतंत्र है तो चुनाव लगातार होते ही रहेंगे, लेकिन इसके कारण सरकार अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों (Statutory Duties) से पीछे नहीं हट सकती।”
8 अक्तूबर 2025 से खाली है लोकपाल का पद
इस मामले में दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता एडवोकेट विशाल मेहता ने अदालत के सामने कई चौंकाने वाले तथ्य रखे:
- निष्क्रिय व्यवस्था: पंजाब में 8 अक्तूबर 2025 से लोकपाल का पद खाली पड़ा है, जिससे राज्य की वैधानिक भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था लगभग निष्क्रिय हो चुकी है।
- सतर्कता आयोग की समाप्ति: सरकार ने पहले राज्य सतर्कता आयोग को यह कहकर समाप्त कर दिया था कि ‘लोकपाल संस्था’ को और अधिक शक्तिशाली बनाया जाएगा, लेकिन सात महीने बीत जाने के बाद भी इस पद पर कोई नियुक्ति नहीं हुई।
सरकार की दलीलें और कोर्ट की नाराजगी
पंजाब सरकार की ओर से अदालत में कहा गया कि पूर्व लोकपाल के इस्तीफे के बाद नई नियुक्ति नहीं हो सकी है। नियुक्ति प्रक्रिया अभी विचाराधीन है और इसके लिए राज्यपाल से परामर्श लेना जरूरी है। सरकार ने अदालत से जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय मांगा था और कहा कि मतगणना के कारण अधिकारी व्यस्त हैं, इसलिए दो दिन में जवाब देना संभव नहीं है।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख
इस पर हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए पूछा कि आखिर अदालत कब तक इंतजार करे? कोर्ट ने कटाक्ष करते हुए टिप्पणी की कि-
“सत्ताधारी दल (AAP) के लिए लोकपाल हमेशा से एक बेहद अहम मुद्दा रहा है, लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक इस पद को भरने की प्रक्रिया तक शुरू नहीं की गई है।”
अदालत ने सरकार के अतिरिक्त समय मांगने की अपील को ठुकराते हुए शुक्रवार तक जवाब दाखिल करने का अंतिम मौका दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मान सरकार शुक्रवार को अदालत में क्या जवाब पेश करती है।

















