केरलम की नव निर्वाचित सरकार विवादों में घिरती दिखाई दे रही है। अभी सीएम वी.डी. सतीशन का गुरुवायूर मंदिर में वीआईपी दर्शन करने वाला विवाद शांत नहीं हुआ था कि विधानसभा के पहले सत्र में ही एक और विवाद खड़ा हो गया। इस बार यह विवाद राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम से जुड़ा हुआ है। खबर आई है कि विधानसभा के नए सत्र में गीत के केवल कुछ ही अंश बजाए गए जिस पर विपक्षी दलों ने तीखा विरोध दर्ज कराया है।
शपथ ग्रहण समारोह से शुरू हुआ था विवाद
केरलम में अप्रैल 2026 में हुए विधानसभा चुनावों में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. डी. सतीशन को सीएम बनाया गया। उन्होंने 18 मई 2026 को केरलम के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। तब तिरुवनंतपुरम के सेंट्रल स्टेडियम में आयोजित इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला था। राजभवन के निर्देश पर समारोह में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाया गया था।
समारोह के दौरान कांग्रेस, कम्युनिस्ट और यहां तक कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेताओं को भी राष्ट्रीय गीत के सम्मान में खड़े देखा गया। हालांकि, राष्ट्रीय गीत को पूरा बजाने पर सत्तारूढ़ गठबंधन (UDF) और विपक्षी वामपंथी दलों (LDF) के बीच मतभेद भी दिखाई दिए। सीपीआई(एम) (CPI-M) के नेताओं ने शपथ ग्रहण में पूरे 6 छंदों के वंदे मातरम गीत गाए जाने की आलोचना की और कहा कि यह बहुलवादी समाज के लिए अनुचित है। इस पर मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने सफाई देते हुए कहा था कि सरकार को इसकी पूर्व जानकारी नहीं थी और यह पूरी तरह से राजभवन का फैसला था।
विधानसभा के पहले सत्र में आधा गीत बजाने पर हुआ हंगामा
इस बार वंदे मातरम को लेकर विवाद और गहरा गया। आज 29 मई 2026 को 16वीं केरल विधानसभा का पहला सत्र शुरू हुआ। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर के नीतिगत अभिभाषण के अवसर पर केरल पुलिस के बैंड ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के विपरीत वंदे मातरम के केवल शुरुआती 2 छंद ही बजाए। नियमों के मुताबिक, राष्ट्रीय गीत के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में इसे पूर्ण रूप से बजाया जाना अनिवार्य है।
विपक्ष ने जताया विरोध
केरलम सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता वी. मुरलीधरन ने सोशल मीडिया पर तीखा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने केरल विधानसभा में राष्ट्रीय गीत के साथ हुए इस व्यवहार की कड़ी निंदा करते हुए सतीशन सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘माननीय राज्यपाल की उपस्थिति वाले कार्यक्रमों में वंदे मातरम को पूरा गाने के केंद्र सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद केरल विधानसभा में इसका पालन नहीं किया गया। यह माननीय राज्यपाल, लोक भवन और अपने 150वें वर्ष में प्रवेश कर रहे राष्ट्रीय गीत का सरासर अपमान है।’
उन्होंने आगे लिखा, ‘सरकार का यह निर्णय स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वह जमात-ए-इस्लामी और माकपा के एजेंडे के सामने झुकने को तैयार है जो सार्वजनिक जीवन में वंदे मातरम के स्थान पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं। मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन को यह साफ करना चाहिए कि आखिर कांग्रेस को वंदे मातरम से कब से परेशानी होने लगी है जिसे पहली बार 1896 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के ऐतिहासिक सत्र में ही गाया गया था। हम हमारी राष्ट्रीय विरासत के प्रति किए गए इस अनादर की कड़ी निंदा करते हैं।’
राजभवन ने भी जताई आपत्ति
राजभवन ने भी इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और विधानसभा अध्यक्ष के सामने अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बात करते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा, ‘हमने इस बात पर जोर दिया था कि जब भी राज्यपाल मौजूद हों तो यह प्रोटोकॉल (नियम) है, वंदे मातरम यानी राष्ट्रीय गीत पूरा गाया जाना चाहिए। ऐसा नहीं किया गया, उन्होंने इसे गाया नहीं बल्कि केवल इसकी कुछ धुनें बजाईं जबकि वे ऐसा कर सकते थे। चलिए देखते हैं वे इसमें सुधार करेंगे या नहीं, मैंने इस बारे में विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से भी बात की है।’
















