ब्रिटेन में टॉमी रॉबिनसन ने एक बार फिर यू.के. की सरकार को मुस्लिम शरणार्थियों से पैदा हो रहीं राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक समस्याओं के प्रति झकझोरा है। 16 मई का दिन वेस्टमिंंस्टर की सड़क लंबे समय तक याद रखेगी जब सेकुलर मीडिया द्वारा धुर दक्षिणपंथी कहे जाने वाले नेता टॉमी रॉबिनसन द्वारा आयोजित रैली में लगभग 150,000 लोग वहां जुटे थे। इस रैली की धमक सड़क से संसद तक महसूस की गई और कीर स्टार्मर की सरकार को हिला गई। इसे ब्रिटिश राजनीति में एक मोड़ माना जा रहा है।
हालत यह है कि इस रैली में उमड़े जनसैलाब को देख संभवत: घबराए लंदन के मेयर सादिक खान ने कहा कि ‘हमारे देश में कुछ बदल गया है’। रॉबिनसन की “यूनाइट द किंगडम” नाम से निकली रैली कोई सामान्य बात नहीं थी। उस रैली में जहां रॉबिनसन सहित अनेक वक्ताओं ने यू.के. में मुस्लिम आप्रवासियों की वजह से आ रहे जनसांख्यिक परिवर्तन पर चिंता व्यक्त की वहीं सामाजिक स्तर पर बढ़े खतरों के प्रति भी आगाह किया।

टॉमी रॉबिनसन ब्रिटिश अस्मिता को जगाए रखने के लिए इस प्रकार की एक रैली सितम्बर 2025 में भी कर चुके हैं, उसमें भी एक लाख से ज्यादा की संख्या में लंदनवासियों ने शामिल होकर इस्लामवादियों की बेलगाम हरकतों के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। रॉबिनसन अपनी आक्रामक भाषण शैली और तथ्यों को सिलेसिलेवार ढंग से रखने के लिए खासे मशहूर हैं।
16 मई की रैली में संसद स्क्वायर में नागरिकों को संबोधित करते हुए रॉबिनसन ने पूछा, “क्या आप बैटल ऑफ ब्रिटेन के लिए तैयार हैं?” उन्होंने कहा कि लोगों को सक्रिय होना होगा वरना हम अपना देश हमेशा के लिए खो देंगे। उपस्थित भीड़ ने अवैध आप्रवासियों के खिलाफ जबरदस्त नारे लगाए और साफ जातया कि वे ‘बेनिफिट ब्रिटेन’ की धारणा को समाप्त कराना चाहते हैं। प्रदर्शनकारी कहते सुने गए कि वे अनधिकृत आप्रवासियों को इस देश में नहीं रहने देंगे, क्योंकि वे ब्रिटेन के अधिकृत नागरिकों को उनके अधिकारों से वंचित करने की हद तक जा रहे हैं और सत्ता तक का उनमें भय नहीं बचा है।

इधर लेबर पार्टी से आने वाले प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर हाल की राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ ही रहे हैं, सांसदों के बीच विद्रोह और सरकार की कमजोरी के संकेतों ने देश में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इन परिस्थितियों ने संगठित होकर उठ रहे ब्रिटेनवासी आप्रवासी भगाओ आंदोलन में नया जोश जगा रहे हैं। स्वाभाविक रूप से स्टार्मर ने प्रदर्शन के आयोजकों पर ‘घृणा और विभाजन’ फैलाने का आरोप लगाया।
ध्यान रहे, ‘यूनाइट द किंगडम’ आंदोलन किसी एक पार्टी से जुड़ा नहीं है, उसमें विभिन्न पार्टियों के समर्थक हैं। हाल में सम्पन्न स्थानीय चुनावों में रिफॉर्म की बढ़त ने लेबर पार्टी को झटका दिया है और उसे देश में लोकप्रिय ताकतों के खिलाफ कमजोर होता दिखाया है। रैली में कुछ लोग ‘रेस्टोर ब्रिटेन जैसे धुर दक्षिणपंथी दलों के झंडे ले कर आए थे। ये लोग घुसपैठियों के निर्वासन की मांग कर रहे थे।
उल्लेखनीय है कि उसी दिन यानी 16 मई को शहर में एक दूसरे स्थान पर फिलिस्तीन के समर्थन में ‘नाकबा’ रैली निकाली गई थी। पुलिस ने दोनों रैलियों में से कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया, पर किसी बड़ी हिंसात्मक घटना की रिपोर्ट नहीं मिली। रैली में अनेक लोगों का मत था कि कोई मजबूत नेतृत्व आए जो कठोर नीतियों के माध्यम से देश का वर्तमान स्वरूप बदल दे।
हैरानी की बात है कि रैली में ट्रंप और इस्राएल के समर्थन में भी झंडे दिखे। ऐसे बैनर दिखे जिनम पर डेनमार्क की कठोर आप्रवास नीतियों जैसा कुछ मांगा गया था। कुल मिलाकर रैली में आप्रवासन, विदेशी नीति और नागरिक पहचान पर गहन बेचैनी और ब्रिटिश अस्मिता को लेकर चिंताएं उभरकर सामने आईं।
इस संदर्भ में यहां यह बताना भी समीचीन होगा कि 2025 में यूनाइटेड किंगडम में लंबे समय के आप्रवासन आंकड़ों में लगभग आधे की गिरवट दर्ज की गई। यह उस स्तर पर पहुंच गया जो ब्रेग्जिट के बाद लागू की गई इमिग्रेशन व्यवस्था से पहले देखा गया था। इसके पीछे वजह हाल के वर्षों में सरकार द्वारा लागू किए गए ‘सख्त उपाय’ बताए जा रहे हैं जिन्होंने ब्रिटेन में आने वाले लोगों की संख्या को ‘सीमित’ कर दिया।

यू.के. के ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स ने हाल में बताया है कि दिसंबर 2025 के आखिर तक के 12 महीनों में कुल आप्रवास घटकर 171,000 रह गया था, जबकि एक साल पहले यही आंकड़ा 331,000 था। यह 2023 में 944,000 के रिकॉर्ड उच्च स्तर से हुई तेज गिरावट का ही आगे जारी रहना है।
इसमें संदेह नहीं है कि आप्रवासन, कानूनी या गैर-कानूनी, एक दशक से भी ज्यादा समय से राजनीतिक बहस का मुख्य मुद्दा रहा है। इस दौरान एक के बाद एक आने वाली सरकारों ने वीजा के नियमों को सख्त किया है और आय की न्यूनतम सीमा बढ़ाई है। मौजूदा सरकार ने इस दिशा में और भी आगे बढ़ने का वादा किया था।
‘ब्रिटिश फ्यूचर’ नामक थिंक टैंक ने कहा कि देश कुल आप्रवासन में अब तक की सबसे तेज गिरावट अनुभव कर रहा है। लेकिन उसके शोध के अनुसार, ज्यादातर लोग इसके ठीक विपरीत मानते हैं। लेकिन ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने इस गिरावट के पीछे ‘सख्त नीतियों’ को वजह बताया है ओर इसका ‘स्वागत’ किया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ‘अभी बहुत काम किया जाना बाकी है’।

















