ताइवान में चुनाव होने जा रहे हैं। लेकिन, उससे पहले भारतीयों के खिलाफ वहां पर नफरत की राजनीति किए जाने का मामला प्रकाश में आय़ा है। इस पर अब ताइवान सरकार ने नाराजगी जताई है। इस पोस्टर में भारतीय प्रवासी कामगारों पर रोक लगाने का वादा किया गया था, जिसमें नस्लीय भेदभाव की भावना दिख रही थी। ताइवान के अधिकारियों ने कहा कि ऐसा बयान उनके देश की आधिकारिक नीति को नहीं दर्शाता।
क्या था पोस्टर में?
काओहसियुंग शहर की नगर परिषद के उम्मीदवार ली हंग-यी ने यह चुनावी पोस्टर लगवाया। पोस्टर पर लिखा था, “आइए अगली पीढ़ी को बचाने के लिए मिलकर काम करें।” साथ ही इसमें भारतीय कामगारों को ताइवान में आने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का वादा भी था। पोस्टर में एक पगड़ी पहने व्यक्ति की तस्वीर थी और भारत का उल्टा झंडा दिखाया गया था। दोनों पर क्रॉस का निशान लगा हुआ था। इस पोस्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मलेशिया के जाने-माने पत्रकार इयान माइल्स चियोंग ने इसे शेयर किया और लिखा कि ताइवान के कुछ लोग भारतीयों को पसंद नहीं करते।
इसे भी पढ़ें: बीएचयू में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ प्रश्न पर ABVP का विरोध, इतिहास विभाग घेराव
ताइवान सरकार की प्रतिक्रिया
बुधवार को ताइवान की तरफ से आधिकारिक बयान जारी किया गया। भारत में ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र (TECC) ने ROC ताइवान की वेबसाइट पर कहा कि “ताइवान में कुछ लोगों द्वारा हाल में किए गए भेदभावपूर्ण प्रकाशन या टिप्पणियां” पूरे देश के रुख को नहीं दिखातीं। बयान में साफ लिखा गया – हम लोकतंत्र, समावेशिता और विविधता के मूल्यों को महत्व देते हैं। ताइवान और भारत के बीच लोगों के आपसी मेल-जोल का हम पूरा समर्थन करते हैं।
ताइवान ने आगे कहा, “हमें किसी भी तरह के पूर्वाग्रह, नस्लवाद और भेदभाव पर गहरा खेद है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं।” TECC ने दोनों देशों के बीच समझ बढ़ाने और ज्यादा से ज्यादा मेल-जोल के लिए अपनी पूरी ईमानदारी से कोशिश जारी रखने की बात कही।
भारतीय कामगारों का मुद्दा
ताइवान भारत से कम से कम 1000 कामगार लाने के लिए पहले ही करार कर चुका है। इस फैसले का कुछ इलाकों में विरोध भी हुआ है। ताइवान सरकार ने जोर देकर कहा कि वे लंबे समय से भारतीय प्रवासी कामगारों को लाने की योजना पर काम कर रहे हैं। ली हंग-यी जैसे स्थानीय उम्मीदवार का यह पोस्टर चुनावी माहौल में आया, लेकिन ताइवान की मुख्यधारा की नीति इससे बिल्कुल अलग है।
बहरहाल सरकार ने साफ किया कि भारतीयों के प्रति भेदभाव उनके मूल्यों के खिलाफ है। यह पूरा मामला तब सामने आया जब वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा तेज हो गई। ताइवान ने जल्दी ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी कि वे नस्लवाद या भेदभाव को बर्दाश्त नहीं करते।

















