America-Taiwan मिलकर बनाएंगे चीन को चिंता में डालने वाले हथियार, चीनी अखबार इसे बता रहे संबंध बिगाड़ने की कोशिश
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America-Taiwan मिलकर बनाएंगे चीन को चिंता में डालने वाले हथियार, चीनी अखबार इसे बता रहे संबंध बिगाड़ने की कोशिश

साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की रिपोर्ट है कि दोनों देशों के बीच हथियारों के संयुक्त उत्पादन की प्रक्रिया जल्दी ही शुरू हो सकती है। यह कदम न केवल ताइवान की सैन्य क्षमता को बढ़ाने वाला होगा, बल्कि चीन के लिए एक रणनीतिक चुनौती पेश करेगा

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Sep 2, 2025, 02:55 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिका और ताइवान के बीच इधर एक हथियार समझौता हुआ है जिसने चीन के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। यह चिंता इतनी अधिक है इस​का अंदाजा वहां के मीडिया में इस बारे में छप रहीं रिपोर्ट से चल जाता है। समझौते के तहत संभवत: दोनों देश मिलकर हथियार निर्मित करेंगे। इस घोषणा से चीन ही नहीं, एशिया-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति में जिज्ञासा पैदा कर दी है। चीन से प्रकाशित होने वाले अखबार साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की रिपोर्ट है कि अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर ने इस बात के संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच हथियारों के संयुक्त उत्पादन की प्रक्रिया जल्दी ही शुरू हो सकती है। यह कदम न केवल ताइवान की सैन्य क्षमता को बढ़ाने वाला होगा, बल्कि चीन के लिए एक रणनीतिक चुनौती पेश कर सकता है।

इसमें संदेह नहीं है कि अमेरिका लंबे समय से ताइवान को हथियारों की आपूर्ति करता रहा है, लेकिन यह पहली बार है जब दोनों देशों के बीच संयुक्त उत्पादन शुरू होने की बात सामने आई है। इस समझौते के तहत ताइवान को अमेरिका से उन्नत वायु रक्षा प्रणाली नेशनल एडवांस्ड सर्फेस टू सर्फेस मिसाइल सिस्टम प्राप्त होगी। यह वही प्रणाली है जो यूक्रेन ने रूसी मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए इस्तेमाल की थी।

यह रिपोर्ट छापी है साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट ने

नेशनल एडवांस्ड सर्फेस टू सर्फेस मिसाइल सिस्टम के तैनात होने से ताइवान बेहद तेजी से किए जाने वाले हवाई हमलों से प्रभावी बचाव के योग्य बनाएगा। इसमें चीनी विमानों, मिसाइलों और ड्रोन से संभावित खतरे शामिल हैं। यह समझौता अमेरिका की ताइवान नीति में एक ‘महत्वपूर्ण विस्तार’ की ओर इशारा करता है, यानी अब यह सिर्फ कल—पुर्जों और तकनीकी सेवाओं की आपूर्ति तक सीमित नहीं रह गया है।

चीन अपनी ‘वन चाइना’ नीति के तहत ताइवान को अपनी मुख्य भूमि का एक अभिन्न हिस्सा मानता आया है। चीन सरकार ने अनेक बार कहा भी है कि जरूरत पड़ी तो बल प्रयोग करके ताइवान को मुख्य भूूमि में मिलाया जाएगा। चीन गाहे—बगाहे ताइवान की सरहदों के बेहद पास युद्धक अभ्यास करके उस देश को अपनी सैन्य सामर्थ्य से चौंकाता रहा है। ऐसे में अमेरिका-ताइवान के बीच हथियारों का संयुक्त उत्पादन उस विस्तारवादी कम्युनिस्ट देश के लिए एक गंभीर चेतावनी की तरह देखी जा रही है। चीन के विश्लेषकों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बताया है।

गत 29 अगस्त को ताइवान की राधानी ताइपे में अमेरिकी सीनेटर रोजर विकर और राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते

हाल ही में चीन ने ‘ज्वाइंट स्वॉर्ड-2024बी’ नाम से सैन्य अभ्यास किया था, जिसमें चीनी वायुसेना की उड़ानें ताइवान के आसपास रिकार्ड संख्या में देखी गई थीं। चीनी वायुसेना का यह युद्धाभ्यास ताइवान की स्वतंत्रता समर्थक शक्तियों को एक चेतावनी देने के तौर पर देखा गया था। ऐसे में अमेरिका अगर ताइवान को सैन्य सहायता देने का मन बना लेता है तो उसका यह कदम चीन की रणनीति में अड़ंगा डाल सकता है।

ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई चिंग-ते घोर स्वतंत्रता समर्थक माने जाते हैं। उन्होंने अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग को सदा प्राथमिकता दी है। उनके नेतृत्व में नेशनल एडवांस्ड सर्फेस टू सर्फेस मिसाइल सिस्टम की खरीद और संयुक्त उत्पादन की योजना बनना इस बात का संकेत है कि ताइवान अपनी रक्षा नीति को और अधिक आक्रामक बना रहा है।

चिंग-ते का यह कदम ताइवान की आत्मरक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के साथ ही अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक संबंधों को भी मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। इससे यह संदेश जाएगा कि ताइवान किसी भी संभावित चीनी हमले के लिए पक्की तैयारी करने का इच्छुक है। अमेरिका ताइवान के बीच यह समझौता केवल इन दो देशों तक सीमित नहीं रहने वाला है, विशेषज्ञ मानते हैं कि इसका असर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर पड़ सकता है। जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे अमेरिका के सहयोगी देशों के रणनीतिकार इसे चीन के बढ़ते प्रभाव के विरुद्ध एक संतुलन के रूप में देख सकते हैं।

वहीं दूसरी ओर, यह कदम पहले से ही तल्ख चल रहे अमेरिका-चीन संबंधों को और अधिक तनावपूर्ण बना सकता है। चीन तो ताइवान को लेकर पहले भी अनेक बार अमेरिका को ‘सबसे संवेदनशील मुद्दा’ बता चुका है। ऐसे में यह समझौता दोनों देशों के बीच कूटनीतिक टकराव को और बढ़ा सकता है। अमेरिका का यह कदम चीन के लिए एक स्पष्ट संकेत भी है कि ताइवान को ताकत के दम पर अपने साथ मिलाने की किसी भी कोशिश का वह विरोध करेगा।

Topics: अमेरिकाdefenseताइवानSouth China Morning Postmissile productionChinaus taiwan defence dealनेशनल एडवांस्ड सर्फेस टू सर्फेस मिसाइल सिस्टमचीन
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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