धार की भोजशाला को लेकर वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए माना है कि भोजशाला मंदिर है।
भोजशाला हमेशा से मां वाग्देवी का मंदिर और शिक्षा केंद्र था?
इसी पर करीब दो वर्ष पूर्व भोपाल में आयोजित पाञ्चजन्य के सुशासन संवाद में प्रज्ञा प्रवाह के मालवा प्रांत के संयोजक डॉ. मिलिंद दांडेकर ने भोजशाला के उस पुराने इतिहास की बात की थी, जिसपर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है. उन्होंने बताया था कि यहां मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित थी, जिसे अंग्रेजों के दौर में खुदाई के बाद लंदन ले जाया गया।
इस वीडियो में जानिए —
राजा भोज ने भोजशाला की स्थापना कैसे की?
मुगल आक्रमण के दौरान क्या हुआ?
1875 की खुदाई में क्या मिला?
और आखिर मां वाग्देवी की प्रतिमा लंदन कैसे पहुंची?

















