बंगाल में ममता बनर्जी के सिग्नेचर लोगो 'बिस्वा बांग्ला' की जगह अब राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ
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होम भारत पश्चिम बंगाल

बंगाल में ममता बनर्जी के सिग्नेचर लोगो ‘बिस्वा बांग्ला’ की जगह अब राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ

पश्चिम बंगाल की नई सरकार का यह रीब्रांडिंग अभियान है और यह केवल कागजों या फाइलों तक सीमित नहीं है। अब यह जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है।

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता — edited by Mahak Singh
May 17, 2026, 02:16 pm IST
in पश्चिम बंगाल
राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ

राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। कुछ दिनों पहले कोलकाता पुलिस ने पूर्व सीएम ममता बनर्जी और टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स से अनफॉलो किया था। अब राज्य की नवनिर्वाचित सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल की सबसे बड़ी पहचान माने जाने वाले ‘बिस्वा बांग्ला’ (Biswa Bangla) लोगो को हटाने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी है।

यह प्रतीक करीब एक दशक से भी अधिक समय तक पश्चिम बंगाल सरकार की पहचान बना हुआ था और अब यह इतिहास का हिस्सा बनने जा रहा है। बीजेपी की सरकार ने इसके स्थान पर भारत के राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

साल्ट लेक स्टेडियम में दिखा बदलाव

पश्चिम बंगाल की नई सरकार का यह रीब्रांडिंग अभियान है और यह केवल कागजों या फाइलों तक सीमित नहीं है। अब यह जमीनी स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा और सबसे पहली नजीर बना कोलकाता का प्रसिद्ध साल्ट लेक स्टेडियम। इस विशाल स्टेडियम के मेन गेट्स और प्रमुख स्थानों पर लगे बिस्वा बांग्ला के बड़े-बड़े प्रतीकों को हटा दिया गया है। इनके स्थान पर अब राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ को स्थापित किया गया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में राज्य के अन्य प्रमुख सार्वजनिक बुनियादी ढांचों और सरकारी इमारतों से भी इस पुराने लोगो को हटाकर राष्ट्रीय प्रतीक लगाया जाएगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘एगिये बांग्ला’ का भी बदला स्वरूप

जमीनी स्तर के साथ-साथ राज्य सरकार के डिजिटल तंत्र में भी बड़ा बदलाव किया गया है। पश्चिम बंगाल सरकार का मुख्य डिजिटल पोर्टल ‘एगिये बांग्ला’ (Egiye Bangla) जो विभिन्न सरकारी विभागों और नागरिक सेवाओं का मुख्य जरिया है, वह भी अब पूरी तरह से बदल चुका है। इस पोर्टल के होमपेज से ‘बिस्वा बांग्ला’ का लोगो गायब हो चुका है और उसकी जगह अब राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ दिखाई दे रहा है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार के समय पूरे राज्य में ‘नीला और सफेद’ रंग थीम के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। बीजेपी सरकार ने सत्ता संभालते ही इस थीम को बदल दिया है। अब वेबसाइट पर सफेद बैकग्राउंड के साथ केसरिया रंग के ग्राफिक्स और थीम का इस्तेमाल किया जा रहा है। अपडेट किए गए इस पोर्टल पर अब नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) की तस्वीर भी दिखाई दे रही है। इसके अलावा ई-सेवाओं, पर्यटन, व्यापार, उद्योग और कृषि से जुड़े सभी विभागीय आइकन्स को केसरिया रंग की थीम के साथ नए सिरे से डिजाइन किया गया है।

फैसले के पक्ष में बीजेपी का तर्क

इस बड़े बदलाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेताओं ने सरकार के फैसले का पुरजोर समर्थन किया है। पार्टी का मानना है कि किसी व्यक्ति विशेष द्वारा व्यक्तिगत रूप से डिजाइन किए गए लोगो को किसी राज्य सरकार की प्राथमिक पहचान नहीं बनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि राज्य सरकार किसी पार्टी या व्यक्ति की नहीं बल्कि जनता की होती है। आधिकारिक सरकारी कार्यों और पहचान के लिए भारत का राष्ट्रीय प्रतीक ‘अशोक स्तंभ’ ही सबसे सर्वोच्च, संवैधानिक और उपयुक्त माध्यम है। इस तरह नई सरकार बस राज्य के प्रशासनिक तंत्र को उसकी मूल संवैधानिक पहचान वापस दिला रही है।

2017 में इस लोगो के इस्तेमाल पर हुआ था विवाद

‘बिस्वा बांग्ला’ लोगो पर साल 2017 में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था। उस समय बीजेपी के तत्कालीन नेता मुकुल रॉय ने आरोप लगाया था कि ‘बिस्वा बांग्ला’ लोगो कोई सरकारी संपत्ति नहीं है बल्कि यह एक निजी स्वामित्व वाला ब्रांड है। इससे जुड़े व्यापारिक लाभ एक परिवार विशेष को मिल रहे हैं।

उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में स्पष्ट किया था कि इस लोगो को उन्होंने खुद अपने हाथों से डिजाइन किया था। उन्होंने इसे राज्य सरकार को बिना किसी रॉयल्टी या शुल्क के इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।

Topics: West BengalMamata BanerjeeSuvendu AdhikariBengal governmentBJP West BengalBiswa Bangla LogoAshoka StambhEgiye Bangla PortalRebranding Bengalpolitics
जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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