RSS स्वयंसेवक रुद्रेश हत्याकांड: PFI नेता इरफ़ान पाशा को कर्नाटक हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज
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RSS स्वयंसेवक रुद्रेश हत्याकांड: PFI नेता इरफ़ान पाशा को कर्नाटक हाईकोर्ट से झटका, जमानत याचिका खारिज

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने साल 2016 के बहुचर्चित आरएसएस स्वयंसेवक रुद्रेश हत्याकांड के मुख्य आरोपी और PFI नेता इरफ़ान पाशा की अंतरिम ज़मानत अर्जी खारिज कर दी है। जानें एनआईए (NIA) की क्या थीं दलीलें

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 16, 2026, 07:59 pm IST
in भारत, कर्नाटक
Karnataka High Court rejects bail of PFI leader Irfan Pasha in RSS worker Rudresh murder case

बेंगलुरु । कर्नाटक उच्च न्यायालय ने साल 2016 में बेंगलुरु में हुए बहुचर्चित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक रुद्रेश हत्याकांड के मुख्य आरोपी को कोई भी राहत देने से साफ़ इनकार कर दिया है। अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व नेता और मामले के आरोपी इरफ़ान पाशा की अंतरिम ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया है।

आरोपी ने अपनी दिवंगत बहन की मृत्यु के 40वें दिन होने वाली धार्मिक रस्मों (चेहल्लुम) में शामिल होने के लिए न्यायिक हिरासत से अस्थायी रिहाई की मांग की थी।

हाई कोर्ट ने बरकरार रखा ट्रायल कोर्ट का फैसला

जस्टिस सचिन शंकर मगदुम और जस्टिस राजेश राय के. की डिवीज़न बेंच ने इरफ़ान पाशा की अर्जी पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत (Trial Court) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें आरोपी की अंतरिम ज़मानत याचिका पहले ही खारिज कर दी गई थी।

कोर्ट ने राशन कार्ड और पारिवारिक विवरण को खंगाला

सुनवाई के दौरान माननीय जजों की बेंच ने याचिकाकर्ता द्वारा जमा किए गए राशन कार्ड और परिवार के सदस्यों के विवरण की गहन जांच की। कोर्ट ने पाया कि:

  • आरोपी के परिवार के अन्य सदस्य घर पर ही मौजूद हैं, जो इस धार्मिक प्रार्थना और रस्मों को सुचारू रूप से पूरा कर सकते हैं।
  • आरोपी इरफ़ान पाशा को इसी साल 30 मार्च को बहन शहीदा यास्मीन की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए पहले ही 3 दिनों की अंतरिम ज़मानत दी जा चुकी थी।
  • इसके अलावा, ट्रायल कोर्ट ने उसे बहन की मृत्यु के 10वें से 13वें दिन के बीच होने वाली विशेष प्रार्थना सभाओं में शामिल होने की अनुमति भी दी थी।

इन तथ्यों को रेखांकित करते हुए हाई कोर्ट ने 40वें दिन की रस्म के लिए बार-बार अस्थायी रिहाई देने की आवश्यकता पर सवाल उठाया और कहा कि याचिकाकर्ता के पास इसके लिए कोई ठोस या पर्याप्त आधार नहीं है।

NIA ने जताया फरार होने का डर, कोर्ट ने माना गंभीर विषय

इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोपी की ज़मानत का अदालत में पुरज़ोर विरोध किया। NIA के वकील ने दलील दी कि-

  1. आरोपी पर लगे आरोप देश की सुरक्षा और सामाजिक समरसता से जुड़े हैं तथा बेहद गंभीर प्रकृति के हैं।
  2. यदि इस मोड़ पर आरोपी को रिहा किया गया, तो उसके फरार होने की पूरी आशंका है।
  3. मामले का ट्रायल (मुकदमा) अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।

NIA की दलीलों से सहमति जताते हुए डिवीज़न बेंच ने कहा कि जब ट्रायल लगभग पूरा होने वाला हो, तब अंतरिम ज़मानत देने से न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

क्या है RSS कार्यकर्ता रुद्रेश हत्याकांड?

यह मामला साल 2016 का है, जब बेंगलुरु के कमर्शियल स्ट्रीट पुलिस स्टेशन इलाके में RSS कार्यकर्ता रुद्रेश की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे कर्नाटक सहित देश भर में भारी आक्रोश फैल गया था। मामले की संवेदनशीलता और चरमपंथी संगठनों से इसके कथित संबंधों को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी NIA को सौंपी गई थी।

जयराम नामक व्यक्ति की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इरफ़ान पाशा सहित कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), हथियार कानून और कड़े गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है।

आरोपी पिछले लगभग 9 साल और 6 महीने से न्यायिक हिरासत में है।

Topics: Nia investigationKarnataka High CourtRudresh Murder CasePFI Leader Irfan PashaRSS Worker Murder BengaluruUAPA Act KarnatakaBengaluru Crime News
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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