बेंगलुरु । कर्नाटक उच्च न्यायालय ने साल 2016 में बेंगलुरु में हुए बहुचर्चित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवक रुद्रेश हत्याकांड के मुख्य आरोपी को कोई भी राहत देने से साफ़ इनकार कर दिया है। अदालत ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूर्व नेता और मामले के आरोपी इरफ़ान पाशा की अंतरिम ज़मानत याचिका को खारिज कर दिया है।
आरोपी ने अपनी दिवंगत बहन की मृत्यु के 40वें दिन होने वाली धार्मिक रस्मों (चेहल्लुम) में शामिल होने के लिए न्यायिक हिरासत से अस्थायी रिहाई की मांग की थी।
हाई कोर्ट ने बरकरार रखा ट्रायल कोर्ट का फैसला
जस्टिस सचिन शंकर मगदुम और जस्टिस राजेश राय के. की डिवीज़न बेंच ने इरफ़ान पाशा की अर्जी पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। हाई कोर्ट ने इस मामले में निचली अदालत (Trial Court) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसमें आरोपी की अंतरिम ज़मानत याचिका पहले ही खारिज कर दी गई थी।
कोर्ट ने राशन कार्ड और पारिवारिक विवरण को खंगाला
सुनवाई के दौरान माननीय जजों की बेंच ने याचिकाकर्ता द्वारा जमा किए गए राशन कार्ड और परिवार के सदस्यों के विवरण की गहन जांच की। कोर्ट ने पाया कि:
- आरोपी के परिवार के अन्य सदस्य घर पर ही मौजूद हैं, जो इस धार्मिक प्रार्थना और रस्मों को सुचारू रूप से पूरा कर सकते हैं।
- आरोपी इरफ़ान पाशा को इसी साल 30 मार्च को बहन शहीदा यास्मीन की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार के लिए पहले ही 3 दिनों की अंतरिम ज़मानत दी जा चुकी थी।
- इसके अलावा, ट्रायल कोर्ट ने उसे बहन की मृत्यु के 10वें से 13वें दिन के बीच होने वाली विशेष प्रार्थना सभाओं में शामिल होने की अनुमति भी दी थी।
इन तथ्यों को रेखांकित करते हुए हाई कोर्ट ने 40वें दिन की रस्म के लिए बार-बार अस्थायी रिहाई देने की आवश्यकता पर सवाल उठाया और कहा कि याचिकाकर्ता के पास इसके लिए कोई ठोस या पर्याप्त आधार नहीं है।
NIA ने जताया फरार होने का डर, कोर्ट ने माना गंभीर विषय
इस संवेदनशील मामले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने आरोपी की ज़मानत का अदालत में पुरज़ोर विरोध किया। NIA के वकील ने दलील दी कि-
- आरोपी पर लगे आरोप देश की सुरक्षा और सामाजिक समरसता से जुड़े हैं तथा बेहद गंभीर प्रकृति के हैं।
- यदि इस मोड़ पर आरोपी को रिहा किया गया, तो उसके फरार होने की पूरी आशंका है।
- मामले का ट्रायल (मुकदमा) अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।
NIA की दलीलों से सहमति जताते हुए डिवीज़न बेंच ने कहा कि जब ट्रायल लगभग पूरा होने वाला हो, तब अंतरिम ज़मानत देने से न्यायिक प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
क्या है RSS कार्यकर्ता रुद्रेश हत्याकांड?
यह मामला साल 2016 का है, जब बेंगलुरु के कमर्शियल स्ट्रीट पुलिस स्टेशन इलाके में RSS कार्यकर्ता रुद्रेश की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे कर्नाटक सहित देश भर में भारी आक्रोश फैल गया था। मामले की संवेदनशीलता और चरमपंथी संगठनों से इसके कथित संबंधों को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय एजेंसी NIA को सौंपी गई थी।
जयराम नामक व्यक्ति की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने इरफ़ान पाशा सहित कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), हथियार कानून और कड़े गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत चार्जशीट दाखिल की गई है।
आरोपी पिछले लगभग 9 साल और 6 महीने से न्यायिक हिरासत में है।

















