मंदिर के स्तंभ, संस्कृत शिलालेख और टूटी मूर्तियां... भोजशाला रिपोर्ट में क्या-क्या मिला?
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मंदिर के स्तंभ, संस्कृत शिलालेख और टूटी मूर्तियां… भोजशाला रिपोर्ट में क्या-क्या मिला?

रिपोर्ट के अनुसार परिसर की नींव में 10वीं–11वीं शताब्दी के बेसाल्ट पत्थर मिले हैं, जिन पर “शारदा सदन” लिखा हुआ पाया गया। इसके अलावा संस्कृत शिलालेखों में “पारिजात मंजरी” जैसी साहित्यिक कृतियों का उल्लेख भी मिला है।

Written byMahak SinghMahak Singh
May 15, 2026, 03:30 pm IST
inमध्य प्रदेश
Dhar Bhojshala was a saraswati Temple says KK Muhammad

धार भोजशाला का एक दृश्य (फोटो साभार: HT)

भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट ने देशभर में नई बहस छेड़ी। करीब 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक सर्वे और 2189 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट में एएसआई ने दावा किया कि वर्तमान भोजशाला परिसर मूल रूप से परमारकाल में बना वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर और एक प्रसिद्ध शिक्षण केंद्र था। बाद के समय में इसमें बदलाव कर मस्जिद और कमाल मौला दरगाह का स्वरूप दिया गया।

रिपोर्ट के अनुसार परिसर की नींव में 10वीं–11वीं शताब्दी के बेसाल्ट पत्थर मिले हैं, जिन पर “शारदा सदन” लिखा हुआ पाया गया। इसके अलावा संस्कृत शिलालेखों में “पारिजात मंजरी” जैसी साहित्यिक कृतियों का उल्लेख भी मिला है। इससे यह माना जा रहा है कि भोजशाला केवल धार्मिक स्थल नहीं थी, बल्कि शिक्षा, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी बड़ा केंद्र थी। एएसआई ने अपनी जांच में बताया कि परिसर का निर्माण तीन चरणों में हुआ। सबसे पुरानी परत मंदिर की है। इसके बाद क्षतिग्रस्त ढांचे के अवशेष मिले और फिर अंतिम चरण में मस्जिदनुमा संरचना तैयार की गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मस्जिद निर्माण में मंदिर के स्तंभों और पत्थरों का दोबारा इस्तेमाल किया गया। कई पत्थर उल्टे या तिरछे लगाए गए थे, जिन पर संस्कृत शिलालेख खुदे हुए थे। कुछ अक्षरों को घिसने के निशान भी पाए गए, जिससे मूल पहचान छिपाने की आशंका जताई गई है।

स्तंभ, शिलालेख और मूर्तियों से मिले अहम संकेत

सर्वे में 106 मुख्य स्तंभ और 82 अर्धस्तंभ मिलने की बात कही गई। इन स्तंभों पर कीर्तिमुख, नागबंध और अन्य पारंपरिक हिंदू मंदिर शैली की नक्काशी बनी हुई है। एएसआई के अनुसार यह वास्तुकला मध्यकालीन मंदिर निर्माण शैली से मेल खाती है। रिपोर्ट में 150 से ज्यादा संस्कृत और प्राकृत शिलालेखों का जिक्र है, जबकि अरबी और फारसी भाषा के 56 अभिलेख मिले हैं। इसके अलावा गणेश, नृसिंह, ब्रह्मा और अर्धनारीश्वर जैसी मूर्तियों के अवशेष भी मिले हैं। कई मूर्तियां टूटी हुई अवस्था में मिलीं, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें क्षति पहुंचाई गई थी। 1455 ईस्वी के एक शिलालेख का भी रिपोर्ट में उल्लेख है, जिसमें पुराने आश्रम को तोड़कर नमाज की जगह बनाने की बात कही गई है। एएसआई इस शिलालेख को ऐतिहासिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण प्रमाण मानता है।

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Mahak Singh
Mahak Singh
2022 में ज़ी न्यूज़ से पत्रकारिता की शुरुआत की। उसके बाद न्यूज़ नेशन, दैनिक जागरण और न्यूज़ 24 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य करते हुए पत्रकारिता के विभिन्न आयामों का अनुभव प्राप्त किया। वर्तमान में पाञ्चजन्य में सब एडिटर के रूप में कार्यरत हूं। ज़िमा ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से मैने पत्रकारिता की है। [Read more]
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