Birmingham Muslim Independent Candidates Victory UK Election । क्या ब्रिटेन के सबसे बड़े मुस्लिम आबादी वाले शहर बर्मिंघम में लोकतंत्र अब मजहबी पहचान के हाथों बंधक बन गया है? कचरे के ढेर और गाजा के नारों के बीच निकले चुनावी नतीजों ने लेबर पार्टी की नींद उड़ा दी है…
ब्रिटेन मे पिछले दिनों स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है और इसे लेकर प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की आलोचना हो रही है। मगर सबसे ज्यादा लोगों को हैरानी बर्मिंघम की हार से हो रही है। बर्मिंघम में ब्रिटेन में सबसे अधिक मुस्लिम रहते हैं और जिनमें पाकिस्तानी सबसे ज्यादा हैं और उसके बाद बांग्लादेशी मुस्लिम हैं।
बर्मिंघम पिछले कई समय से नकारात्मक रूप से चर्चा में रहा था। वहाँ पर एक साल से जो सबसे बड़ी समस्या थी, वह थी वहाँ के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल। लेबर के नेतृत्व वाली काउंसिल ने कचड़ा विभाग में कुछ पदों को बदलने और सैलेरी की संरचना में बदलाव का प्रस्ताव रखा था। मगर इन प्रस्तावों को यूनियन ने नकार दिया और हड़ताल कर दी।
लेबर काउंसिल ने कडा रुख अपनाया और यूनियन की मांगों को मानने से इनकार कर दिया। इसे लेकर लोगों में आक्रोश भड़क गया था और देखते ही देखते यूनियन की हड़ताल के कारण सड़कों पर कचड़े के ढेर लग गए। हमने भी कई बार पांचजन्य में लिखा कि किस प्रकार बर्मिंघम कचड़े का अड्डा बन गया है।
यह हड़ताल जनवरी 2025 में आरंभ हुई थी और मार्च 2025 से यह पूरी तरह से हड़ताल में बदल गई। जो सड़कों पर कचड़े के ढेर थे, उनसे चूहे, मक्खियाँ, बदबू और बीमारियों का खतरा बढ़ गया। वहाँ की सड़कों पर बिल्ली के आकार के चूहे तक की खबरें आईं।
ब्रिटेन में स्वतंत्र गठबंधन ने इसे भुनाया
बर्मिंघम में इस मुद्दे को अख्तर याकूब और शकील अफसर वाले स्वतंत्र गठबंधन ने इस मामले को भुनाया और लेबर को इस कचड़े के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार बताया। इन्होनें लोगों से वादा किया कि वे उन्हें इस कचड़े की समस्या से निजात दिलाएंगे।
कौन हैं अख्तर याकूब और शकील अफसर?
अख्तर याकूब और शकील अफसर इंडिपेंडेंट अलाइअन्स के दो मुख्य नेता हैं, जिनके नेतृत्व में स्वतंत्र मुस्लिम उम्मीदवार लड़े थे। अख्तर याकूब और शकील अफसर दोनों ही कट्टर मुस्लिम हैं, और वे लगातार ही विवादित बयान देते रहे हैं। अख्तर याकूब का सबसे बड़ा विवादित बयान यहूदियों को लेकर रहा था। उन्होनें कहा था कि “The Zionists control everything” (यहूदियों/जियोनिस्ट सब कुछ कंट्रोल करते हैं)।“ और यह भी कहा था कि जियोनिस्ट पूरे विश्व के नैरेटिव को कंट्रोल करते हैं।
मगर इससे पहले वर्ष 2024 में एक कार्यक्रम में महिलाओं को लेकर यह भी कहा था कि “70% of hell is going to be women” (नर्क में 70% महिलाएँ होंगी)।
शकील अख्तर भी पीछे नहीं थे। शकील अख्तर के भी कई विवादित बयान रहे। शकील ने एक पॉडकास्ट में कहा था कि उनके पूर्वजों ने यूके को दोबारा बनाया है, इसलिए अब वे यूके पर कब्जा करना चाहते हैं।
इनके मुख्य वायदों में था लेबर पार्टी को सत्ता से हटाना और गाजा/फिलिस्तीन के लिए आवाज उठाना।
उन्होनें मुस्लिम समुदाय के हितों की रक्षा के लिए भी चुनावी वायदे किये जैसे कि हलाल, नमाज की जगहें, मजहबी मूल्य!
लेबर पार्टी को मुस्लिम परस्त पार्टी माना जाता है और यह भी कहा जाता है कि लेबर पार्टी ने पाकिस्तान और बांग्लादेशी मुस्लिमों के वोट पाने के लिए हमेशा ही अपने नागरिकों के अधिकारों को अनदेखा किया, फिर भी मुस्लिमों ने लेबर पार्टी का साथ क्यों छोड़ दिया?
दरअसल इसके पीछे गाजा है। मुस्लिम समुदाय के नेताओं का मानना है कि लेबर पार्टी ने गाजा में जेनसाइड का समर्थन किया था, इसलिए उन्हें सत्ता से हटाया जाना चाहिए। कई उम्मीदवारों के नारे ही थे कि Punish Labour for supporting Israel।
इन मुस्लिम उम्मीदवारों ने हलाल खाने को लेकर वोट मांगे और कहा कि वे हलाल खाने की उपलब्धता को बढ़ाएंगे। उन्होनें मस्जिदों और नमाज करने की जगहों के विस्तार और सुरक्षा के वायदे किये। उन्होनें यह भी कहा कि वे हर कीमत पर मुस्लिम मूल्यों की रक्षा करेंगे और लड़कियों के लिए माडेस्ट ड्रेस की वकालत की।
संक्षेप में उन्होनें मुस्लिम पहचान की राजनीतिक आवाज को बुलंद किया।
यह बहुत हैरानी की बात है कि जिस लेबर ने मुस्लिम वोटबैंक के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षा एवं हितों को अनदेखा किया, उसे ही मुस्लिम विरोधी पार्टी बनाकर मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। संख्या के हिसाब से बर्मिंघम में सबसे ज्यादा मुस्लिम हैं।
हालांकि बर्मिंघम में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला है। रिफॉर्म यूके सबसे बड़ा दल बनकर उभरा है, मगर उसके पास भी पर्याप्त 51 सीटें नहींहैं और वह ग्रीन पार्टी से 2 ही सीट आगे हैं।
ग्रीन पार्टी भी वामपंथी विचारधारा की पार्टी है और वह भी गाजा का समर्थन करती है। उसने भी फिलिस्तीन के समर्थन में आवाज उठाई थी। हाँ, जहां इंडिपेंडेंट अलाइअन्स गाजा का समर्थन और एलजीबीटीक्यू समुदाय का विरोधी था तो वहीं ग्रीन पार्टी गाजा के साथ एलजीबीटीक्यू समुदाय के लोगों का भी समर्थन कर रही है।
इसमें भी कई मुस्लिमों को टिकट दिए और कई जीते भी। जबकि इंडिपेंडेंट अलाइअन्स ने ग्रीन पार्टी पर एलजीबीटीक्यू विचारधारा और अश्लीलता के समर्थन का आरोप लगाया था।
यह कहा जा सकता है कि लेबर पार्टी ने जिस मुस्लिम वोटबैंक के लिए जमीन आसमान एक किया, उसने केवल फिलिस्तीन वाले मामले को लेकर उसे मुस्लिम विरोधी बताकर अपना रहनुमा या तो इंडिपेंडेंट अलाइअन्स को चुना या फिर ग्रीन को!

















