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होम भारत

देश के इतिहास में पहली बार लाखों जनजाति आएंगे दिल्ली, बताएंगे नगरवासी और गिरिवासी सब एक हैं

दिल्ली में आयोजित होने वाले 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' में देश के कोने—कोने में रहने वाले जनजाति समाज के लोग लेंगे भाग।

Written byअरुण कुमार सिंहअरुण कुमार सिंह
May 11, 2026, 09:27 pm IST
inभारत, दिल्ली
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. राजकिशोर हांसदा। साथ में हैं श्री प्रकाश उईके, अशोक कुमार गोंड आदि

पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए डॉ. राजकिशोर हांसदा। साथ में हैं श्री प्रकाश उईके, अशोक कुमार गोंड आदि

आगामी 24 मई को दिल्ली के लालकिला मैदान में ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ आयोजित होगा। इस समागम का मुख्य आकर्षण वे पांच शोभायात्राएं होंगी, जो दिल्ली के अलग-अलग स्थानों से निकलेंगी। इन शोभायात्राओं में देश के विभिन्न हिस्सों से आए जनजाति समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में अपनी संस्कृति और परम्परा का दर्शन कराएंगे। ये शोभात्राएं जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करेंगी।

मुख्य अतिथि होंगे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

शोभायात्राएं लालकिले पर आकर एकत्रित होंगी, जहां जनसभा का आयोजन होगा। भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित इस समागम के मुख्य अतिथि होंगे केंद्रीय गृृहमंत्री श्री अमित शाह। यह जानकारी जनजाति सुरक्षा मंच राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. राजकिशोर हांसदा ने 11 मई को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में दी।

500 से अधिक जनजातियां आएंगी दिल्ली

उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा भारत में स्वतंत्रता, सांस्कृतिक अस्मिता और सामुदायिक चेतना के प्रतीक हैं। यह समागम एक ऐतिहासिक राष्ट्रीय आयोजन के रूप में परिकल्पित है। समागम में देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के डेढ़ लाख प्रतिभागियों की उपस्थिति रहने वाली है।

आजादी के बाद पहली बार इतना बड़ा समागम

उन्होंने यह भी बताया कि ये सभी प्रतिभागी अपने स्वयं के खर्च से दिल्ली आ रहे हैं। देश की स्वतंत्रता के बाद पहली बार अपनी धर्म-संस्कृति, परम्परा के विषय को लेकर जनजाति समाज राजधानी दिल्ली में इतनी बड़ी संख्या में एकत्रित हो रहा है। जनजाति सुरक्षा मंच की राष्ट्रीय टोली के सदस्य और पूर्व न्यायाधीश प्रकाश उईके ने बताया कि सांस्कृतिक समागम का मुख्य विचार सूत्र होगा— ‘तू मैं –एक रक्त, वनवासी–ग्रामवासी–नगरवासी, हम सब भारतवासी।’

भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को याद करना

उन्होंने बताया कि समागम के प्रमुख उद्देश्य हैं– भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को याद करना, जनजतियों की समृद्ध सांस्कृतिक एवं गौरवशाली परंपरा का स्मरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और संवाद के लिए एक राष्ट्रीय मंच सामाजिक समरसता के भाव को सुदृढ़ करना।

विभिन्न स्थानों पर भोजन-पानी की व्यवस्था

उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक समागम के निमित्त सुदूर वनों-पर्वतों में निवास करने वाले वनवासी बंधुओं को जानने का, उनका स्वागत करने का अवसर पहली बार दिल्ली के नागरिकों को मिल रहा है, इसलिए विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में आने वाले अपने जनजाति बंधुओं की सभी प्रकार की व्यवस्थाओं के लिए दिल्लीवासी भी प्रयासरत हैं। दिल्ली के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न स्थानों पर आवास, भोजन-पानी, यातायात, चिकित्सा, सुरक्षा और स्वच्छता की व्यवस्था की है। यह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर एक साथ आने का महत्वपूर्ण अवसर है। दिल्ली में होने वाला यह सांस्कृतिक समागम ‘तू–मैं, एक रक्त’ के राष्ट्रीय भाव को अधिक सुदृढ़ करेगा।

इस अवसर पर जनजाति सुरक्षा मंच दिल्ली के संयोजक अशोक कुमार गोंड सहित अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Topics: लालकिला मैदानजनजाति सुरक्षा मंच'जनजाति सांस्कृतिक समागम'Janjati surksha Manchlalkila
अरुण कुमार सिंह
अरुण कुमार सिंह
समाचार संपादक, पाञ्चजन्य | अरुण कुमार सिंह लगभग 25 वर्ष से पत्रकारिता में हैं। वर्तमान में साप्ताहिक पाञ्चजन्य के समाचार संपादक हैं। [Read more]
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