विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और त्रिनिदाद एवं टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर हाल ही में नेल्सन आइलैंड गए। यह जगह इतिहास के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहीं पर 19वीं सदी में भारत से आए गिरमिटिया मजदूरों का पहला समूह पहुंचा था। यह यात्रा भारत और त्रिनिदाद-टोबैगो के बीच पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को याद करने और उन्हें मजबूत करने के लिए की गई।
नेल्सन आइलैंड पर विरासत संरक्षण और ऐतिहासिक दौरा
एस. जयशंकर ने इस दौरान एक क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट में भाग लिया। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य नेल्सन आइलैंड की ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित रखना और उसे बेहतर तरीके से लोगों के सामने प्रस्तुत करना है। भारत सरकार इस काम के लिए आर्थिक मदद भी दे रही है, ताकि वहां के पुराने स्मारकों और दस्तावेजों को संरक्षित किया जा सके। इस मौके पर कमला प्रसाद-बिसेसर भी मौजूद थीं। दोनों नेताओं ने उस स्थान का दौरा किया, जहां लगभग 181 साल पहले, यानी 1845 में, भारत से आए पहले मजदूर पहुंचे थे। ये मजदूर कठिन परिस्थितियों में काम करने के लिए लाए गए थे, लेकिन उन्होंने त्रिनिदाद और टोबैगो के विकास में बड़ा योगदान दिया।
भारतीय मूल की विरासत को जोड़ने और संरक्षित करने की पहल
आज त्रिनिदाद और टोबैगो में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग रहते हैं। उनकी जड़ें भारत के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी हैं। उन्होंने अपनी परंपराओं और संस्कृति को संभालकर रखा है और उसे स्थानीय जीवन के साथ मिलाकर एक नई पहचान बनाई है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच एक समझौता भी हुआ। इसका उद्देश्य वहां रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को उनके इतिहास और पूर्वजों से जोड़ना है। इससे नई पीढ़ी को अपने अतीत को समझने में मदद मिलेगी। नेल्सन आइलैंड को अब एक महत्वपूर्ण विरासत स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां स्मारक, डिजिटल आर्काइव और ऑडियो-विजुअल सेंटर बनाए जाएंगे, ताकि लोग गिरमिटिया मजदूरों के इतिहास को आसानी से समझ सकें। इसके साथ ही एक “गिरमिटिया अध्ययन केंद्र” भी बनाया जाएगा, जहां शोधकर्ता इस इतिहास पर गहराई से अध्ययन कर सकेंगे।

















