अमेरिका और इजरायल के द्वारा ईरान पर किए गए हमले के बाद से ईरान लगातार खाड़ी देशों में स्थित न केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों, बल्कि अन्य हिस्सों पर हमले कर रहा है। उसने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करके दुनिया की तेल और गैस सप्लाई को रोक दिया है। इस बीच भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर लगातार इन देशों के संपर्क में है और इसी कड़ी में उन्होंने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश मंत्रियों से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की मौजूदा स्थिति और वहां के हाल के घटनाक्रमों पर चर्चा की।
बातचीत में क्या हुआ
जयशंकर ने सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान से बात करते हुए वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े ताजा विकासों पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “वेस्ट एशिया में संघर्ष से जुड़े चल रहे घटनाक्रमों पर चर्चा की।” यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से बात में उन्होंने क्षेत्रीय स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर विचार साझा किए। दोनों ही बातचीत में मुख्य फोकस वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव पर रहा, खासकर ईरान और यूएस के बीच बढ़ती दुश्मनी के संदर्भ में भी चर्चा की गई।
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गल्फ देशों के साथ लगातार संपर्क
ये दोनों कॉल्स उस बड़े प्रयास का हिस्सा हैं, जो 28 फरवरी से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के बाद से चल रहा है। जयशंकर ने तब से गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सभी देशों के विदेश मंत्रियों से बात की है। हर बातचीत में उन्होंने यही संदेश दिया कि सारे मुद्दों को बातचीत और संवाद से ही सुलझाया जाना चाहिए। साथ ही, उन्होंने खाड़ी में रहने और काम करने वाले भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई पर भी जोर दिया। भारत के लिए ये बहुत अहम है क्योंकि वहां करीब एक करोड़ से ज्यादा भारतीय रहते और काम करते हैं।
जयशंकर का ब्रसेल्स दौरा
इन बातचीतों के ठीक बीच में जयशंकर 15-16 मार्च को ब्रसेल्स में हैं। यूरोपियन यूनियन की विदेश नीति प्रमुख काया कलास के न्योते पर वो वहां गए हैं। इस दौरान वो EU के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों से मिल रहे हैं और फॉरेन अफेयर्स काउंसिल मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। भारत-EU के बीच हाल में हुई 16वीं समिट के बाद ये पहला बड़ा द्विपक्षीय दौरा है, जिससे दोनों तरफ के रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद है।
















