31 अक्तूबर, 2001 को सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण स्वर्ण-जयंती समारोह आयोजित हुआ था। इस अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक प्रेरक उद्बोधन दिया था। सोमनाथ मंदिर के बारे में उन्होंने जो कहा, वह यहां प्रस्तुत है-
आज का दिन बड़े आनंद का दिन है। आज के दिन भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक सोमनाथ भगवान की मूर्ति-प्रतिष्ठापना को पचास वर्ष हो गए हैं। आनंद का एक दूसरा कारण भी है, आज सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। यह मणिकांचन का संयोग है। अगर सरदार न होते तो शायद सोमनाथ इस रूप में न होता। किस रूप में होता, मैं नहीं कह सकता। लेकिन सोमनाथ प्रतीक है हमारी सनातन संस्कृति का, हमारे शाश्वत धर्म का, भारत के इतिहास में निरंतर होने वाले परिवर्तनों का। इतिहास ने वह क्षण भी देखा था, जब आक्रमणकारियों ने सोमनाथ को भंग कर दिया था। आज भी इस तरह की प्रवृत्ति जोर पकड़ रही है। लेकिन जिस तरह से सोमनाथ का हमने पुनर्निर्माण किया, नवनिर्माण किया और इसे खण्डित व ध्वस्त करने वाले परास्त हो गए, उसी तरह से जो आतंकवादी प्रवृत्ति के बल पर आगे बढ़ना चाहते हैं, मूर्तियों का पूजन नहीं, भंजन करना चाहते हैं, उनका भी एक दिन वही हाल होगा, जो सोमनाथ मंदिर को तोड़ने वालों का हुआ था।
सोमनाथ: राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक
सोमनाथ प्रतीक है चिरंजीवी संस्कृति का, सोमनाथ प्रतीक है सतत् संघर्ष का, सोमनाथ प्रतीक है हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का। आज सोमनाथ भगवान की देखभाल अच्छी तरह हो रही है। सारे देश से यात्री आ रहे हैं। यह बड़ी प्रसन्नता की बात है। हम तो चाहते हैं कि सोमनाथ और उससे लगा यह सारा परिसर एक नया रूप धारण करे, एक नया कलेवर धारण करे। सोमनाथ के पास अन्य तीर्थस्थल हैं। ये सब जुड़े हुए हैं, यद्यपि थोड़ी मात्रा में फैले हुए भी हैं। यहां पोरबंदर है, यहां कृष्ण देह- विसर्जन का पवित्र स्थल है, यहां गिर के देखने लायक दृश्य हैं, पालिताना है, जूनागढ़ है। मैं देख रहा हूं कि अतीत में सोमनाथ बार-बार खण्डित होने के बाद भी फिर से आसमान से बातें करता हुआ खड़ा है, वहीं खड़ा है जहां उसका मान—हरण करने का विफल प्रयास हुआ था। इस समारोह में नए मुख्यमंत्री (नरेंद्र मोदी) आए हैं। मुझे विश्वास है कि इस क्षेत्र के विकास की दिशा में वे कदम उठाएंगे। थोड़ी-बहुत सहायता की जो आवश्यकता होगी उसे भारत सरकार जरूर पूरा करेगी।
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सोमनाथ क्षेत्र में ब्रॉडगेज रेल और पर्यटन विकास पर बल
यह पावन क्षेत्र है, द्वारिका है यहां, पालिताना का उल्लेख मैंने पहले किया है। यह पवित्र भूमि है। गुजरात के पर्यटक बड़ी संख्या में देश के अन्य भागों में जाते हैं। उतनी ही मात्रा में देश के अन्य क्षेत्रों से पर्यटक गुजरात आने चाहिए, इसका प्रबंध बहुत जरूरी है। इसमें एक बाधा है कि सोमनाथ तक ‘ब्राडगेज’ रेलपथ नहीं है। इसका अभाव उस समय भी खला था जब आडवाणी जी यहां से रेलगाड़ी के बजाय रथ पर बैठकर गए थे। उनका रथ पर जाना पहले से तय था, लेकिन ‘ब्राडगेज’ होना चाहिए यह मैं मानता हूं। ‘ब्राडगेज’ यहां होगा, उसका मैं विश्वास दिलाता हूं।

















