बद्रीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी, जिन्हें रावल जी के नाम से जाना जाता है, पारंपरिक रूप से केरल के नंबूदरी ब्राह्मण होते हैं। यह प्रथा 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई थी।
वर्तमान रावल और उनकी भूमिका
जुलाई 2024 में नियुक्त वर्तमान रावल श्री अमरनाथ नंबूदरी जी हैं। रावल जी, भगवान बद्रीनाथ जी के लिए दैनिक अनुष्ठान करते हैं और मंदिर की आध्यात्मिक गतिविधियों का संचालन करते हैं।
बद्रीनाथ रावल की नियुक्ति और परंपरा
रावल समुदाय के सदस्यों का चयन केरल के नंबूदरी ब्राह्मण समुदाय से किया जाता है ताकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक संबंध बनाए रखा जा सके।
बद्रीनाथ रावल की भूमिका एवं अधिकार
रावल जी मुख्य पुजारी होते हैं, जो दैनिक पूजा-अर्चना और पारंपरिक अनुष्ठानों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
ब्रह्मचर्य और पूजा संबंधी नियम
आदि शंकराचार्य जी द्वारा यह व्यवस्था भी लागू है कि प्रमुख रावल को ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है और दिन में पांच बार पूजन से पूर्व स्नान करना भी आवश्यक होता है।
सेना का सम्मान
बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी (रावल) को भारतीय सेना द्वारा सुरक्षित वाहन प्रदान किया जाता है। यह सम्मान इसलिए मिलता है क्योंकि बद्रीनाथ धाम में सेना सुरक्षा करती है और प्रभु बद्रीनाथ को गढ़वाल राइफल्स का सुप्रीम कमांडर माना जाता है, जिनके कपाट खुलने/बंद होने पर सेना बैंड सम्मान देता है।
गढ़वाल राइफल्स का जयघोष भी “जय बद्री विशाल” है।

















