बेंगलुरु/नई दिल्ली । भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में 3 मई, 2026 का दिन एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। बेंगलुरु स्थित स्पेस स्टार्टअप गैलेक्सी (GalaxEye) ने 3 मई, 2026 को अंतरिक्ष की दुनिया में भारत का झंडा गाड़ दिया है। कंपनी ने दुनिया का पहला ‘ऑप्टोसॉर’ (OptoSAR) सैटेलाइट ‘मिशन दृष्टि’ (Mission Drishti) सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है।
यह उपग्रह न केवल तकनीक के मामले में बेजोड़ है, बल्कि सामरिक दृष्टि से चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए बड़ी चिंता का सबब बन सकता है।
पीएम मोदी ने दी बधाई : ‘युवाओं के नवाचार का प्रमाण’
इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुशी जाहिर की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर इस सफलता की सराहना की। उन्होंने कहा-
“गैलेक्सी द्वारा मिशन दृष्टि हमारी अंतरिक्ष यात्रा में एक बड़ी उपलब्धि है। दुनिया के पहले ऑप्टोसॉर उपग्रह और भारत के सबसे बड़े निजी उपग्रह का सफल प्रक्षेपण हमारे युवाओं के नवाचार के प्रति जुनून का प्रमाण है।”
Mission Drishti by GalaxEye marks a major achievement in our space journey. The successful launch of the world’s first OptoSAR satellite and the largest privately-built satellite in India is a testament to our youth’s passion for innovation and nation-building.
Heartiest…
— Narendra Modi (@narendramodi) May 3, 2026
क्यों खास है ‘मिशन दृष्टि’? (World’s First OptoSAR Technology)
आमतौर पर सैटेलाइट तस्वीरें या तो कैमरे (Optical) से ली जाती हैं या रडार (SAR) से। लेकिन ‘दृष्टि’ दुनिया का ऐसा पहला हाइब्रिड प्लेटफॉर्म है जो दोनों को एक साथ जोड़ता है। गैलेक्सी के सीईओ और फाउंडर सुयश सिंह के अनुसार, ‘दृष्टि’ का अर्थ है सब कुछ देख पाने की क्षमता। इस उपग्रह की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘ऑप्टोसॉर’ (OptoSAR) सिस्टम है।
- अंधेरे और बादलों की टेंशन खत्म : भारत जैसे देश में अक्सर बादल छाए रहते हैं, जिससे सामान्य सैटेलाइट तस्वीरें धुंधली आती हैं। लेकिन ‘दृष्टि’ का रडार सिस्टम बादलों और घने अंधेरे के बावजूद जमीन की ‘HD क्वालिटी’ तस्वीरें दे सकता है।
- स्वदेशी तकनीक : इस तकनीक को पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है और इसके लिए ग्लोबल पेटेंट भी हासिल किया गया है।
- सटीकता : यह 1.5 मीटर का रेजोल्यूशन प्रदान करता है, जिसे भविष्य में 0.3 मीटर तक ले जाने की योजना है।
तकनीकी क्षमताएं : एक नजर में
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| वजन | 190 किलोग्राम (निजी क्षेत्र का सबसे भारी उपग्रह) |
| लॉन्च वाहन | स्पेसएक्स (SpaceX) फाल्कन 9 रॉकेट |
| पेयलोड | मल्टीस्पेक्ट्रल कैमरा + सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) |
| संस्थापक | आईआईटी मद्रास के इंजीनियर (सीईओ सुयश सिंह) |
Separation confirmed ! https://t.co/Q78tWV845n
— Suyash Singh (@thesuyashsingh) May 3, 2026
चीन और पाकिस्तान के लिए क्यों बढ़ी चुनौती?
भारत के लिए यह तकनीक रक्षा के क्षेत्र में वरदान साबित होगी। भारत की सुरक्षा के लिहाज से यह सैटेलाइट एक ‘गेम चेंजर’ माना जा रहा है। पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ तनाव के बीच, यह सैटेलाइट सेना को रात के अंधेरे और खराब मौसम में भी सीमा पार की सटीक जानकारी देगा। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे युद्ध हालातों में यह डेटा निर्णायक भूमिका निभाएगा।
- सीमा पर निगरानी : अब घुसपैठियों या दुश्मन की हरकतों को खराब मौसम या रात के अंधेरे में भी छिपना नामुमकिन होगा।
- ऑपरेशन सिंदूर जैसे हालात : पाकिस्तान के साथ हालिया तनावों के बीच, सेना को अब सीमा पार की गतिविधियों की लाइव और सटीक जानकारी मिलेगी।
- विदेशी निर्भरता खत्म : अब भारत को सटीक डेटा या ‘बम डैमेज असेसमेंट’ के लिए दूसरे देशों के कमर्शियल सैटेलाइट्स पर निर्भर नहीं रहना होगा।
एलन मस्क का साथ और इसरो का सहयोग
कैलिफोर्निया से स्पेसएक्स (SpaceX) के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए इसे लॉन्च किया गया। गैलेक्सी की जड़ें IIT मद्रास से जुड़ी हैं, और इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ ने भी इस स्टार्टअप की सफलता की सराहना की है। कंपनी की योजना 2029 तक अंतरिक्ष में 8-10 ऐसे उपग्रहों का एक पूरा समूह (Constellation) स्थापित करने की है।
Falcon 9 is vertical at pad 4E in California ahead of tonight’s launch of the CAS500-2 mission with 45 payloads on board. The 37-minute launch window opens at 11:59 p.m. PT → https://t.co/Q2izSXSwxf pic.twitter.com/gDqIBcsTmn
— SpaceX (@SpaceX) May 3, 2026
कुल मिलाकर ‘मिशन दृष्टि’ का सफल प्रक्षेपण केवल एक सैटेलाइट की लॉन्चिंग नहीं है, बल्कि यह भारत की तकनीकी संप्रभुता की दिशा में एक बड़ा कदम है। गैलेक्सी की योजना 2029 तक ऐसे 8-10 उपग्रहों का समूह बनाने की है।

















