कर्नाटक : 600 करोड़ के 'अल्पसंख्यक पैकेज' पर बवाल! तेजस्वी ने दी चेतावनी
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गरीब हिंदू SC/ST के साथ भेदभाव करती है कर्नाटक सरकार? तेजस्वी सूर्या ने चेतावनी देकर ‘अल्पसंख्यक पैकेज’ पर उठाए सवाल

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने अल्पसंख्यक कॉलोनियों के विकास के लिए 600 करोड़ रुपये को मंजूरी दी है। BJP सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसे 'असंवैधानिक' बताते हुए कोर्ट जाने की चेतावनी दी है। जानिए क्या है पूरा विवाद

Written byजय प्रकाश गुप्ताजय प्रकाश गुप्ता — edited by Shivam Dixit
May 3, 2026, 06:05 pm IST
inभारत, कर्नाटक
Tejasvi Surya Karnataka Govt 600 Crore Minority Colony Development Plan

कर्नाटक : 600 करोड़ के 'अल्पसंख्यक पैकेज' पर बवाल!

Tejasvi Surya on Karnataka Minority Package : कर्नाटक में सिद्धारमैया सरकार ने हाल ही में अल्पसंख्यकों के विकास के लिए एक ताजा  फैसला लिया जिसने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। कर्नाटक सरकार की कैबिनेट ने अल्पसंख्यक बहुल कॉलोनियों के विकास के लिए 600 करोड़ रुपये की कार्ययोजना को मंजूरी दी है। इस फैसले पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद तेजस्वी सूर्या ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे असंवैधानिक बताते हुए कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।

कर्नाटक में नई योजना : अल्पसंख्यक बहुल बस्तियों के लिए 600 करोड़ का बजट

कर्नाटक सरकार की इस नई योजना के तहत राज्य की अल्पसंख्यक बहुल बस्तियों के बुनियादी ढांचे को सुधारजाएगा। इसके लिए 600 करोड़ रुपये के बजट को हरी झंडी दिखाई है। यह योजना अल्पसंख्यक कल्याण, हज और वक्फ विभाग के तहत लागू की जाएगी।

यह फंड अगले दो वर्षों (2026-27 और 2027-28) के दौरान खर्च किया जाएगा। राज्य के 11 नगर निगमों के तहत आने वाले सबसे पिछड़े क्षेत्रों और झुग्गी-झोपड़ियों (स्लम्स) को इसके लिए चुना गया है। इन कॉलोनियों में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं को अपग्रेड किया जाएगा। वित्त विभाग ने पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद कैबिनेट ने इसे लागू करने का अंतिम निर्णय लिया।

तेजस्वी सूर्या के तीखे सवाल : क्या भूगोल और बुनियादी ढांचे का भी कोई धर्म होता है?

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे भारत के संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। उनका मुख्य तर्क यह है कि कल्याणकारी योजनाओं का आधार सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन होना चाहिए न कि धर्म।

तेजस्वी सूर्या ने सवाल उठाया कि 600 करोड़ रुपये का यह धर्म-आधारित पैकेज संविधान के अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष समानता) और अनुच्छेद 15 (धर्म के आधार पर भेदभाव का निषेध) का पालन कैसे करता है? उन्होंने पूछा कि क्या राज्य धर्म के आधार पर सार्वजनिक धन का बंटवारा कर सकता है?

‘दो-राष्ट्र सिद्धांत’ की मानसिकता : बीजेपी सांसद ने बताया असंवैधानिक

उन्होंने सरकार से पूछा ‘व्यक्तियों का धर्म हो सकता है, लेकिन सड़कों, नालियों और गलियों का धर्म कब से होने लगा? सरकार किस आधार पर भौगोलिक क्षेत्रों को ‘अल्पसंख्यक कॉलोनी’ के रूप में वर्गीकृत कर रही है? अगर कल हर समुदाय धर्म, जाति या पहचान के आधार पर खास इलाके के विकास के लिए फंड की मांग करने लगे तो एक साझा नागरिक पहचान और आम नागरिकता के विचार का क्या होगा?’

बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसकी तुलना ‘दो-राष्ट्र सिद्धांत’ की खतरनाक मानसिकता से की। उन्होंने कहा कि भारत ने धर्म के आधार पर विभाजन को खारिज कर दिया था तो अब स्वतंत्र भारत में प्रशासन को धार्मिक आधार पर कल्याणकारी ब्लॉक क्यों बनाने चाहिए?

हिंदू, दलित और ओबीसी गरीबों की अनदेखी का आरोप

उन्होंने पूछा कि यदि वास्तविक उद्देश्य पिछड़े क्षेत्रों का विकास है, तो उसी ढांचे के तहत समान रूप से गरीब हिंदू, दलित, एससी/एसटी और ओबीसी कॉलोनियों को शामिल क्यों नहीं किया गया? केवल एक विशेष धर्म की कॉलोनियों के लिए अलग से फंड क्यों? राज्य सरकार का यह कदम धार्मिक आधार पर अलगाव को बढ़ावा देगा।

तेजस्वी सूर्या ने सरकार पर ‘गेटोइजेशन’ (किसी विशेष समुदाय को एक ही इलाके तक सीमित करना) को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मोहल्लों को आधिकारिक तौर पर ‘अल्पसंख्यक कॉलोनी’ और ‘बहुसंख्यक क्षेत्र’ के रूप में वर्गीकृत करना एक साझा नागरिक पहचान के विचार को नष्ट कर देता है। उनके अनुसार, सरकार का कर्तव्य एकीकृत शहर बनाना है न कि चुनावी सुविधा के लिए कर्नाटक के भीतर अदृश्य धार्मिक सीमाएं खींचना।

तेजस्वी सूर्या ने स्पष्ट किया है कि वे राज्य सरकार के इस ‘असंवैधानिक’ कदम को अदालत में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि संविधान के प्रति जागरूक हर नागरिक को इस फैसले का विरोध करना चाहिए क्योंकि यह साझा नागरिकता के विचार पर चोट करता है।

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जय प्रकाश गुप्ता
जय प्रकाश गुप्ता
लेखक करीब एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। अभी स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गहरी पकड़ है। [Read more]
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