गत 27 अप्रैल को नागपुर में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ। डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन महानुभावों का सम्मान किया गया, जिनके मार्गदर्शन में अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर कल्पना से भी अति भव्य बना है।
हमको भी अपना काम ऐसे ही करना है। कल्पना से अधिक उत्तम, अधिक भव्य, अधिक सुंदर करना है, ताकि विश्व में धर्म की स्थापना हो। भारत का उत्थान भारत की संतान ही करेगी और कोई देश भारत का उद्धार नहीं करेगा। भारत बड़ा होकर सारी दुनिया का उद्धार करेगा। यह विधि लिखित है। उसको पूर्ण करने में हमारा हाथ लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि अयोध्या में मंदिर निर्माण हो गया, उसकी व्यवस्था के लिए एक विश्वस्त मंडल बना है। पर अब प्रत्येक मन को अयोध्या बनाकर राष्ट्र का मंदिर खड़ा करना है।
डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के अध्यक्ष श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि राम मंदिर हिंदू समाज की पुनः प्रतिष्ठा का प्रतीक है। हिंदू समाज के सम्मान की प्रतिष्ठा का प्रतीक है। गत पांच वर्ष से लगातार परिश्रम से इस भव्य मंदिर का निर्माण हुआ है। स्वाभाविक रूप से जिन्होंने बड़ी ऊर्जा-शक्ति लगाई, ऐसे बंधुओं का नागपुर बुलाकर उनके योगदान का सम्मान किया जाए। सम्मान तो प्रतीकात्मक होता है। काम करने वाले आज यहां पर जितने हैं, उससे 100 गुना वहां पर थे, लेकिन एक प्रतीकात्मक रूप में कुछ लोगों को यहां पर निमंत्रित किया गया।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव श्री चम्पत राय ने कहा कि राम मंदिर में लोहे का बिल्कुल उपयोग नहीं हुआ है। जमीन के नीचे भी नहीं है, जमीन के ऊपर भी नहीं है। मंदिर निर्माण का दायित्व एलएंडटी ने लिया और 6,000 कारीगर अपने-अपने स्थानों पर अयोध्या में काम करते रहे। यह समाज के स्वैच्छिक समर्पण से बना हुआ स्थान है। सबका योगदान है, 42 दिन में 10 करोड़ लोगों ने योगदान दिया। कार्यक्रम में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी जी महाराज, डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के उपाध्यक्ष श्रीधर गाडगे सहित अनेक वरिष्ठ जन उपस्थित रहे।
















