आपरेशन सिंदूर के एक साल बाद भी पाकिस्तान अपनी हार से तिलमिलाया हुआ दिख रहा है। इस आपरेशन में वेस्टर्न कमांड के हाथों हुई पिटाई उसे अभी तक साल रही है और इसी कारण सेना की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए उसने अपने एजेंटों के जरिए भारत में सीसीटीवी कैमरे इंस्टाल करवाए हैं। पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने दिल्ली से लेकर कश्मीर तक भारतीय सेना की हर गतिविधि पर नजर रखने के लिए एक नापाक साजिश रची है। इसके तहत इन क्षेत्र में जासूसी के लिए मुख्यमार्गों, संवेदनशील सैन्य इलाकों व रेलवे स्टेशनों के आसपास चीन निर्मित कुछ ऐसे सीसीटीवी कैमरे इंस्टॉल करवा दिए जिसके जरिये लाइव फुटेज सीधे पाकिस्तान पहुंचती थी।
कई शहरों में पकड़े जा रहे हैं कैमरे
पंजाब पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब इस साजिश का पर्दाफाश होने के बाद विभिन्न शहरों में यह कैमरे भी पकड़े जा रहे हैं। इन मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसियां विभिन्न राज्यों की पुलिस के साथ मिलकर इस साजिश के खिलाफ काम कर रही हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि पाकिस्तान में बैठा फौजी नाम का एक हैंडलर इस काम के लिए यहां स्थानीय गुर्गों को ऑपरेट कर उन्हें कुछ हजार रुपयों का लालच दे उनसे सीसीटीवी इंस्टॉल करवा रहा है।
इस वजह से तिलमिलाया पाकिस्तान
दरअसल, भारतीय सेना की दो बड़ी वेस्टर्न और नार्दर्न कमान कमांड इसी क्षेत्र में मौजूद हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड ने ही पाकिस्तान को गहरे जख्म दिए थे। इसी बात से बौखलाए पाकिस्तान ने इस मॉड्यूल के जरिये सेना की सड़क और रेल के माध्यम से होने वाली मूवमेंट की जासूसी करवाने की साजिश रची। सैन्य यूनिटों की पलटन सड़कों और रेल के माध्यम से ही इधर से उधर होती है। ये किस सैन्य क्षेत्र से निकली है और कहां पहुंच रही है, इसी की जानकारी पाकिस्तान जुटाना चाहता है।
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अब तक पकड़े जा चुके सीसीटीवी
- गाजियाबाद पुलिस ने पाकिस्तान की आईएसआई से जुड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। 11 आरोपी पकड़े थे।
- दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लगाए कैमरे पकड़े गए थे। इनका एक्सेस पाकिस्तान में था।
- अंबाला पुलिस ने नेशनल हाईवे 152 के ओवरब्रिज पर दो सीसीटीवी कैमरे बरामद किए थे। इनका इस्तेमाल जासूसी के लिए किया जा रहा था। कैमरों से सिम कार्ड भी बरामद हुआ था। तार पाकिस्तान से जुड़े थे।
- अलवर-बीकानेर छावनी में सोलर कैमरे लगाकर जासूसी नेटवर्क का हुआ था भंडाफोड़। दिल्ली-पंजाब से पकड़े गए थे जासूस।
- अब पंजाब पुलिस ने जालंधर से एक व कपूरथला से दो लोगों को गिरफ्तार किया है। दो 4जी कनेक्टिविटी वाले चीनी सीसीटीवी कैमरे, सोलर प्लेट, विदेशी हैंडलरों से जुड़े चार मोबाइल फोन, और एक वाई-फाई सेट बरामद किया।
आतंकवाद के मोर्चे पर भी बढ़ी गतिविधियां
पंजाब को फिर से आतंकवाद की आग से सुलगाने के लिए पाकिस्तानी सेना आईएसआई के जरिये देश विरोधी ताकतों को पूरा समर्थन दे रही है। आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए सेना अपने हथियार और गोला बारूद पंजाब भेज रही है। पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्टरी में तैयार कारतूस और हैंड ग्रेनेड के साथ-साथ अब पाकिस्तानी सेना रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (आरपीजी) भी स्थानीय आतंकियों के लिए सीमा पार से भिजवा रही है।
शंभू रेलवे ट्रैक पर धमाके के मामले में जांच कर विभिन्न एजेंसियों ने इस बात का खुलासा किया है। दरअसल, धमाका करने वाले आतंकी जगरूप सिंह उर्फ जूपा के भाई सतनाम सिंह सत्ता की निशानदेही पर पंजाब पुलिस ने उनके गांव तरनतारन स्थित पंजवाड़ से हथियार, विस्फोटक, पिस्तौलें, कारतूस, हैंड ग्रेनेड, आईईडी, आरडीएक्स समेत अन्य सामान जब्त किया है। इन हथियारों में आरपीजी समेत कुछ ऐसी विस्फोटक सामग्री भी जब्त की गई है, जिसे पाकिस्तानी सेना इस्तेमाल करती है।
ड्रोन के जरिए होती है हथियारों की सप्लाई
सूत्रों ने बताया कि ये हथियार और गोलाबारूद ड्रोन के माध्यम से सीमा पार के गांवों में फेंके गए जिन्हें पंजवाड़ गांव में जूपा और उसके भाई ने अपने तबेले व कार में छिपा रखा था। आईएसआई और पाकिस्तानी सेना ने तो अपना काम कर दिया था, अब आतंकी घटना को अंजाम देने के लिए जरूरत थी स्थानीय नेटवर्क, टास्क और फंड की। यह काम किया मलयेशिया में बैठे मुख्य हैंडलर जुझार सिंह और अमेरिका में आतंकी सुरिंदर सिंह ठीकरीवाल ने।
गैंगस्टरों से अलग मॉड्यूल किया तैयार
आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए एक अलग मॉड्यूल खड़ा किया गया था, जिसमें धर्म के नाम पर कुछ कट्टरपंथियों को गुमराह कर उन्हें दहशत फैलाने के लिए तैयार किया गया। इस दौरान गैंगस्टरों को सीधे शामिल नहीं किया गया। पंजाब में इस नेटवर्क को खड़ा करने व गोला बारूद और हथियार उपलब्ध करवाने में पाकिस्तान में बैठे आतंकी रंजीत सिंह उर्फ नीटा ने मुख्य भूमिका निभाई। मलेशिया में बैठे जुझार सिंह ने अमेरिका में सक्रिय आतंकी सुरिंदर सिंह ठीकरीवाल की मदद से इस आतंकी मॉड्यूल के लिए फंड की व्यवस्था की।
मलेशिया में दिया जाता है टास्क
इस मामले में जुटी जांच एजेंसियों ने यह भी खुलासा किया है कि आतंकियों ने किस घटना को कैसे अंजाम देना है, इसकी ट्रेनिंग और टास्क मलयेशिया में दिया जाता है। इस प्रकरण में काबू किया गया प्रदीप सिंह खालसा इस मॉड्यूल का हेड था और वही स्थानीय नेटवर्क से आतंकी घटना को अंजाम दिलवाता था। एक कट्टरपंथी संगठन के जरिये वे युवाओं को गुमराह करता था।

















